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महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव : मैदान से गायब हुए 36 उम्मीदवार,प्रचार में नहीं आ रहे नजर

October 16th, 2019 13:45 IST
महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव : मैदान से गायब हुए 36 उम्मीदवार,प्रचार में नहीं आ रहे नजर

डिजिटल डेस्क, नागपुर।  कहा जाता है कि चुनाव में कुछ उम्मीदवारों को खड़ा किया जाता है, तो कुछ को करवाया जाता है। यही हाल नागपुर की 12 सीटों पर नजर आ रहा है। विधानसभा चुनाव के लिए नामांकन भरने के बाद 36 उम्मीदवार कहां गए, इसका पता नहीं चल पा रहा है। न तो वे सोशल मीडिया पर एक्टिव हैं और न ही प्रचार में कहीं दिख रहे हैं। उनका पता लगाने के लिए मीडिया मॉनिटरिंग सर्टिफिकेशन कमेटी सोशल मीडिया के विविध माध्यमों के जरिए ट्रैक कर रही है। शायद कहीं से लिंक मिल जाए।

कोई अता-पता नहीं
नागपुर जिले की 12 विधानसभा सीटों के लिए 205 उम्मीदवारों ने नामांकन दर्ज किए थे। इसमें से 27 उम्मीदवारों के नामांकन रद्द किए गए थे। नामांकन वापसी के अंतिम दिन तक 32 लोगों ने नाम वापस लिए थे। इसके बाद 146 उम्मीदवार मैदान में डटे हैं। विशेष यह कि इन सभी को नामांकन के साथ अपना सोशल मीडिया अकाउंट भी देना था, ताकि चुनाव प्रशासन पर उनपर नजर रख सके। लेकिन 36 उम्मीदवार ऐसे निकले, जिन्होंने अपना सोशल मीडिया अकाउंट ही नहीं दिया है। ऐसे में उनके प्रचार का अता-पता नहीं चल पा रहा है। न तो किसी ग्रुप से कनेक्ट दिख रहे हैं और न किसी इलाके में प्रचार में नजर आ रहे हैं। 

औपचारिकता निभा रहे प्रतिनिधि
 इन उम्मीदवार के प्रतिनिधि औपचारिकता निभाते हुए चुनाव खर्च का ब्योरा देने जरूर पहुंच रहे हैं। खर्च का ब्योरा भी नाममात्र दिखाया गया है। किसी ने पांच हजार तो किसी ने 10 हजार का खर्च बताया है। लेकिन जमीन और सोशल मीडिया में कहीं उपस्थिति नहीं है। ऐसे में ये कई सवालों को जन्म दे रहे है। किसके इशारे या किस मकसद से खड़े होने के आरोप भी लग रहे हैं।

निजी कंपनी को निगरानी का जिम्मा
सोशल मीडिया पर निगरानी रखने के लिए मीडिया मॉनिटरिंग सर्टिफिकेशन कमेटी बनाई गई है। इसके अंतर्गत प्रिंट, इलेक्ट्रानिक और सोशल मीडिया पर नजर रखने के लिए तीन सब-कमेटी का गठन किया गया है। फिलहाल प्रशासन के पास ऐसे एक्सपर्ट नहीं है कि वे सोशल मीडिया की बारीकियों पर ध्यान दे सकें। इसके लिए निजी कंपनी ट्रिप्टी फॉरेंसिक एजेंसी को काम दिया गया है। वह रोजाना उम्मीदवार के सोशल अकाउंट चेक कर उनकी मॉनिटरिंग करती है। कहीं कोई आपत्तिजनक पोस्ट दिखने पर तत्काल चुनाव प्रशासन को सूचना दी जाती है, जिसकी जांच कर कार्रवाई की जाती है।

जो अकाउंट दर्ज नहीं, उस पर भी नजर 
नामांकन फार्म में जो अकाउंट दर्ज नहीं है, ऐसे अकाउंट पर भी नजर रखी जा रही है। अनेक उम्मीदवार अपने अधिकृत अकाउंट के अलावा अन्य ग्रुप के जरिये भी प्रचार कर रहे हैं। अधिकृत अकाउंट पर प्रचार का खर्च उम्मीदवार के खर्च में जोड़ा जाता है। इस कारण उम्मीदवार या उनके समर्थक अन्य अकाउंट का भी इस्तेमाल कर रहे हैं। इसके लिए निजी कंपनी संबंधित अकाउंट के लिंक अन्य से भी जोड़कर देखी जा रही है कि कहीं कोई अन्य अकाउंट का इस्तेमाल तो नहीं कर रहे हैं। ऐसा दिखने पर तुरंत वह खर्च उम्मीदवार के खर्च में जोड़ा जा रहा है।

आपत्तिजनक पोस्ट पर 2 एफआईआर, 1 शिकायत
सोशल मीडिया ग्रुप पर फिलहाल आपत्तिजनक पोस्ट को लेकर सख्ती बरती जा रही है। इस मामले में अब तक दो एफआईआर दर्ज की गई है। सदर थाने में एक कांग्रेस कार्यकर्ता के खिलाफ मामला दर्ज किया गया तो दूसरा दक्षिण नागपुर में निर्दलीय उम्मीदवार किशोर कुमेरिया की शिकायत पर एक भाजपा कार्यकर्ता के खिलाफ सक्करदरा में एफआईआर दर्ज की गई है। उत्तर नागपुर से वंचित बहुजन आघाड़ी के उम्मीदवार विनय भांगे ने सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ आपत्तिजनक पोस्टर शेयर करने की शिकायत दर्ज की है।
 

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राजस्थान में सियासी घमासान फिर तेज, मंत्रिमंडल विस्तार पर गहलोत-पायलट आमने सामने


डिजिटल डेस्क, जयपुर। पंजाब में जब से कांग्रेस हाईकमान ने मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को दरकिनार कर कांग्रेस प्रदेश कमेटी का अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू को बनाया है, तब से राजस्थान में पायलट गुट का भी जोश हाई है। अब पायलट गुट के दबाव के कारण मंत्रिमंडल पर नए सिरे से चर्चा हो रही है। मंत्रिमंडल विस्तार या फेरबदल पर अशोक गहलोत और सचिन पायलट गुट के बीच तलवारें खिंच गईं हैं,  दोनों गुट आमने-सामने आ गये हैं। फिलहाल विस्तार की कोई तारीख तय नहीं है लेकिन यह माना जा रहा है कि अगले महीने इस पर कोई फैसला लिया जा सकता है। अभी गहलोत कैबिनेट में 9 पद खाली हैं। अगर कांग्रेस 'एक व्यक्ति एक पद' के फॉर्मूले को मानती है तो शिक्षा राज्य मंत्री और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद डोटासरा को अपना पद छोड़ना होगा। वैसे गोविंद डोटासरा ने यह कहकर कि 'मैं दो-चार दिन का मेहमान हूं' अपने जाने के संकेत दे दिये हैं। एक पद विधानसभा उपाध्यक्ष का भी खाली है।   
 
आंकड़ों के हिसाब से गहलोत कैबिनेट में कुल 11 पद खाली हैं। लेकिन इन सभी पदों पर फिलहाल मंत्री नहीं बनाए जाएंगे। अंदेशा है कि विस्तार के बाद भी नाराजगी रह सकती है। उन हालातों का सामना करने के लिए फिलहाल कैबिनेट में दो या तीन पद खाली ही रखे जाएंगे। 
मत्रिमंडल विस्तार पर अगर पूरी तरह गहलोत हावी रहे तो 2 या 3 ही मंत्रियों की छुट्टी होगी। पर ये फैसला लेना भी गहलोत के लिए आसान नहीं होगा,  क्योंकि उन्हें उन लोगों के बीच फैसला लेना होगा जिन लोगों ने मुश्किल वक्त में उनका साथ दिया था। 
अगर विस्तार पर पायलट गुट का दबाव रहा तो फिर 6 से 7 मंत्री आउट होना तय माने जा रहे हैं। और, अगर आलाकमान ने प्रदर्शन को आधार माना तो कई मंत्रियों को जाना पड़ सकता है, लेकिन इसकी उम्मीद कम ही है। हालांकि, अजय माकन का 28-29 को जयपुर दौरा है। जिसमें वह जयपुर आकर हर विधायक से बात करेंगे। उसके बाद यह तय होगा कि कौन रहेगा और कौन जाएगा?   

इन मंत्रियों की कुर्सी पर खतरा


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इनकी हो सकती मंत्रिमंडल में एंट्री- पायलट गुट के 3 और गहलोत गुट के 7 चहेरों को मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है। 

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डोटासरा के बयान से उनके जाने के संकेत

प्रदेश में मंत्रिमंडल फेरबदल की चर्चाऐं जारी हैं उस बीच शिक्षा राज्य मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा का एक वीडियो तेजी से सोशल मीडिया पर छा गया है। इसमें उनको राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष डीपी जारोली से कहते सुना जा सकता हैं- ‘मेरे पास एक घंटे फाइल नहीं रुकेगी, आप सोमवार को आ जाओ। एक मिनट में निकाल दूंगा, जितनी कहोगे। मैं दो-पांच दिन का ही मेहमान हूं। मुझसे जो कराना है करा लो।’ इसके बाद बोर्ड अध्यक्ष डीपी जारोली ने हाथ जोड़कर कहा कि मैं आता हूं सर। इस वायरल वीडियो के बाद से ये कयास तेज हो गए हैं कि मंत्रिमंडल से डोटासरा की रवानगी तय है। 
 

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ओलंपिक में जिमनास्टिक खिलाड़ियों ने पहली बार पहने ऐसे कपड़े, जिसने देखा रह गए हैरान

ओलंपिक में जिमनास्टिक खिलाड़ियों ने पहली बार पहने ऐसे कपड़े, जिसने देखा रह गए हैरान

डिजिटल डेस्क, टोक्यो। टोक्यो ओलंपिक में पूरी दुनिया से आए हुए खिलाड़ी अपनी प्रतिभा दिखा रहे हैं। खेल में अपनी प्रतिभा दिखाने के अलावा जर्मन की महिला जिमनास्टिक्स ने फ्रीडम ऑफ चॉइस यानी अपने मन के कपड़े पहनने की आजादी को अपने खेल के जरिए प्रमोट करने का फैसला किया है, जिससे उनकी हर तरफ चर्चा हो रही है। 

Germany Women's Gymnastics Team Wear Unitards at Olympics | POPSUGAR Fitness

जर्मनी की महिला जिमनास्ट रविवार को हुए टोक्यो ओलंपिक मुकाबले में फुल बॉडी सूट पहने नजर आई। खिलाड़ियों ने बताया कि इस सूट को फ्रीडम ऑफ चॉइस यानी अपनी पसंद के कपड़े पहनने की आजादी को बढ़ावा देने साथ ही महिलाओं को प्रोत्साहित करने के लिए डिजाइन किया गया है जिसे पहनकर महिला खिलाड़ी आरामदायक महसूस कर सकें।

Germany's gymnasts wear body-covering unitards, rejecting 'sexualization' of sport - CNN 
 

जर्मनी की 4 जिमनास्ट जिनके नाम है पॉलीन शेफर-बेट्ज, सारा वॉस, एलिजाबेथ सेट्ज और किम बुई लाल और सफेद रंग के इस यूनिटार्ड सूट में नजर आई जो लियोटार्ड और लेगिंग्स को मिलाकर बनाया गया था। खिलाड़ी इसी को पहन कर मैदान में उतरीं थी। 

German gymnastics team, tired of 'sexualisation,' wears unitards | Deccan Herald
 

जर्मनी की टीम ने अपनी ट्रेनिंग में भी इसी तरह के कपड़े पहने हुए थे और अपने कई इंटरव्यूज में खिलाड़ियों ने कहा था कि इस साल फाइनल कॉम्पटीशन में भी वो फ्रीडम ऑफ चॉइस को प्रमोट करने के लिए इसी तरह के कपड़े पहनेंगी। खिलाड़ी सारा वॉस ने द जापान टाइम्स को बताया था यूनिटार्ड को फाइनल करने से पहले उन्होंने इस पर चर्चा भी की थी। सारा ने ये भी कहा कि जैसे जैसे एक महिला बड़ी होती जाती है, वैसे ही उसे अपने शरीर के साथ सहज होने में काफी मुश्किल होती हैं। हम ऐसा कुछ करना चाहते थे जिसमें हम अच्छे भी दिखे और सहज भी महसूस करें। चाहे वो कोई लॉन्ग यूनिटार्ड हो या फिर शॉर्ट। 

Germany Women's Gymnastics Team Wear Unitards at Olympics | POPSUGAR Fitness
 

सारा ने यह भी बताया कि उनकी टीम ने इससे पहले यूरोपीय चैंपियनशिप में भी इसी तरह का फुल बॉडी सूट पहना था और इसका उद्देश्य सेक्सुलाइजेशन को कम करना है। हम लोगों के लिए एक रोल मॉडल बनना चाहते थे जिससे वो हमे फॉलो कर सकें। जर्मन के खिलाड़ियों की लोग काफी प्रशंसा भी कर रहे हैं। 


ओलंपिक प्रतियोगिताओं में जिमनास्ट महिलाओं को फुल या हाफ बाजू के पारंपरिक लियोटार्ड ही पहनना होता है साथ ही अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में फुल कपड़े पहनने की अनुमति तो है लेकिन किसी भी महिला जिमनास्ट ने इस तरह के कपड़े नहीं पहने थे। यह पहली बार था जब जर्मन खिलाड़ी महिलाओं ने इस तरह के कपड़े पहने थे। 
बीते कुछ सालों में खेल प्रतियोगिताओं में महिलाओं के शारीरिक शोषण के बढ़ते मामलों को देख महिला खिलाड़ियो की चिंता बढ़ती जा रही है अब एथलीटों की सुरक्षा को देखते हुए नए सेफ्टी प्रोटोकॉल बनाए जा रहे हैं।