दैनिक भास्कर हिंदी: बैगा परिवारों तक नहीं पहुंची उज्जवला योजना, घोघरी गांव के 100 से अधिक परिवार पहुंचे कलेक्ट्रेट

August 22nd, 2018

डिजिटल डेस्क, शहडोल। गरीब आदिवासियों के लिए शासन द्वारा लागू योजनाएं जिले में किस प्रकार दम तोड़ रही हैं, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि आज भी आदिवासियों की रसोई धुंआ रहित नहीं हो सकी है। न ही कुपोषण दूर करने की राहत राशि ही पहुंच पाई है। उक्त दोनों योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए शासन स्तर से विशेष प्रयास हो रहे हैं, इसके बावजूद जरूरतमंदों तक नहीं पहुंच पा रही है। ग्राम पंचायत घोघरी उन गांवों में शामिल हैं, जहां निवासरत बैगा महिला आदिवासी आज भी चूल्हों में लकड़ी से खाना बनाती हैं।

महिलाओं ने बताया कि गांव में 100 से ज्यादा बैगा आदिवासियों की बस्ती है। एक भी घर में उज्जवला योजना के तहत गैस सिलेण्डर प्रदाय नहीं किया गया। जबकि गांव के कोटेदार और सचिव को कई बार आवेदन दिया गया। महिलाओं ने बताया कि हर घर में आज भी लकड़ी से चूल्हा ही चलता है। यही नहीं कुपोषण दूर करने के लिए शासन द्वारा 1-1 हजार रुपए की मदद भी नहीं मिल पा रही है। अधिकारी आते हैं, नाम लिखकर ले जाते हैं। गांव की रामबाई, बेलाकली, गेंदी, दुअसिया, सुनीता, आशा, रेखा, भागवती, सरबती, लीलावती, सुनीता, फूलबाई, संतोषी, उर्मिला सहित अन्य महिलाओं ने कलेक्टर से उक्त दोनों योजनाओं का लाभ दिलाने की गुहार लगाई है।

पंचायतों में चस्पा होगी सूची
बैगा परिवारों को कुपोषण से मुक्ति के लिए प्रतिमाह 1 हजार की आर्थिक सहायता योजना के क्रियान्वयन के संबंध में सहायक आयुक्त जनजातीय कार्य विभाग द्वारा सभी खण्ड शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी किए गए हैं। जिसके अनुसार दिसम्बर 2017 से जुलाई 2018 तक बैगा महिला मुखिया की सूची ईमेल के माध्यम से भेजी गई है। सूची संबंधित ग्राम पंचायतों में चस्पा करें तथा इसे पात्र बैगा महिला मुखिया जो लाभान्वित महिला सूची में सम्मिलित नहीं हैं, उनकी सूची बैंक खाता सहित तत्काल तैयार कराकर बैगा विकास अभिकरण को उपलब्ध कराएं, ताकि योजना का लाभ दिया जा सके। ग्राम पंचायत के सचिवों को इस योजना के सफल क्रियान्वयन हेतु जानकारी प्रदान की जाए साथ ही प्रत्येक ग्राम से यह प्रमाण पत्र भी लिया जाए कि कोई पात्र बैगा मुखिया महिला योजना के लाभ से वंचित नहीं है।