व्यवस्था पर सवाल: शहर के वोटरों को ग्रामीण क्षेत्र में करना पड़ा मतदान, 15 किलोमीटर दूर तक बनाए गए मतदान केंद्र, बुजुर्ग मतदाताओं को हुई परेशानी
डिजिटल डेस्क, नागपुर। नागपुर विभाग स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के लिए शुक्रवार, 23 अक्टूबर को हुए मतदान के दौरान कई मतदाताओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। शहर में रहने वाले मतदाताओं को मतदान के लिए ग्रामीण क्षेत्रों तक जाना पड़ा। कुछ मतदाताओं को 15 किमी तक का सफर तय करना पड़ा। इससे जिला प्रशासन और निर्वाचन कार्यालय की व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। मतदाताओं का कहना था कि जब उनके घरों के 2 किमी के दायरे में स्कूल, कॉलेज और सरकारी कार्यालय जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं, तो उन्हें मतदान के लिए 15 किमी दूर क्यों भेजा गया? मतदान का प्रतिशत कम रहने के पीछे इसे भी एक संभावित कारण माना जा रहा है।
स्नातक चुनाव में मैदान में उतरे 38 उम्मीदवारों का भाग्य 23 अक्टूबर को मतपेटियों में बंद हो गया। चुनाव के नतीजे 27 अक्टूबर को घोषित किए जाएंगे। हालांकि, नतीजों से पहले ही मतदान केंद्रों के आवंटन को लेकर मतदाताओं ने जिला प्रशासन और निर्वाचन कार्यालय के प्रबंधन पर सवाल खड़े किए हैं।
स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में कुल 2,55,603 मतदाता हैं, जिनमें से नागपुर जिले में 1,44,466 मतदाता शामिल हैं। नागपुर शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग हर 2 किमी के दायरे में स्कूल, कॉलेज, सरकारी कार्यालय और आंगनवाड़ी केंद्र उपलब्ध हैं। इसके बावजूद कई मतदाताओं को 15 किमी दूर मतदान केंद्र आवंटित किए गए।
वाड़ी और दत्तवाड़ी के मतदाताओं को नगर पंचायत बेसा क्षेत्र में मतदान केंद्र दिया गया। इसी तरह दिघोरी, हुड़केश्वर और ग्राम पंचायत पांजरी (मिहान) के मतदाताओं को भी मतदान के लिए बेसा पहुंचना पड़ा। दूसरी ओर, बेसा के करीब 50% मतदाताओं को 2 किमी के दायरे में मतदान केंद्र मिला, जबकि शेष 50% मतदाताओं को लगभग 15 किमी दूर वाड़ी जाकर मतदान करना पड़ा। मतदान केंद्रों के इस तरह के आवंटन से मतदाताओं में नाराजगी देखी गई।
दत्तवाड़ी से बेसा पहुंचकर किया मतदान
दत्तवाड़ी निवासी 67 वर्षीय सुरेश अरसाडे को नगर पंचायत बेसा के अंतर्गत आने वाले विरगुड़ा मतदान केंद्र पर वोट डालने जाना पड़ा। उन्होंने करीब 15 किमी का सफर तय कर अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया।
सुरेश अरसाडे ने नाराजगी जताते हुए कहा कि जब मतदान से जुड़ी सभी सुविधाएं नजदीक उपलब्ध हैं, तो इस उम्र में उन्हें 15 किमी दूर मतदान केंद्र तक जाने के लिए मजबूर करना समझ से परे है। उन्होंने निर्वाचन व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रशासन की इस व्यवस्था की जितनी निंदा की जाए, कम है।
‘बस, अब यही दिन देखने बाकी थे’
वाड़ी के आठवां मील क्षेत्र में रहने वाले बुजुर्ग सुखदेव भिवगड़े ने भी मतदान केंद्र दूर होने पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि अपने जीवन में पहली बार उन्हें मतदान करने के लिए इतना लंबा सफर तय करना पड़ा है। इससे पहले कभी ऐसी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा। उन्होंने बताया कि आठवां मील से बेसा की दूरी करीब 15 किमी है। इस उम्र में मतदान के लिए इतनी दूर जाना पड़ा, जबकि आसपास ही तमाम सुविधाएं उपलब्ध हैं। सुखदेव भिवगड़े के अनुसार, मतदान केंद्रों के आवंटन में प्रशासन से चूक हुई है। उन्होंने आशंका जताई कि मतदान केंद्र दूर होने के कारण कुछ मतदाताओं ने मतदान करने से परहेज भी किया होगा, जिससे मतदान प्रतिशत प्रभावित हुआ हो सकता है।
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