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मैहर स्टेशन के क्लॉक रूम में रखे बैग से निकले करेंसी पेपर मामले की जांच शुरू

मैहर स्टेशन के क्लॉक रूम में रखे बैग से निकले करेंसी पेपर मामले की जांच शुरू

डिजिटल डेस्क सतना। मैहर रेलवे स्टेशन के क्लॉक रूम में 3 माह पहले रखे गए हरे रंग के बैग से निकले 1 करोड़ 2 लाख के करेंसी पेपरों के सनसनीखेज मामले की जांच जीआरपी कटनी द्वारा प्रारंभ कर दी गई है। इस रहस्यमय मामले में अभी भी कोई भी अधिकारी खुलकर कुछ बोलने को तैयार नहीं है। जीआरपी कटनी में प्रकरण क्रमांक 01/19 धारा 25 पुलिस एक्ट के तहत कायमी कर विवेचना की कार्यवाही प्रारंभ कर दी गई है। इस गंभीर मामले में कटनी जीआरपी की जांच टीमें करेंसी पेपर बनाने वाले होशंगाबाद स्थित कारखाने, देवास स्थित करेंसी, प्रिंटिंग प्रेस के साथ ही इस बैग को 3 माह पहले 24 जुलाई को मैहर स्टेशन के क्लॉक रूम के लॉकर में जमा कराने वाले खंडवा जिला पुनासा कस्बा स्थित 401 कस्तूरबा वार्ड निवासी बालकदास नाम के व्यक्ति की तलाश करेगी। बालकदास के मिल जाने के बाद करेंसी पेपर का रहस्य खुल सकता है। जीआरपी कटनी के प्रभारी द्वारिका प्रसाद चढ़ार ने चर्चा के दौरान बताया कि उनकी जांच के 3 बिन्दु होंगे। इधर मैहर पुलिस ने भी इस सनसनीखेज मामले से जुड़े तथ्यों की पड़ताल के लिए   पतासाजी का काम शुरू कर दिया है।
नकली नोट कनेक्शन
मैहर स्टेशन के क्लॉक रूम में मिले करेंसी पेपर की जांच का एक महत्वपूर्ण बिन्दु यह है कि यह कागज नकली नोटों का कारोबार करने वाले गिरोह के पास तो नहीं पहुंचाया जा रहा था, किसी भी जगह से उड़ाए गए इन करेंसी पेपरों का मकसद इसके अलावा और हो भी क्या सकता है। किसी खिलवाड़ या मनोरंजन के लिए तो कोई इस तरह का गंभीर अपराध नहीं कर सकता। मालूम हो कि लगभग 2 साल पहले जिले के रामनगर में नकली नोटों का कारोबार करने वाले एक बड़े गिरोह का राजफास हुआ था। यह गिरोह नकली नोटों की प्रिंटिंग का काम भी करता था। 
वनली यूज फॉर ट्रेजरी
कटनी जीआरपी के प्रभारी ने बताया कि एक बंडल के ऊपर जिस पेपर में भारत सरकार की पदमुद्रा लगी हुई है, उसी में यह भी लिखा है कि वनली यूज फॉर ट्रेजरी। जिला कोषालय के अधिकारियों से जब यह जानने का प्रयास किया गया कि क्या करेंसी पेपर का उपयोग किसी रूप में ट्रेजरी में होता है तो इस बात से साफ इंकार करते हुए अधिकारी ने बताया कि ट्रेजरी में तो इस तरह के नहीं, किसी भी तरह के कागजों का अब उपयोग ही नहीं होता। ट्रेजरी का पूरा काम-काज पेपरलेस हो चुका है, यहां तक कि चेक तक का  कोई काम नहीं रह गया। ई-चेक के जरिए काम किया जा रहा है। 
यह पहली घटना
इस क्षेत्र में नकली नोटों के मिलने की तो कई घटनाएं हो चुकी हैं, लेकिन करेंसी पेपर वह भी इतनी बड़ी तादात में मिलने की यह पहली घटना है। इसी वजह से इस मामले को लेकर हर कोई हैरान है। यदि नकली नोट के कारोबारियों तक यह करेंसी पेपर पहुंचाना मकसद था तो फिर कौन सी ऐसी परिस्थितियां निर्मित हुई कि कथित बालकदास ने इन्हें रेलवे स्टेशन के क्लॉक रूम में रख दिया और 3 महीने बीत जाने के बाद भी लौटकर नहीं आया।
 

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