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केदार युग का जलवा फिर नहीं दिखा

October 08th, 2019 17:43 IST
केदार युग का जलवा फिर नहीं दिखा

डिजिटल डेस्क, नागपुर। विदर्भ में सहकारिता के प्रणेता स्व. बाबासाहेब केदार का अपना वर्चस्व कुछ ऐसा था कि एक बार आलाकमान से नाराज होकर मात्र अपने 5 अनुयायियों को बागी उम्मीदवार के रूप में जिले से खड़ा किया और पांचों विधानसभा क्षेत्र में वे सभी विजयी रहे। कलमेश्वर से रमेश बंग, काटोल से अनिल देशमुख, सावनेर से सुनील केदार, रामटेक से अशोक गुजर, कामठी से देवराव रडके विजयी रहे। केवल उमरेड से कांग्रेस के डा. श्रावण पराते विजयी रहे। इस लड़ाई में जित स्वनाम धन्य राजनेताओं को हार का सामना करना पड़ा। उसमें शेकाप के वीरेंद्र देशमुख व कांग्रेस के सुनील शिंदे, कांग्रेस के रणजीत देशमुख, आनंदराव महाजन, यादवराव भोयर जैसे कद्दावर नेता शामिल थे। इसमें से रणजीत देशमुख दो बार प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रहे और मुख्यमंत्री पद के कालांतर में दावेदार भी बने। सुलेखा कुंभारे राज्यमंत्री पद तक पहुंच गईं। नागपुर जिले में अग्रणी नेता रहे बाबासाहब केदार कभी पूर्ण मंत्री नहीं बने, किंतु जिले के पालकमंत्री अवश्य रहे। रमेश बंग, रणजीत देशमुख व रमेश बंग कैबिनेट मंत्री बने। सुनील केदार भी राज्यमंत्री रह चुके हैं। सुनील केदार पिछले चुनाव में  जिले की 12 विधानसभा क्षेत्र में से अकेले ऐसे कांग्रेसी थे, जो चुनाव जीते। बाकी स्थानों पर कांग्रेस खेत रही।


जिन्हें फटकारा था उनके आगे हाथ जोड़ना पड़ेगा 

उस्मानाबाद जिला परिषद उस्मानाबाद के आम सभा में शिवसेना के जिला प्रमुख कैलाश पाटील ने सवालों की बौछार करके कई बार जिला परिषद अध्यक्ष व उपाध्यक्ष को निरुत्तर किया था। अब उस्मानाबाद विधानसभा मतदाता संघ से शिवसेना की और से कैलाश पाटील को ही उम्मीदवारी मिली है। राकांपा के विधयक राणा जगजीत सिंह पाटील के साथ जिला परिषद के पदाधिकारियों ने भाजपा मे प्रवेश किया है। युति होने से शिवसेना के उम्मीदवार कैलाश पाटील को अब जिला परिषद के पदाधिकारियों के वोट हासिल करने के लिए द्वार पर जाने की नौबत आई है। बाल साहित्य सम्मेलन हो या पदाधिकारियों पर किया खर्च अथवा अन्य खर्च को लेकर शिवसेना के जिला प्रमुख कैलाश पाटील के साथ कई जि.प. सदस्यों ने आमसभा में जिला परिषद पदाधिकारियों की जमकर क्लास ली थी।

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Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

जानिए भास्कर प्रॉपर्टी के बारे में:
भास्कर प्रॉपर्टी ऑनलाइन रियल एस्टेट स्पेस में तेजी से आगे बढ़ने वाली कंपनी हैं, जो आपके सपनों के घर की तलाश को आसान बनाती है। एक बेहतर अनुभव देने और आपको फर्जी लिस्टिंग और अंतहीन साइट विजिट से मुक्त कराने के मकसद से ही इस प्लेटफॉर्म को डेवलप किया गया है। हमारी बेहतरीन टीम की रिसर्च और मेहनत से हमने कई सारे प्रॉपर्टी से जुड़े रिकॉर्ड को इकट्ठा किया है। आपकी सुविधाओं को ध्यान में रखकर बनाए गए इस प्लेटफॉर्म से आपके समय की भी बचत होगी। यहां आपको सभी रेंज की प्रॉपर्टी लिस्टिंग मिलेगी, खास तौर पर जबलपुर की प्रॉपर्टीज से जुड़ी लिस्टिंग्स। ऐसे में अगर आप जबलपुर में प्रॉपर्टी खरीदने का प्लान बना रहे हैं और सही और सटीक जानकारी चाहते हैं तो भास्कर प्रॉपर्टी की वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं।

ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।