दैनिक भास्कर हिंदी: दुष्कर्म पीड़ित नाबालिग को गर्भ गिराने की अनुमति दी जाए या नहीं -हाईकोर्ट ने मेडिकल बोर्ड से दो दिन में मांगी रिपोर्ट 

July 18th, 2019

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। हाईकोर्ट ने भोपाल के मेडिकल बोर्ड से दो दिन में इस आशय की रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है कि दुष्कर्म पीडि़त नाबालिग किशोरी को 26 सप्ताह का गर्भ गिराने की अनुमति दी जाए या नहीं। एक्टिंग चीफ जस्टिस आरएस झा और जस्टिस विजय शुक्ला की युगल पीठ ने मामले की सुनवाई 19 जुलाई को नियत की है। 

13 वर्षीय बेटी के साथ दुष्कर्म हुआ

भोपाल निवासी एक महिला की ओर से दायर याचिका रिट अपील में कहा गया है कि उसकी 13 वर्षीय बेटी के साथ दुष्कर्म हुआ था। दुष्कर्म के बाद उसकी बेटी गर्भवती हो गई है। वर्तमान में उसकी बेटी को 26 सप्ताह का गर्भ है। उसकी बेटी की मानसिक और शारीरिक हालत ऐसी नहीं है कि वह बच्चे का जन्म दे सके। इसलिए उसकी बेटी को गर्भपात की इजाजत दी जाए। इस संबंध में हाईकोर्ट की एकल पीठ के समक्ष याचिका दायर की गई थी। हाईकोर्ट ने भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज के मेडिकल बोर्ड से नाबालिग की जांच कर रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया था। मेडिकल बोर्ड की ओर से पेश की गई रिपोर्ट में कहा गया कि नाबालिग किशोरी को 26 सप्ताह का गर्भ है। मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेसी एक्ट की धारा 3 के अनुसार नाबालिग किशोरी को गर्भपात की अनुमति नहीं दी जा सकती है। इस रिपोर्ट के आधार पर 5 जुलाई 2019 को एकल पीठ ने नाबालिग किशोरी को गर्भपात की अनुमति देने से इनकार करते हुए याचिका खारिज कर दी थी। एकल पीठ के आदेश के खिलाफ रिट अपील दायर की गई है। युगल पीठ ने दो दिन में मेडिकल बोर्ड को रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है।

सेवानिवृत्ति के 9 महीने पहले किए गए स्थानांतरण पर रोक

हाईकोर्ट ने जल संसाधन विभाग में कार्यरत सहायक ग्रेड-2 के पद पर कार्यरत कर्मचारी के सेवानिवृत्त के 9 महीने पहले किए गए स्थानांतरण पर रोक लगा दी है। जस्टिस नंदिता दुबे की एकल पीठ ने जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंता को निर्देश दिया है कि कर्मचारी के अभ्यावेदन का 15 दिन में निराकरण किया जाए। जल संसाधन विभाग सीहोर में सहायक ग्रेड-2 के पद पर कार्यरत सत्यनारायण शर्मा की ओर से दायर याचिका में कहा गया कि विभाग ने उनका स्थानांतरण भोपाल स्स्थित गंगा-बेतवा परियोजना में कर दिया है। याचिका में कहा गया कि राज्य सरकार द्वारा वर्ष 2019-2020 के लिए तैयार की गई स्थानांतरण नीति में कहा गया है कि ऐसे कर्मचारी जिनकी सेवानिवृत्ति का एक वर्ष बचा हुआ है। उन कर्मचारियों को स्थानातंरण नहीं किया जाएगा। अधिवक्ता भूपेन्द्र कुमार शुक्ला ने तर्क दिया कि याचिकाकर्ता का स्स्थानांतरण नीति के खिलाफ किया गया है। याचिकाकर्ता ने मुख्य अभियंता को स्थानांतरण रोकने के लिए अभ्यावेदन भी दिया, लेकिन उसके अभ्यावेदन पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। प्रांरभिक सुनवाई के बाद एकल पीठ ने स्थानांतरण पर रोक लगा दी है। एकल पीठ ने जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंता को 15 दिन के भीतर अभ्यावेदन का निराकरण करने का निर्देश दिया है।
 

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