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समय से पहले क्वारेंटीन सेंटर से छोड़े गए श्रमिक में निकला कोराना का संक्रमण

समय से पहले क्वारेंटीन सेंटर से छोड़े गए श्रमिक में निकला कोराना का संक्रमण

 डिजिटल डेस्क सतना। मुंबई के कल्याण से 9 मई को लौटे हर्दी गांव के जिस 25 वर्षीय श्रमिक प्रमोद सतनामी में सोमवार को कोरोना वायरस के संक्रमण की पुष्टि हुई है,उस श्रमिक को उसके 11 अन्य साथियों के साथ हर्दी हाईस्कूल के क्वारेंटीन सेंटर से
14 दिन की बजाय 7 दिन पहले ही छोड़ दिया गया था। इस गंभीर मामले में अंधेरगर्दी का हाल तो ये रहा कि इस क्वारेंटाइन सेंटर के प्रभारी और बिरसिंहपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के इंचार्ज डा.रुपेश सोनी ने प्रमोद सतनामी के थ्रोट स्वाब सेंपल की लैब रिपोर्ट का इंतजार करने की भी जरुरत नहीं समझी। नतीजा ये है कि अब प्रशासन को कोरोना संक्रमित प्रमोद सतनामी और उससे जुड़े 11 अन्य श्रमिक साथियों की कडिय़ां जोडऩे में पसीना आ रहा है। बड़ा सवाल ये भी है कि इन 3 दिनों के दौरान प्रमोद गांव में किन-किन के संपर्क में आया? अभी यह कह पाना कठिन है। इसी बीच एहतियात के तौर पर प्रमोद को यहां उतैली स्थित कोविड-19 केयर सेंटर में आइसोलेट कर दिया गया है। हर्दी गांव को रात में ही कंटेनमेंट एरिया घोषित करते हुए पुलिस भी तैनात कर दी गई है।
आखिर, ये दरियादिली क्यों 
कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाव के लिए तय क्लीनिकल प्रोटोकॉल के तहत हॉटस्पॉट से आए किसी भी संक्रमण के संदेही को कम से कम 14 दिन के लिए  संस्थागत क्वारेंटीन सेंटर में रख कर उसकी स्वास्थ्य निगरानी की जाती है। तय गाइड लाइन के अनुसार थर्मल स्क्रीनिंग के बाद ग्रुप में आए किसी एक संदेही के थ्रोट स्वाब का सेंपल भी लिया जाता है। मुंबई के कल्याण से 9 मई को लौटे प्रमोद सतनामी के 11 श्रमिक सदस्यों में से रेंडंम चेकअप के दौरान प्रमोद सतनामी का सेंपल लेने के बाद भी केंद्र प्रभारी डा. रुपेश सोनी ने प्रमोद के थ्रोट स्वाब की लैब रिपोर्ट का इंतजार करने की जरुरत नहीं समझी। इतना ही नहीं 14 की जगह महज 7 दिन के अंदर ही डा.सोनी ने प्रमोद समेत उसके 11 अन्य साथियों को भी घर जाने दिया। डा.सोनी की स्वच्छंद कार्यशैली का अंदाजा इस तथ्य से भी लगाया जा सकता है कि उन्होंने इस तथ्य को अपने वरिष्ठ अधिकारियों से भी छिपा कर रखा ,आखिर क्वारेंटीन सेंटर के इंचार्ज की ऐसी क्या मजबूरी थी कि उन्होंने व्यापक जनसुरक्षा को खतरे में डालने की इस हद तक हिम्मत दिखा दी।
 मुंबई से 9 मई को हर्दी पहुंचा था 11 मजदूरों का गु्रप
 जानकारी के मुताबिक सोमवार को सामने आया जिले का सातवां कोरोना कैरियर प्रमोद सतनामी 6 मई को अपने 15 साथियों के साथ मुंबई के कल्याण से घर के लिए पैदल निकला था। लगभग 80 किलोमीटर पैदल चलने के बाद प्रमोद को सतारा घाटी में प्रमोद की बहन का दामाद मिला,जो ट्रक ड्राइवर है। इसी ट्रक से सभी नासिक पहुंचे और वहां की सब्जी मंडी में एक ट्रक से सवार होकर 9 मई को रीवा पहुंचे। इसी ग्रुप में शामिल श्रमिक परशुराम सतनामी ने रीवा में टोल प्लाजा के पास अपने एक परिचित मैजिक ड्राइवर को बुलवाया और इसी मैजिक को बुक करके सभी मजदूर हर्दी पहुंचे।
ऐसे बचे सिर्फ 11 साथी 
बताया गया है कि हर्दी गांव पहुंचे के बाद प्रमोद के यूपी के 2 साथी जहां आगे बढ़ गए, वहीं एक अपने गांव गुढुवा (बिरसिंहपुर) और दूसरा बाबूपुर मॉडल हाउस (कोटर) चला गया। जबकि प्रमोद समेत बचे अन्य 11 श्रमिकों को हर्दी स्थित हाईस्कूल में  क्वारेंटीन कर दिया गया। मगर, इस मामले में नया मोड़ तब आया जब समय से पहले ही क्वारेंटीन सेंटर से छोड़े गए प्रमोद सतनामी में सोमवार को कोरोना के संक्रमण की पुष्टि हो गई।
 

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