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नियम तोड़ने के सौ बहाने, दुर्घटना मुक्त शहर बनाने की जरूरत

नियम तोड़ने के सौ बहाने, दुर्घटना मुक्त शहर बनाने की जरूरत

डिजिटल डेस्क, नागपुर। शहर का ट्रैफिक कुछ अलग है। यहां पर युवा से लेकर बुजुर्ग तक सड़क पर अपना एक अलग क्षेत्र बना लेते हैं, वाहन चलाने के लिए। कोई नियम, कोई कानून नहीं है। यहां तक कि कुछ वाहन चालक तो नियम तोड़ने के बाद वाद-विवाद करने लगते हैं, तो कुछ अपने अनुसार ही नियम बताने लग जाते हैं। नियमों का उल्लंघन करने वालों के पास बहानों की लंबी सूची तैयार रहती है। यातायात नियमों को कई नागरिक गंभीरता से नहीं लेते। उन्हें लगता है यदि नियम तोड़ा तो जेल थोड़ी न होगी। ज्यादा से ज्यादा चालानी कार्रवाई की जाएगी। ऐसे लोगों के लिए उनकी जीवन शैली नियमों से ऊपर है। साथ ही कुछ लोग नियमों में अपने अनुसार ही बदलाव करते हैं और उसे पूरी निष्ठा से पालन करते हैं, जैसे पीली बत्ती है मतलब निकल जाओ। यदि सिग्नल हरा है और अचानक पीली बत्ती होती है तो इसका मतलब है कि वाहन को धीमा करिए अब िसग्नल बंद होने जा रहा है। लेकिन कुछ लोग पीली बत्ती में भी वाहन निकालने को चुनौती समझते हुए तेज गति से वाहन निकालते हैं।

बहाना...घूम कर जाना पड़ेगा

कई लोगों को वितरित दिशा से वाहन चलाने पर टोका गया, तो अनेक बहानों में से सबसे ‘शानदार’ बहाना यह रहा कि बहुत घूम कर जाना होगा इसलिए विपरीत दिशा से निकल जाते हैं। इस तरह के वाहन चालकों के कारण सही दिशा से वाहन चलाने वाले नागिरकों को भी परेशानी हाेती है।

100 से 150 चालान रोज सिग्नल तोड़ने के

डीसीपी, यातायात पुलिस चिन्मय पंडित के मुताबिक सिग्नल तोड़ने वालों के रोजाना 100 से 150 चालान बनाए जाते हैं। इसमें कई लोग बहाने बनाते हैं, लेकिन केवल 2 प्रतिशत लोग सच बाेलते हैं। सिग्नल पर खड़े रहने से समय में ज्यादा फर्क नहीं पड़ता है। नियमों का पालन करने से वाहन चालक और अन्य नागरिक भी सुरक्षित रहेंगे।
    
लगातार बढ़ रही सड़क दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने के साथ ही यातायात नियमों का प्रचार-प्रसार करना अति आवश्यक है। सड़क सुरक्षा ही सामूहिक जवाबदारी है। यह बात सड़क परिवहन व महामार्ग सूक्ष्म, लघु उद्योग केंद्रीय मंत्र नितीन गडकरी ने सड़क सुरक्षा अभियान के उद्घाटन समारोह में कही। जिला सड़क सुरक्षा समिति, प्रादेशिक परिवहन कार्यालय और पुलिस विभाग के संयुक्त तत्वधान में शनिवार को सड़क सुरक्षा अभियान का उद्घाटन वनामति सभागृह में किया गया। 

यह है स्थिति 

हर साल देश भर में 5 लाख दुर्घटनाएं होती हैं। इसमें डेढ़ लाख लोगों की मृत्यु हो जाती है, जबकि 3 लाख लोग गंभीर रूप से घायल होते हैं। इसके साथ ही 2 प्रतिशत जीडीपी का भी नुकसान होता है। मृत्यु के प्रमाण में 60 प्रतिशत लोग 18 से 35 आयु वर्ग के हैं। नागपुर जिले में जनवरी से दिसंबर 2018 तक 1117  दुर्घटनाएं हुईं, जिसमें 237 लोगों की मृत्यु और 1187 लाेग जख्मी हुए हैं।

अभिनेताओं और सेलिब्रिटी से करवाएंगे प्रचार

गडकरी ने कहा कि नागपुर में 2019 में 843 सड़क दुर्घटना में 384 लोगों की मृत्यु और 950 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। हमें सड़क सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित करना होगा और दुर्घटना मुक्त नागपुर बनाएंगे। एक सर्वे के दौरान यह रिपोर्ट आई थी कि 40 प्रतिशत ट्रक ड्राइवर को केट्रेक बीमारी थी, जिसमें आंखों की रोशनी कमजाेर हाे जाती है। ऐसे वाहन चालकों की पहचान कर जांच कर चष्मा देना चाहिए। साथ ही मेडिकल रिपोर्ट सकारात्मक होने पर ही वाहन चलाने की अनुमति हो। हम सेलिब्रिटी, अभिनेताओं से भी इसके प्रचार के िलए प्रयास करेंगे। इसके लिए अक्षय कुमार तैयार हो चुके हैं और कुुछ विज्ञापन और जागरूक करने वाले वीडियो भी बनाए हैं। सार्वजनिक निर्माण कार्य विभाग सजग रहते हुए अपनी जिम्मेदारी निभाए। और  ब्लैक स्पॉट, गड्ढे दुरुस्तीकरण, नई सड़क, साइन बोर्ड और जानकारी तैयार कर, रंगरोगन कार्य, जेब्रा क्रॉसिंग, मार्गदर्शक बोर्ड पर सही कार्य करेंगे तो नागपुर भी दुर्घटना मुक्त शहर बन सकता है।

सड़क सुरक्षा समिति की देश की पहली बैठक नागपुर में हुई

सड़क सुरक्षा अभियान के उद्घाटन के ठीक बाद सड़क सुरक्षा समिति की पहली बैठक नागपुर में हुई। इसमें सबसे पहले ब्लैक स्पॉट का फिर से आकलन कर रिपोर्ट देने के निर्देश केंद्रीय परिवहन मंत्री नितीन गडकरी ने शनिवार को  वनामति में आयोजित बैठक में दिए। इस बैठक में पशुसंवर्धन व दुग्धव्यवसाय मंत्री सुनील केदार, सांसद डॉ. विकास महात्मे, विधायक मोहन मते, टेकचंद सावरकर, कृष्णा खोपड़े, महापौर संदीप जोशी सहित पुलिस अधीक्षक ग्रामीण राकेश ओला, यातायात उपायुक्त चिन्मय पंडित, प्रादेशिक परिवहन अधिकारी श्रीपाद वाडेकर, दिनकर मनवर, दैनिक भास्कर के समन्वय संपादक आनंद निर्बाण व अन्य उपस्थित थे।

जिले में 66 ब्लैक स्पॉट 

बैठक में जिले में 66 ब्लैक स्पॉट होने की जानकारी पुलिस विभाग ने दी। मंत्री सुनील केदार ने जल्द से जल्द ब्लैक स्पॉट की पहचान करने की सूचना ग्रामीण पुलिस अधीक्षक को दी। साथ ही शहर के ट्रांसपोर्टर और वाहन सुधारने वालों को शहर से बाहर कार्य करने के निर्देश दिए। समिति में सांसद अध्यक्ष, जिलाधिकारी सदस्य सचिव, मुख्य कार्यकारी अधिकारी महानगरपालिका आयुक्त, विकास प्राधिकरण अधिकारी सहित जनआक्रोश संगठन के अशोक करंदीकर, चंद्रशेखर मोहिते, राजू वाघ, आशीष काले, सुरेद्र यादव, कृष्णा पाठक, राजेंद्र भूत हैं।

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Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

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डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

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ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।