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रोपे जाएंगे औषधीय पौधे -लक्ष्य पूरा करने 4 दिन में लगाने होंगे 3.15 लाख पौधे 

रोपे जाएंगे औषधीय पौधे -लक्ष्य पूरा करने 4 दिन में लगाने होंगे 3.15 लाख पौधे 

डिजिटल डेस्क उमरिया । आसमान में बादलों की लुकाछिपी के चलते वन विभाग के पौधरोपण अभियान में देरी हो सकती है। शुरुआती पखवाड़े में जोरदार वर्षा के बाद बीच में बारिश ने ब्रेक लगा दिया। लिहाजा वन विभाग निर्धारित लक्ष्य में अभी तक 4.30 लाख पौधे लगा पाया है। अभी भी चार दिन के भीतर 3.15 लाख लगाने शेष है। इस बार इमारती व फलाधारी वन के साथ दुर्लभ प्रजाति के पौधों को भी तैयार किया जा रहा है। 
उल्लेखनीय है कि सामान्य वन मण्डल द्वारा इस सत्र 2020 में जून माह के पहले विस्तृत पौध रोपण अभियान की तैयारी चालू कर दी गई थी। उमरिया, चंदिया, नौरोजाबाद, पाली व घुनघुटी रेंज के 13 स्थल का चयन हुआ है। इनमें पांच जुलाई से पौधे रोपित किए जा रहे हैं। निर्धारित प्राथमिक समय सारिणी अनुसार 25 जुलाई तक कुल 7.45 लाख का लक्ष्य था। इस अनुपात में अभी तक वन विभाग 4.30 लाख तक पहुंच पाया है। यह कार्य कैम्पा मद, ग्रीन इंडिया मिशन, बाह्य पर्यावरण योजना के तहत कराया जा रहा है। इस कार्य में 40 हजार रुपए प्रति हेक्टेयर की लागत तय हुई है।
पांच फीसदी विलुप्त प्रजाति के पौधे भी
पौधरोपण के लिए गड्ढे व इनमे खाद का कार्य जून के पहले कराया गया। अभी नमी देखकर इनमे ंपौधे स्थापित हो रहे हैं। इस साल वन विभाग फलदार, इमारती व औषधीय के अलावा विलुप्त हो रहे दुर्लभ प्रजाति के पौधों को भी तैयार करेगा। निर्धारित लक्ष्य में भी रेंजों में इनका प्रतिशत पांच रहेगा। इन पौधों में दहिमन, तिन्सा, हर्रा, चिरौंजी, बीजा, कुल्लू तथा आंवले मुख्य हैं। खास बात यह भी है कि इनकी देखरेख व संरक्षण के लिए वन अमला 10 साल तक जिम्मेदार रहेगा।
हर हफ्ते होगी मॉनीटरिंग
हर सप्ताह एसडीओ स्तर के अफसर मैदानी कार्य का ब्यौरा लेते हैं। उन्हें पौध रोपण में आ रही भू-गोलिक व मानव श्रम जैसी समस्याओं में मार्गदर्शन कर रहे हैं। इस साल सर्वाधिक वृक्षारोपण नौरोजाबाद, चंदिया तथा घुनघुटी में किया जा रहा है। यहां स्थल अनुसार इमारती व फलदायी पौधे सागौन, मुहआ, हर्रा, बहेरा, कंजी व चिरौल को तैयार किया जाएगा। इस सूची में उमरिया व चंदिया रेंज क्षेत्र में कम रकबा निर्धारित हुआ है।
इनका कहना है
 वन मण्डल विभिन्न मदों के अंतर्गत 1061 हेक्टेयर रकबे में किया जा रहा है। इसमें विभिन्न प्रकार की प्रजातियां  स्थल अनुसार निर्धारित की गई है। अभियान लगभग समाप्ति की ओर ही है।      
-आरएन द्विवेदी, एसडीओ उमरिया
 

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