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वारदात के समय नाबालिग होने के आधार पर माफ हुई फांसी- रेप और हत्या के आरोपी को राहत 

October 22nd, 2019 18:30 IST
वारदात के समय नाबालिग होने के आधार पर माफ हुई फांसी- रेप और हत्या के आरोपी को राहत 

डिजिटल डेस्क, मुंबई। बांबे हाईकोर्ट ने घटना के समय नाबालिग होने के आधार पर हत्या व दुष्कर्म के मामले में फांसी की सजा पाए एक युवक को बरी कर दिया है। आरोपी ने दावा किया था कि पुलिस ने जब उसे हत्या व दुष्कर्म के मामले में गिरफ्तार किया था उस समय उसकी उम्र 16 साल नौ महीने में थी। इसलिए उसे हत्या व दुष्कर्म के लिए सुनाई गई फांसी व आजीवन कारावास की सजा नियमों के विपरीत है। नियमानुसार उसका मामला बाल न्याय बोर्ड के पास चलना चाहिए। ठाणे सत्र न्यायालय ने आरोपी को इस मामले में साल 2017 में फांसी की सजा सुनवाई थी। किंतु आरोपी ने नाबालिग होने का दावा करते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। न्यायमूर्ति बीपी धर्माधिकारी व न्यायमूर्ति संदीप शिंदे की खंडपीठ के सामने आरोपी की याचिका पर सुनवाई हुई। इस दौरान अतिरिक्त सरकारी वकील अरुणा पई ने कहा कि मौजूदा दुष्कर्म व हत्या के मामले में पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया था। जिसमें से एक आरोपी ने खुद को नाबालिग बताया है।

9 मई 2012 को इन दोनों ने नई मुंबई इलाके में दो लड़कियों के साथ नशे की हालात में दुष्कर्म किया था । इसमे से एक लड़की की मौत हो गई थी जबकि एक को आरोपी ने मरा हुआ समझकर छोड़ दिया था। पर वह जीवित थी और उसी ने सारी घटना के बारे में पुलिस को जानकारी दी। दोनों लड़कियां कचरा बिनकर अपना गुजर बसर करती थी। यह मामला बेहद गंभीर है और विरलतम मामलों की श्रेणी में आता है। इसलिए आरोपी को सुनाई गई सजा को यथावत रखा जाए। उन्होंने कहा कि निचली अदालत में भी आरोपी ने खुद के नाबालिग होने का दावा किया था। उस समय ऑसिफिकेशन व रेडियोलॉजी टेस्ट (उम्र जानने के लिए की जाने वाली मेडिकल जांच) के जरीए आरोपी की उम्र की पड़ताल की गई थी। उस दौरान उसकी उम्र 18 साल से अधिक पायी गई थी। इस लिहाज से घटना के समय आरोपी वयस्क था। 

वहीं आरोपी की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता युग चौधरी ने दावा किया कि उनके मुवक्किल की जन्म तारीख 29 अगस्त 1995 है। इस तरह से घटना के समय मेरे मुवक्किल की उम्र 16 साल 9 महीने थी। उन्होंने अपने मुवक्किल की उम्र को लेकर आरोपी के स्कूल से जुड़े दस्तावेज पेश किए। मामले से जुड़े दोनों पक्षों को सुनने व तथ्यों पर गौर करने के बाद खंडपीठ ने कहा कि जांच से जुड़े मेडिकल दस्तावेज आरोपी की सही उम्र को नहीं दर्शाते। आरोपी की उम्र के संबंध में अभियोजन पक्ष ने कोई पुष्ट सबूत नहीं पेश किया है। मेडिकल जांच रिपोर्ट से आरोपी की सही उम्र सामने नहीं आयी है। इसलिए हम आरोपी को मामले से मुक्त करते हैं और सत्र न्यायाधीश द्वारा सुनाई गई सजा को रद्द करते है। खंडपीठ ने अब आरोपी को बाल न्याय बोर्ड के सामने आगे की कार्रवाई के लिए पेश करने को कहा है। 
 

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।