दैनिक भास्कर हिंदी: नुकसान भरपाई : नागपुर विभाग के 580 किसानों के लिए 11 करोड़ मंजूर

December 20th, 2018

डिजिटल डेस्क, नागपुर। इस वर्ष गर्मी के मौसम में असमय हुई वर्षा और ओला वृष्टि के कारण खराब हुई फसल से प्रभावित किसानों को स्टेट डिजास्टर रिस्पाॅन्स फंड की ओर से नुकसान की भरपाई की जाएगी। राज्य सरकार ने मंगलवार को इसके लिए 11 करोड़ रुपए की राशि मंजूर किए जाने संबंधी जीआर जारी किया है। राज्य सरकार की ओर से मंजूर इस राशि के लाभार्थियों में नागपुर विभाग के 580 किसान सहित विदर्भ के 1436 किसान शामिल हैं। नागपुर के किसानाें की संख्या 29 हैं। यह क्षतिपूर्ति स्टेट डिजास्टर रिस्पाॅन्स फंड की ओर से उन किसानों को प्रदान की जाती है, जिनकी फसल को खराब मौसम के 33 प्रतिशत से ज्यादा का नुकसान उठाना पड़ता है।

उल्लेखनीय है कि इस वर्ष अप्रैल और मई माह में असमय बारिश और ओला गिरने से राज्य में बड़े स्तर पर फसलों को क्षति पहुंची थी। विदर्भ में कुल 36.16 हेक्टेयर पर लगी फसल खराब हुई थी। क्षतिपूर्ति की राशि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के द्वारा सीधे किसानों के बैंक खाते में भेजी जाएगी। बैंक क्षतिपूर्ति राशि से कोई राशि काट नहीं सकेगा। सरकार की ओर से जारी शासनादेश के अनुसार अप्रैल माह के लिए 8 करोड़ 14 लाख 98 हजार 540 रुपए और मई माह के लिए 2 करोड़ 93 लाख 655 रुपए मंजूर किए गए हैं। अप्रैल में खराब मौसम के कारण 5093.65 हेक्टेयर भूमि पर लगी 12726 किसानों की फसल खराब हुई थी। मई में 1740.74 हेक्टेयर भूमि पर लगी 4409 किसानों की फसल खराब हुई थी। यहां के किसान हुए थे प्रभावित: असमय वर्षा और ओलावृष्टि से प्रभावित किसानों में नागपुर, अमरावती, पुणे और औरंगाबाद के किसान शामिल हैं। 

अप्रैल में हुई क्षति के लिए याेग्य पाए गए किसानों की संख्या
नागपुर विभाग    -    580
गोंदिया    -    331
गढ़चिरोली    - 209
नागपुर    - 29
चंद्रपुर    -    10
वर्धा    -    1 
अमरावती विभाग    -   773
अमरावती    -    271
वाशिम    -    267
यवतमाल    -    214 
बुलढाणा    -    21 

मई माह हुई क्षति के लिए याेग्य पाए गए किसानों की संख्या 
यवतमाल जिला    -    83 

जिले के किसानों की खरीफ की फसल पहले ही कम वर्षा के कारण खराब हो चुकी है अब रबी काे भी पानी की कमी की मार झेलनी पड़ रही है। जिले का उमथा गांव, जहां आमिर खान के पानी फाउंडेशन से प्रेरित होकर जल संरक्षण के लिए कई कदम उठाए गए थे, वहां भी पानी नहीं है। इससे कपास की फसल औसत से कम रही, तो संतरे भी समय से पहले ही पेड़ों से गिर गए। धान की स्थिति सबसे खराब थी। अब पानी की कमी के कारण किसान रबी की फसल की बुआई की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। 

मेहनत पर पानी 
उमथा गांव के लोगों ने गांव में चेक डैम और तालाब बनाने के लिए लगभग चार लाख रुपए जमा किए और कई दिनों तक मेहनत की। उन्हें उम्मीद थी कि रबी के लिए जलाशयों और चेक डैम में काफी पानी रहेगा। पीने के पानी की कमी का भी सामना नहीं करना पड़ेगा। उम्मीद के विपरीत गांव के डैम और जलाशय सूखे पड़े हैं।  

मप्र में बने चौरई डैम के कारण तोतलाडोह सूखा
पारसिवनी, मौदा और कामठी के किसानों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। कम वर्षा के बाद मप्र में बने चौरई बांध के कारण तोतलाडोह जलाशय में काफी कम पानी है। सिंचाई विभाग ने इसे नागपुर शहर और खापरखेड़ा और कोराडी पावर प्लांट के लिए रिजर्व कर रखा है।  

 

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