एएसपी के साथ मोर्चे पर थे 5 सौ जवान, एक दिन पहले किया वादा युवाओं ने निभाया: अग्निपथ: सतना में बेअसर रहा भारत बंद, नहीं हुआ विरोध-प्रदर्शन

June 20th, 2022


डिजिटल डेस्क सतना। अग्निपथ योजना के विरोध में बुलाए गए भारत बंद के दौरान शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए जिला पुलिस, रेल सुरक्षा बल और राजकीय रेल पुलिस की सक्रियता से किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति निर्मित नहीं हुई। जिले में कहीं भी विरोध-प्रदर्शन नहीं हुआ और न ही रेलवे स्टेशनों में हंगामाखेज स्थिति बनी। हालांकि हर स्थिति से निपटने की पूरी तैयारी की गई थी। एसपी आशुतोष गुप्ता ने एडिशनल एसपी सुरेन्द्र जैन के नेतृत्व में 5 सौ जवानों को ड्यूटी पर तैनात कर दिया था। 18 स्टेशनों पर कुल 21 पुलिस टीम सक्रिय रहीं तो शहर में 10 चौराहों पर फिक्स पिकेट, 10 मोबाइल पेट्रोलिंग और तीन रिजर्व पार्टी उतारी गई थीं। जिले की सीमा में आने वाले प्रत्येक रेलवे स्टेशन के साथ ही सतना शहर के सभी एंट्री प्वाइंट और प्रमुख चौराहों पर पुलिस बल लगाया गया था। शहर में सीएसपी महेन्द्र सिंह चौहान, मैहर क्षेत्र में एसडीओपी लोकेश डाबर, उचेहरा में एसडीओपी मोहित यादव, जैतवारा में डीएसपी ख्याति मिश्रा और मझगवां में एसडीओपी आशीष जैन मोर्चे पर थे।
रात 3 बजे से मोर्चे पर थी पुलिस-
एएसपी सुरेन्द्र जैन ने रात्रि के 3 बजे दलबल के साथ रेलवे स्टेशन पहुंचकर आरपीएफ के असिस्टेंट कमांडेंट एसके मिश्रा, थाना प्रभारी बब्बन लाल और जीआरपी चौकी इंचार्ज जीपी त्रिपाठी के साथ पैदल मार्च किया तो स्टेशन में प्रवेश करने के सभी रास्तों की कड़ी निगरानी के लिए जवानों को तैनात कराया। सतना के अलावा बड़े स्टेशनों पर पुलिस इंस्पेक्टर या थाना प्रभारी और छोटे स्टेशनों पर सब इंस्पेक्टर रैंक के अधिकारी के नेतृत्व में पुलिस टीम तैनात की गई थी। सतना जंक्शन पर टियर गैस वाहन और पुलिस बज्र वाहन भी बुलाया गया था।  हालांकि रविवार को पुलिस-प्रशासन के साथ मीटिंग के बाद ज्ञापन सौंपकर जिले के युवाओं ने भारत बंद से खुद को अलग कर लिया था और अपना वादा निभाया भी।
6 टे्रन रद्द, जो चलीं उनमें सवारी नहीं-
अग्निपथ के खिलाफ भारत बंद का असर ट्रेनों और रेलवे स्टेशनों पर साफ नजर आया। सतना से गुजरने वाली रीवा-इतवारी, पाटलीपुत्र-एलटीटी, बैंगलोर-दानापुर, कानपुर-दुर्ग, दानापुर-सिकंदराबाद और बनासबाड़ी-पटना एक्सप्रेस को अनिश्चितकाल के लिए रद्द कर दिया गया तो 15 से ज्यादा टे्रनें 10 घंटे की देरी से चल रही थीं। वहीं जो गाडिय़ां पटरियों पर दौड़ रही हैं, उनमें भी सवारियां न के बराबर थीं। स्टेशनों पर भी सन्नाटा पसरा रहा।