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 कटनी नगर निगम को मिली थ्री-स्टार रैंकिंग, कैमोर ने गंवाया ताज

 कटनी नगर निगम को मिली थ्री-स्टार रैंकिंग, कैमोर ने गंवाया ताज

डिजिटल डेस्क कटनी । कोरोना संक्रमण के बीच भारत सरकार ने स्वच्छता सर्वेक्षण 2020 की सूची जारी कर दी। थ्री स्टार का दर्जा मिलने से नगर निगम कटनी में जहां हर तरफ खुशी छाई रही, वहीं स्वच्छता का ताज चले जाने से कैमोर नगर परिषद में मायूसी छाई रही और यहां के लोगों को निराशा हाथ लगी। वर्ष 2019-20 में स्वच्छता सर्वेक्षण का काम हुआ था। जिसमें जनवरी माह में दिल्ली की टीम दोनो जगहों पर हकीकत जानने पहुंची थी। साफ-सफाई के मामले में नगर निगम ने जो दावा किया था। उसे तो हरी झण्डी दी गई, लेकिन कैमोर के दावे को कई मापदण्डों में टीम ने नकार दिया।
कटनी - सफाई मेें टॉप शहरों में शामिल
नगर निगम कटनी ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए थ्री स्टॉर रैंक हासिल किया। डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन हो या फिर गीला और सूखे कचरे का निष्पादन सभी मामलों में कटनी का प्रदर्शन पिछली बार ही अपेक्षा बेहतर रहा। तीन सितारा शहर के लिये आवश्यक पायदानों में घर-घर से कचरे का संग्रहरण, पृथक्कीकरण, दिन में दो बार एवं रात्रिकालीन सफ ाई, प्रयोक्ता शुल्क, प्लास्टिक निषेघ मौके पर दण्ड, वैज्ञानिक तरीकों से अपशिष्ट का उपचार एवं ओ.डी. एफ ़़ आदि प्रमुख घटक है। उक्त लक्ष्य प्राप्त उपरान्त स्वतंत्र सर्वेक्षण में शहर को तीन सितारा शहर घोषित किया गया है।
हर बार सुधरा रैंक
वर्ष 2017 में 434 शहरों में कटनी को शामिल किया गया। इसमें नगर निगम ने 24 वां रैंक हासिल किया। इसके बाद साफ-सफाई में निरंतर सुधार करने का काम अधिकारी और जनप्रतिनिधि करते रहे। वर्ष 2018 में 4203 शहरों को शामिल किया गया। इस बार कटनी का प्रदर्शन बेहतर रहा और 110 वें रैंक पर पहुंच गया। वर्ष 2019 में देश के सभी शहरों को इसमेें शामिल किया गया और कटनी 97 वां रैंक हासिल किया।
सीएमओ ने कहा नहीं की इंट्री
कैमोर नगर परिषद में मायूसी छा गई। इस संबंध में सीएमओ लॉलजी ताम्रकार ने इस संबंध में स्वच्छ भारत मिशन के उपसंचालक को पत्र लिखकर आपत्ति जताई है। इसमें कहा गया है कि अधिकांश घटक में अंकों की इंट्री नहीं की गई। जिससे उस घटक में फेल घोषित किया गया है। अधिवक्ता ब्रम्हमूर्ति तिवारी ने बताया कि यहां पर भी सभी ने अच्छा प्रदर्शन किया था। इसके बावजूद रैंक नहीं मिलने से लोगों को निराशा हाथ लगी है।
कैमोर: थ्री स्टॉर का रैंक गंवाया
कैमोर नगर परिषद ने थ्री स्टॉर का रैंक गंवा दिया। नौ माह के अंतराल में ही  जारी की गई लिस्ट मेें गीले कचरे के निष्पादन में गीला और सूखा कचरे के निष्पादन में नगर परिषद फेल रहा। इसके साथ साईटिफिक तरीके से कचरे के निष्पादन में भी संतोषजनक परिणाम कैमोर नगर परिषद का नहीं रहा। जिसके चलते कैमोर नगर परिषद ने अपना ताज गवां दिया।
 

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क्या है ड्रोन ? देश की सुरक्षा के लिए कितना घातक हो सकता है, जानें सबकुछ

क्या है ड्रोन ? देश की सुरक्षा के लिए कितना घातक हो सकता है, जानें सबकुछ

डिजिटल डेस्क, श्रीनगरजम्मू कश्मीर की सीमा के आसपास ड्रोन की हलचलें लगातार तेज होती जा रही हैं। इसके बाद भारत ने भी ये मुद्दा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाया है कि ड्रोन की इस तरह की गतिविधियां न सिर्फ भारत बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सुरक्षा के दृष्टिकोण से घातक साबित हो सकती हैं। इस हमले के बाद से भारत में ड्रोन के इस्तेमाल को लेकर बहस छिड़ गई है। इस रिपोर्ट में जानिए आखिर ड्रोन है क्या और यह कैसे ऑपरेट होते हैं? इसके इस्तेमाल और इससे क्या नुकसान हो सकता है और देश में ड्रोन्स को उड़ाने को लेकर सरकार की क्या गाइडलाइन्स हैं।

ड्रोन क्या होता है?
ड्रोन्स को UAV यानी Unmanned aerial vehicles या RPAS यानी Remotely Piloted Aerial Systems भी कहा जाता है। आम बोल चाल वाली भाषा में इसे मिनी हैलिकॉप्टर भी कहते हैं। अक्सर शादी के दौरान फोटोग्राफी के लिए आपने ड्रोन का इस्तेमाल होते हुए देखा होगा। यह एक ऐसा यंत्र है, जिसमें एचडी कैमरे, ऑनबोर्ड सेंसर और जीपीएस लगा होता है। इसे नियंत्रित करने के लिए एक सॉफ्टवेयर की आवश्यकता होती है। इसके चारों और 4 रोटर्स लगे होते हैं, जिनकी मदद से यह आसमान में ऊंचा उड़ने में सक्षम होता है। एक ड्रोन का वजन 250 ग्राम से लेकर 150 किलोग्राम से भी ज्यादा हो सकता है।

ड्रोन को उड़ाने के लिए सॉफ्टवेयर, जीपीएस और रिमोट की आवश्यकता होती है। रिमोट के जरिए ही ड्रोन को ऑपरेट और कंट्रोल कर सकते हैं। ड्रोन पर लगे रोटर्स की गति को रिमोट की जॉयस्टिक के जरिए कंट्रोल किया जाता है। वहीं, जीपीएस दिशाएं बताता हैं, जीपीएस दुर्घटना होने से पहले ही ऑपरेटर को चेतावनी भेज देता है। 

ड्रोन हमले किस तरह से हो सकते हैं?
ड्रोन का इस्तेमाल कई देशों की सेनाएं कर रही हैं, क्योंकि ये साइज में छोटे होते हैं इसलिए रडार की पकड़ में आसानी से नहीं आ पाते हैं, साथ ही दुर्गम इलाकों में भी गुपचुप घुसपैठ कर सकते हैं। यही कारण है कि सेना में इनका इस्तेमाल बढ़ने लगा है।ड्रोन हमले दो प्रकार से संभव हैं। एक तरीका ये है कि ड्रोन में हथियार या विस्फोटक लगा दिए जाते हैं और ड्रोन इन हथियारों या विस्फोटक को लक्ष्य पर ड्रॉप कर देता है। ड्रोन से हमले का दूसरा तरीका है ड्रोन को खुद ही एक विस्फोटक में बदल दिया जाए। 

कितने घातक हो सकते हैं ड्रोन हमले?
ये ड्रोन के प्रकार और पेलोड पर निर्भर है। पेलोड मतलब ड्रोन कितना वजन अपने साथ लेकर उड़ सकता है। ड्रोन की पेलोड क्षमता जितनी ज्यादा होगी वो अपने साथ उतनी ज्यादा मात्रा में विस्फोटक सामग्री लेकर उड़ सकता है। अमेरिका के MQ-9 रीपर ड्रोन अपने साथ 1700 किलो तक वजन ले जाने में सक्षम हैं।

ड्रोन से अबतक के बड़े हमले
2020 में अमेरिका ने ईरानी मेजर जनरल सुलेमानी को मार गिराया था। इससे पहले 2019 में यमन के हूती विद्रोहियों ने साऊदी अरब की अरामको ऑयल कंपनी पर ड्रोन हमला किया था। पाकिस्तान के वजीरिस्तान में 2009 के दौरान एक ड्रोन हमले में 60 लोग मारे गए थे।

देश में ड्रोन्स के इस्तेमाल को लेकर गाइडलाइन्स 
देश में नागरिक उड्डयन मंत्रालय(Ministry of Civil Aviation) ने ड्रोन उड़ाने पर कई तरह के प्रतिबंध लगा रखे हैं। ड्रोन के वजन और साइज के अनुसार इन प्रतिबंधों को कई वर्ग में बांटा गया है।

1.नेनो ड्रोन्स- इसको उड़ाने के लिए लाइसेंस की आवश्यकता नहीं पड़ती।

2.माइक्रो ड्रोन्स- इसको उड़ाने के लिए UAS Operator Permit-I से अनुमति लेनी पड़ती है और ड्रोन पायलट को SOP(Standard operating procedure) का पालन करना होता है। 

इनसे बड़े ड्रोन उड़ाने के लिए डीजीसीए से परमिट(लाइसेंस ) की आवश्यकता होती है। अगर आप किसी प्रतिबंधित जगह पर ड्रोन उड़ाना चाहते हैं तो इसके लिए भी आपको डीजीसीए से अनुमति लेनी पड़ेगी। बिना अनुमति के ड्रोन उड़ाना गैरकानूनी है और इसके लिए ड्रोन ऑपरेटर पर भारी जुर्माने का भी प्रावधान है।

ड्रोन उड़ाने के लिए प्रतिबंधित जगह

  • मिलिट्री एरिया के आसपास या रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इलाका।
  • इंटरनेशनल एयरपोर्ट के 5 किलोमीटर और नेशनल एयरपोर्ट के 3 किलोमीटर का दायरा।
  • इंटरनेशनल बॉर्डर के 25 किलोमीटर का दायरा ।
  • इसके अलावा ड्रोन की कैटेगरी को मद्देनजर रखते हुए इन्हें कितनी ऊंचाई तक उड़ाया जा सकता है वो भी निर्धारित है।

ड्रोन उड़ाने के लिए जरूरी हैं लाइसेंस
नैनो ड्रोन्स को छोडकर किसी भी तरह के ड्रोन्स को उड़ाने के लिए लाइसेंस या परमिट की जरूरत पड़ती है।ड्रोन उड़ाने के लिए लाइसेंस दो कैटेगरी के अंतर्गत दिए जाते हैं, जिसमें पहला है स्टूडेंट रिमोट पायलट लाइसेंस और दूसरा है रिमोट पायलट लाइसेंस।इन दोनों लाइसेंस को प्राप्त करने के लिए ड्रोन ऑपरेटर की न्यूनतम उम्र 18 साल और अधिकतम 65 साल होनी चाहिए। लाइसेंस के लिए ऑपरेटर कम से कम 10वीं पास या 10वीं क्लास के बराबर उसके पास किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से डिग्री होना अति आवश्यक हैं।आवेदन करने वाले व्यक्ति को डीजीसीए स्पेसिफाइड मेडिकल एग्जामिनेशन भी पास करना जरूरी है। लाइसेंस के लिए बैकग्राउंड भी चेक होता है।

जुर्माने का प्रावधान

  • बिना लाइसेंस उड़ाने पर 25000 रुपए का जुर्माना।
  • नो-ऑपरेशन जोन यानी प्रतिबंधित क्षेत्र में उड़ान भरने पर 50000 रुपए का जुर्माना।
  • ड्रोन का थर्ड पार्टी बीमा ना होने पर 10000 रुपए का जुर्माना लग सकता है।