दैनिक भास्कर हिंदी: बच्चों ने खेल-खेल में विज्ञान को समझा , देश भर से पहुंंचे विज्ञान प्रचारक

December 3rd, 2019

डिजिटल डेस्क, नागपुर। विज्ञान की शिक्षा का प्रचार-प्रसार जरूरी है। अगर यह मनोरंजक हो जाए, तो विज्ञान शिक्षा की दशा और दिशा बदल जाएगी। समाज में साइंटिफिक टेम्परामेंट स्थापित होना जरूरी है। यह बात केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय भारत सरकार के एडिशनल डायरेक्टर जनरल डॉ. खापर्डे ने अपूर्व विज्ञान मेला के समापन अवसर पर कही। एसोसिएशन फॉर रिसर्च एंड ट्रेनिंग इन बेसिक साइंस एजुकेशन और नागपुर महानगरपालिका के संयुक्त तत्वावधान में राष्ट्रभाषा भवन परिसर में मेला आयोजित किया गया था।।  विज्ञान के आसान प्रयोगों के साथ ही कई अन्य आकर्षण भी थे। अंतिम दिन छात्रों के साथ पालक भी बड़ी संख्या में पहुंचे। विज्ञान मेले में खेल-खेल में बच्चों ने विज्ञान से दोस्ती की। चिल्ड्रन साइंस कांग्रेस के झारखंड को-आर्डिनेटर वी. एस. आनंद प्रमुख रूप से उपस्थित थे। श्री आनंद ने अपूर्व विज्ञान मेला को विज्ञान मेला के साथ ही समाज प्रबोधन का महत्वपूर्ण माध्यम निरूपित किया। उन्होंने कहा कि देशभर में यह अपने आप में एक अभिनव प्रयोग है। इसका प्रसार पूरे देश में होना चाहिए, जिससे विज्ञान सम्मत बौद्धिक विकास हो सके।

विज्ञान के नियमों को समझाने का तरीका अच्छा
अपूर्व विज्ञान मेला ने अभियान का रूप तो पहले ही ले लिया था, अब कन्सेप्ट भी बन चुका है। सिर्फ बच्चों में ही यह लोकप्रिय नहीं है, बल्कि अध्यापक और पैरेंट्स भी विज्ञान शिक्षा को प्रयोगों के माध्यम से समझने-समझाने को उत्सुक दिखे। मनीषा म्हैसेकर ने कहा कि उन्हें यहां विज्ञान के नियमों को समझाने का तरीका अच्छा लगा। अब बच्चों को घर में भी इसी प्रकार से साइंस पढ़ाया करेंगी। रुचि पानगांवकर ने कहा कि वे पिछले साल भी बच्चों को लेकर विज्ञान मेला में आई थीं। इसके बाद अब बच्चे कोई भी विज्ञान की थ्योरी पढ़ते हुए उसका प्रयोग बताने को कहते हैं। हां, एक बार बता देने के बाद उन्हें फिर वो नियम रटाना नहीं पड़ता है। मेला समन्वयक राजेंद्र पुसेकर के साथ ही मनपा शाला की शिक्षिकाएं ज्योति मेडपलिवार, नीता गडेकर, पुष्पलता गावंडे, नीलिमा अढाऊ, दीप्ति बिष्ट, वंदना चव्हाण, मनीषा मोगलेवार, संगीता कुलकर्णी, सुनीता झरबडे के मार्गदर्शन में बच्चों ने प्रयोगों की जानकारी दी।

विज्ञान और तकनीक पर आधारित पथनाट्य
राष्ट्रभाषा परिवार के कलाकारों द्वारा विज्ञान और तकनीक पर आधारित पथनाट्य प्रस्तुत किया गया। इसका निर्देशन अभिजीत आठवले और लेखन पुष्पक भट ने किया। संगीत अक्षय खोब्रागड़े का था। इस वर्ष पथनाट्य में प्रोफेशनल ड्रामा आर्टिस्ट्स के साथ ही मनपा शालाओं के बच्चों को भी शामिल किया गया। अभिनय कलाकार थे सलोनी कांबले, प्रतीक्षा आडे, उमेशा राऊत, सुयश गायकवाड़, आयुष खंडारे, कृष दहाड, अभिलाष डेंगे। इस नाटक में राकेट, फुड चेन, रेडियो आदि की जानकारी दी गई। साथ ही भारत सरकार की संस्था विज्ञान प्रसार नई दिल्ली के सहयोग से साइंस क्विज विशेष आकर्षण का रहा। इसमें बच्चों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। इधर प्रश्न पूछे नहीं कि उत्तर हाजिर हो जाता था। तीन चरणों में तीन-तीन बच्चों के पांच समूह इसमें शामिल किए गए। हर चरण में एक समूह विजेता रहा। क्विज का संचालन विज्ञान प्रसार के सचिन नरवड़िया और डॉ. शार्दुल वाघ ने किया।

छत्तीसगढ़ के भी विद्यार्थी आए
अपूर्व विज्ञान मेला शैक्षणिक पर्यटन के रूप में भी उभर चुका है। छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के कई शहरों के विद्यार्थी-शिक्षक बड़ी संख्या में यहां पहुंचे। विज्ञान प्रसारक बी.एस. स्वाई ने बताया कि साधारणतः शैक्षणिक यात्रा का कल्चर महाविद्यालयों में हैं, जहां विद्यार्थियों को प्रकृति या किसी उद्योग का निरीक्षण कराया जाता है, लेकिन अपूर्व विज्ञान मेला के कारण इसका लाभ स्कूल के बच्चे भी उठा रहे हैं। दूरदराज में अध्ययनरत बच्चे बसों में आते हैं और मनोरंजन के साथ ही विज्ञान से दोस्ती भी करते हैं।

टेलीस्कोप
विज्ञान मेला का यह 20वां वर्ष था। इस वर्ष इसे अधिक विस्तार दिया गया। देशभर से डेलिगेट्स अपने रोचक प्रयोगों के साथ उपस्थित थे। माइक्रोस्कोप और टेलीस्कोप की व्यवस्था की गई थी। भौतिकशास्त्र, रसायन शास्त्र व गणित के ज्यादातर प्रयोगों को लोग बारीकी से समझते रहे। पटना से आए जावेद आलम ने हाईड्रोपोनिक्स के अपने अन्वेषण से लोगों को आश्चर्य में डाला। इलाहाबाद से आए डा. ओ.पी. गुप्ता के भौतिक शास्त्र के प्रयोग रोचक व ज्ञानवर्धक रहे। कोलकाता के वरिष्ठ विज्ञान संचारक श्री कृष्णेंदु चक्रवर्ती और बंगलुरू के वी.एस. शास्त्री के प्रयोग काफी लोकप्रिय हुए।
 

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