दैनिक भास्कर हिंदी: नागपुर में लड़कों की अपेक्षा लड़कियों की जन्म दर अब भी कम, धरे रह गए सरकार के प्रयास

June 30th, 2018

डिजिटल डेस्क, नागपुर। सरकार और संगठनों के बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ के नारे व इसे लेकर किए जा रहे प्रयास उतने सफल नहीं हो पाए हैं जितने होना चाहिए। ढेर सारे प्रयासों के बावजूद नागपुर समेत महाराष्ट्र में लड़कियों की जन्म दर लड़कों से कम होन की जानकारी सामने आई है। नागपुर जिले में लड़कों की अपेक्षा लड़कियों की संख्या 8 फीसदी से कम है। महाराष्ट्र जैसे पुरोगामी राज्य में शिक्षा का स्तर अच्छा होने के बावजूद लड़कियों की संख्या लड़कों से कम होने का खुलासा आरटीआई में हुआ है। 

नागपुर जिले में बेटियों की जन्म दर बेटों से कम है। बेटा व बेटी में अंतर नहीं होने के दावे के बावजूद यह हाल है आैर यह निश्चित ही शिक्षित समाज के लिए सोचने वाली बात है। जिले में प्रति हजार लड़कों पर 2010 में 893, 2011 में 919, 2012 में 913, 2013 में 924, 2014 में 931, 2015 में 934 व 2016 में 926 थी। 2015 की तुलना 2016 में लड़कियों की जन्म दर में 8 से कमी आई। समय के साथ लड़कियों की जन्म दर बढ़ने के बजाय कम हो गयी। पूरे राज्य में लड़कियों की जन्म दर पर नजर डालें तो लड़कों की अपेक्षा प्रति हजार पर लड़कियों की संख्या 2010 में 854, 2011 में 861, 2012-894, 2013-901, 2014-914, 2015-907 व 2016 में 904 लड़कियां थीं।

समाज के लिए चिंता की बात  
जिले में लड़कों की तुलना में लड़कियों की संख्या 8 फीसदी कम है। यह सभ्य व शिक्षित समाज के लिए चिंता की बात है। बेटा व बेटी में अंतर नहीं होने के दावे किए जाते हैं। आज लड़कों की अपेक्षा लड़कियां ज्यादा ऊंचाई पर पहुंच रही है। शिक्षा से लेकर हर क्षेत्र में लड़कियों ने डंका बजाया है। इतनी जनजागृति के बाद भी समाज को अपनी मानसिकता बदलने की जरूरत है। जब तक मानसिकता नहीं बदलेगी तब तक लड़कियों का जन्मदर लड़कों के बराबर नहीं होगी। राज्य में भी यही हाल है। पुरोगामी राज्य के लिए यह अच्छा नहीं है।  (अभय कोलारकर, आरटीआई एक्टिविस्ट, नागपुर)