सतना: भाई-भाभी के हत्यारे को दोहरी उम्र कैद

July 22nd, 2022

डिजिटल डेस्क, सतना। धवारी स्थित पुस्तैनी घर के बरामदे का रास्ता बंद करने के विवाद में दिन-दहाड़े भाई और भाभी की गोली मारकर हत्या कर देने के बहुचर्चित मामले में हत्यारे को अपर सत्र अदालत ने उम्र कैद की सजा से दंडित किया है। अष्टम अपर सत्र न्यायाधीश प्रवीण कुमार सिन्हा की कोर्ट ने हत्यारे बृजेश प्रताप सिंह पिता जयमंगल सिंह निवासी धवारी गली नम्बर-5 पर 5 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है। अभियोजन की ओर से एडीपीओ धर्मेन्द्र सिंह ने पक्ष रखा। 

बंद रास्ता खोलने की शिकायत पर हत्या:-
पीआरओ अभियोजन फखरुद्दीन ने बताया कि आरोपी और मृतक यशपाल सिंह सगे भाई थे। धवारी गली नम्बर 5 में उनके पिता ने एक मकान बनवाया था, जिसमें वे लोग निवास करते थे। जिस हिस्से में मृतक यशपाल और उसकी पत्नी रहते थे, आरोपी ने बरामदे में आने-जाने का रास्ता बंद कर दिया था। यशपाल ने रास्ते को बंद न करने के लिए कहा, लेकिन आरोपी नहीं माना। 16 अक्टूबर 2020 को मृतिका सुनीता बरामदे की सफाई कर रही थी, तब आरोपी यशपाल के पास उसकी दुकान में शिकायत करने गया तो यशपाल ने कहा कि 3 बजे वह घर आएगा तो बात करेगा। दोपहर करीब 3 बजे यशपाल घर आया और जब वह हाथ धो रहा था तो आरोपी पिस्टल लेकर आया और गाली-गलौज करते हुए यशपाल के सीने में गोली मार दी। उसकी पत्नी सुनीता और पुत्र कुलदीप उसको पकडऩे के लिए दौड़े तो आरोपी ने सुनीता को भी गोली मार दी, तब कुलदीप वहां से भाग गया और डायल 100 में पुलिस को सूचना दी। सूचना पर पुलिस और एम्बुलेंस वारदात स्थल पर पहुंची और आहतों को जिला चिकित्सालय लाया गया, जहां उन्हें डाक्टर ने मृत घोषित कर दिया।


देहाती नालसी पर अपराध दर्ज:-
जिला चिकित्सालय से प्राप्त देहाती नालसी पर सिटी कोतवाली थाने में आरोपी के विरुद्ध भादवि की धारा 302, 307, 506 और 25/27 आम्र्स एक्ट का अपराध दर्ज किया गया। तत्कालीन थाना प्रभारी और विवेचक अर्चना द्विवेदी ने अपराध दर्ज होते ही आरोपी को गिरफ्तार कर उसकी निशानदेही पर पिस्टल जब्त की और मेमोरेन्डम कथन दर्ज कर विवेचना प्रारंभ की। विवेचना के बाद सबूत जुटाकर न्यायिक निराकरण के लिए मामला न्यायालय में पेश किया। 


15 साक्षी, 34 दस्तावेज और 21 आर्टिकल पेश:-
अदालत में अभियोजन की ओर से हत्या का अपराध साबित किए जाने के लिए 34 दस्तावेज, 21 आर्टिकल और 15 साक्षियों को पेश किया। वहीं आरोपी ने अपने बचाव में 10 वस्तुओं के साथ दो साक्षियों को अदालत में पेश किया और यह तर्क रखा कि उसने गोली नहीं मारी है। मृतक यशपाल बंदूक लिए हुए था और खींचतान में गोली चली, जिससे दोनों की मृत्यु हुई है। अदालत में एडीपीओ श्री सिंह ने यह तर्क रखा कि खींचतान में चली एक गोली से दो लोगों की मौत नहीं हो सकती, आरोपी ने ही भाई-भाभी की हत्या की है। अदालत ने मामले में प्रस्तुत साक्ष्य और प्रकरण का सूक्ष्म परिशीलन कर आरोपी को भाई-भाभी की हत्या किए जाने का दोषी पाया। अदालत ने हत्या के अपराध में आरोपी को दोहरा आजीवन कारावास और आम्र्स एक्ट की धारा 25 में तीन वर्ष तथा धारा 27 में 5 वर्ष के कारावास और जुर्माने की सजा से दंडित किया है। 

इनका कहना है:-

विवेचक अर्चना द्विवेदी ने मामले की गंभीरता पूर्वक विवेचना कर सबूत जुटाए हैं, जिसके आधार पर आरोपी को उसके अपराध की सजा अभियोजन ने दिलाई है। 

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