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पहले पत्नी के बांधे हाथ और फिर मुंह में टेप लगाकर बेदम पिटाई   

पहले पत्नी के बांधे हाथ और फिर मुंह में टेप लगाकर बेदम पिटाई   

डिजिटल डेस्क सतना। कोलगवां थाना क्षेत्र के टिकुरिया टोला (हवाई पट्टी) में गुरुवार को  आरोपी पति ज्ञानी ने बल पूर्वक पहले अपनी 35 वर्षीया पत्नी सुशीला दाहिया के हाथ पीठ की तरफ बांध दिए और फिर मुंह पर टेप लगा दिया। आरोप है कि पति ने बेबस पत्नी का पहले तकिया से मुंह दबाने की कोशिश की और जब नाकाम रहा तो उसकी बेदम पिटाई की। आरोपी पति ने मोंगरी से पत्नी के सिर पर प्रहार किया और लहूलुहान पत्नी को घर पर छोड़कर फरार हो गया। पीडि़ता को इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ आईपीसी की धारा- 294, 323, 324 और 506 के तहत अपराध कायम करते हुए तलाश शुरु कर दी है। 
दोनों ने की थी दूसरी शादी 
पीडि़ता के परिजनों के हवाले से पुलिस ने बताया कि मूलत: बरदाडीह निवासी  सुशीला दाहिया के पति की अर्सा पहले बीमारी से मृत्यु हो गई थी। वो अपने पति के साथ टिकुरिया टोला हवाई पट्टी में रहा करती थी। इसी बीच वो मैहर थाना क्षेत्र के जीत नगर निवासी ज्ञानी के संपर्क में आई। ज्ञानी की भी पत्नी का निधन हो चुका था। दोनों ने डेढ़ साल पहले कोर्ट में शादी कर ली। इस दंपत्ति के कोई संतान नहीं है। शादी के बाद सुशीला अपने पति के साथ जीतनगर चली गई। कुछ दिन सब ठीक रहा लेकिन बाद में पति ज्ञानी ने पत्नी सुशीला को तरह-तरह से प्रताडि़त करना शुरु कर दिया। 
 क्या है झगड़े की जड़ 
अत्याचार से तंग सुशीला 5 अक्टूबर को जीतनगर से लौट कर टिकुरिया टोला हवाई पट्टी स्थित घर में आ गई। पीछे से उसका पति भी आ गया। गुरुवार को ज्ञानी ने पत्नी से जीतनगर लौट चलने की जिद की। इंकार करने पर पति ने उसे जान से खत्म कर देने की धमकी दी। हद तो तब हो गई जब जान लेने की कोशिश नाकाम होने पर आरोपी पति ने मोंगरी से उसके सिर पर प्रहार कर दिया। लहूलुहान सुशीला के जमीन पर गिरते ही हमलावर भाग गया। जैसे-तैसे घिसट कर सुशीला घर से बाहर आई और पड़ोसियों से मदद की गुहार लगाई। पड़ोसियों ने डॉयल-100 और कोलगवां पुलिस को खबर दी। जानकारी मिलने पर पीडि़ता की मां मानवती भी पहुंच गई। 
 

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।