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बर्ड फ्लू की दहशत - चिकन के रेट हुए आधे, फिर भी लोग खरीदने से कर रहे तौबा

बर्ड फ्लू की दहशत - चिकन के रेट हुए आधे, फिर भी लोग खरीदने से कर रहे तौबा

पशु चिकित्सा विभाग ने एक दर्जन सैम्पल लेकर 3 सैम्पल भोपाल स्थित लैब भेजे, रिपोर्ट आने के बाद होगा पक्षियों की मौत का खुलासा
डिजिटल डेस्क जबलपुर ।
साइंस कॉलेज में दो कबूतरों के मृत मिलने के बाद शुक्रवार को पाटन बायपास में दो कोयलों और गौर नदी में कबूतर व टिटहरियों के मरने की खबर आने के बाद शहर में लोगों में बर्ड फ्लू की दहशत बढ़ गई है। पशु चिकित्सा विभाग की रैपिड रिस्पांस टीमों ने शुक्रवार को एक दर्जन सैम्पल लेकर उनमें से 3 सैम्पल भोपाल स्थित लैब भेजे हैं, जहाँ से रिपोर्ट आने पर पक्षियों की रहस्यमयी मौत का खुलासा हो सकेगा। शहर में बर्ड फ्लू की संभावित एन्ट्री को देखते हुए लोगों में अंडों और चिकन को लेकर जमकर खौफ देखा जा रहा है। अंडे और चिकन विक्रेताओं ने दाम करीब आधे भी कर दिए, फिर भी लोग उन्हें खाने से तौबा कर रहे हैं। सुबह कोयल और फिर मृत मिलीं टिटहरी व कबूतर
शुक्रवार सुबह साइकिलिंग के लिए निकले एक व्यक्ति को पाटन बायपास पर दो पक्षी मृत दिखाई दिए। उनके द्वारा दी गई  सूचना पर पशु चिकित्सा विभाग की रैपिड रिस्पांस टीम मौके पर पहुँची। तब जाकर पक्षियों के कोयल होने की पुष्टि हुई। इसके कुछ घंटों के बाद गौर सालीवाड़ा के रहवासी क्षेत्र कान्हा सिगमा कॉलोनी में करीब एक दर्जन कबूतर और टिटहरियों के मरने की खबर सामने आई। वहाँ पर भी पहुँचकर टीम ने उनके सैम्पल लिए। 
सीमित संख्या में भेजे जा रहे हैं सैम्पल
भोपाल स्थित लैब में पिछले एक सप्ताह में इतने ज्यादा सैम्पल पहुँचे हैं कि वहाँ पर अब सैम्पलों को लेकर पाबंदियाँ लगा दी गई हैं। सूत्रों के अनुसार राजस्थान से एक ट्रक में भरकर मृत कौवों के पहुँचने के बाद से सैम्पलों की मात्रा को नियंत्रित करने के फरमान जारी किए गए। यही वजह है कि शुक्रवार को जबलपुर में मृत पाए गए कुल 12 पक्षियों में से सिर्फ 3 के ही सैम्पल भोपाल भेजे गए।
सौ रुपए तक गिरे चिकन के दाम
पता चला है कि शहर में चिकन और अंडों के शौकीनों में बर्ड फ्लू का भारी खौफ छाया है। दो दिन पहले तक दो सौ रुपए किलो बिकने वाले चिकन के दाम शुक्रवार को गिरकर सौ रुपए किलो तक आ गए, उसके बाद भी उन्हें खरीदने कोई भी ग्राहक चिकन सेन्टरों में नहीं पहुँचा। कमोवेश यही स्थिति अंडों की भी बताई जा रही है। 

इनका कहना है
इंस कॉलेज के बाद गौर और पाटन बायपास पर मृत पाए गए पक्षियों के कुछ सैम्पल जाँच के लिए भोपाल लैब भेजे गए हैं। वहाँ से रिपोर्ट आने पर ही पता चल सकेगा कि उनकी मृत्यु किस वजह से हुई। जिले के किसी भी पोल्ट्री फॉर्मों एवं मुर्गियों में अनायास मृत्यु की कोई सूचना नहीं है। 
डॉ. सुनील कांत बाजपेयी उप संचालक, पशु चिकित्सा सेवाएँ
 

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ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।