दैनिक भास्कर हिंदी: कोटा में एक माह में 77 शिशुओं की मौत, मुख्यमंत्री गहलोत ने दिया जांच का आदेश

December 27th, 2019

हाईलाइट

  • सोमवार व मंगलवार को 10 नवजात शिशुओं की मौतें हुईं है
  • 535 जीवन रक्षक उपकरणों में से 320 काम नहीं कर रहे अस्पताल में

डिजिटल डेस्क, जयपुर। कोटा के जेके लोन अस्पताल में बीते एक महीने में 77 बच्चों की मौत हो गई है। इसकी वजह जीवन रक्षक उपकरणों की कमी हो सकती है। इस शिकायत के सामने आने के बाद राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मामले की जांच का आदेश दिया है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने शुक्रवार को कहा कि जेके लोन अस्पताल में बच्चों की मौत की जांच के लिए एक टीम कोटा भेजी गई है। उन्होंने कहा कि दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

अस्पताल सूत्रों ने कहा कि सिर्फ दिसंबर में 77 बच्चों की मौत हुई है, जबकि सोमवार व मंगलवार को 10 मौतें हुईं हैं। गहलोत ने चिकित्सा शिक्षा सचिव वैभव गलेरिया को कोटा का दौरा करने और तत्काल आधार पर एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है।

यहां कमी का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं
वैभव गलेरिया ने कोटा में कहा कि मुख्यमंत्री गहलोत ने मामले को गंभीरता से लिया है और इसलिए मैं नवजातों की मौत के कारणों का पता लगाने के लिए यहां आया हूं। एक स्पेशल कमेटी जांच करेगी कि क्या बच्चों की मौत की वजह हाईजीनिक या क्लिनिकल मुद्दे हैं या नहीं। इसके अलावा, सभी दूसरे मुद्दों को देखा जाएगा। यह पूछे जाने पर कि स्टाफ की कमी के कारण अस्पताल प्रभावित हो रहा है, उन्होंने कहा, मैं पूरी जांच के बिना टिप्पणी नहीं कर सकता। हम यहां कमी का पता लगाने की और समाधान भी खोजने की कोशिश कर रहे हैं।

535 जीवन रक्षक उपकरणों में से 320 काम नहीं कर रहे
सूत्रों ने कहा कि 535 जीवन रक्षक उपकरणों में से 320 काम नहीं कर रहे हैं। इसके अलावा 71 इंफेंट वामर्स में से सिर्फ 27 काम कर रहे हैं। कुछ वेंटिलेटर भी सही तरह से काम नहीं कर रहे हैं। हालांकि, अस्पताल प्रशासन ने इससे इनकार किया है। सीएमओ के सूत्रों ने पुष्टि की कि गहलोत मामले को गंभीरता से ले रहे हैं और खुद जांच की निगरानी कर रहे हैं। अस्पताल के सूत्रों ने कहा कि सभी बच्चों को अस्पताल में गंभीर हालत में लाया गया था।

लापरवाही की वजह से नहीं हुई बच्चों की मौत
अस्पताल अधीक्षक डॉ. एचएल मीणा ने कहा​ कि हमारी जांच कहती है कि 10 मौतें सामान्य थीं और बच्चों की मौत लापरवाही की वजह से नहीं हुई है। इसी तरह विभाग के प्रमुख (पीडियाट्रिक्स) अमृत लाल बैरवा ने कहा कि राष्ट्रीय एनआईसीयू के रिकॉर्ड के अनुसार, शिशुओं की 20 फीसदी मौतें स्वीकार्य हैं, जबकि कोटा में 10-15 फीसदी मौतें हुई हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों को गंभीर हालत में भर्ती कराया गया था।