comScore

© Copyright 2019-20 : Bhaskarhindi.com. All Rights Reserved.

छवि चमकाने सोशल मीडिया के सहारे नागपुर यूनिवर्सिटी, शीघ्र जारी होगी आईडी

छवि चमकाने सोशल मीडिया के सहारे नागपुर यूनिवर्सिटी, शीघ्र जारी होगी आईडी

डिजिटल डेस्क, नागपुर। यूनिवर्सिटी ने अपनी छवि चमकाने के लिए सोशल मीडिया का सहारा लेने का निर्णय लिया है। यूनिवर्सिटी अनुदान आयोग ने  यूनिवर्सिटी को फेसबुक, ट्विटर और अन्य सोशल मीडिया पर सक्रियता बढ़ाने के आदेश दिए हैं। यूनिवर्सिटी को नियमित रूप से इन अकाउंट्स पर सकारात्मक पोस्ट डालनी होगी। इसके अलावा  यूनिवर्सिटी में होने वाले सराहनीय उपक्रम और अन्य चीजें भी पोर्टल पर अपलोड करनी होंगी। 

अकाउंट चलाने शिक्षक होंगे नियुक्त

यूनिवर्सिटी कुलगुरु डाॅ. सिद्धार्थ विनायक काणे ने बताया कि, ये सोशल मीडिया अकाउंट्स चलाने के लिए यूनिवर्सिटी एक शिक्षक को सोशल मीडिया चैंपियन के रूप में नियुक्त करेगा। दरअसल, डिजिटल इंडिया के दौर में प्रशासनिक संस्थाएं भी सोशल मीडिया का प्रयोग करने लगी हैं। पब्लिक रिलेशन बनाने के िलए फेसबुक और ट्विटर जैसे प्लेटफॉर्म का खुलकर उपयोग हो रहा है। ऐसे में विवि भी इस पर सक्रिय होगा। डाॅ. काणे के अनुसार विद्यार्थियों से संवाद साधने का यह एक अच्छा मौका होगा।  यूनिवर्सिटी में कई बार ऐसे मौके आते हैं, जब किसी घटना पर यूनिवर्सिटी अपना मत  समाज के बीच नहीं रख पाता। सोशल मीडिया के उपयोग से यूनिवर्सिटी आसानी से समाज के बीच अपनी बात पहुंचा सकता है। यूनिवर्सिटी जल्द ही सोशल मीडिया आईडी जारी करेगा। 

अब भूल सुधारेगा यूनिवर्सिटी, दोबारा होगी परीक्षा

राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय ने आगामी 15 दिन के भीतर एमए इन वुमन स्टडीज का "वुमन पॉलिटिक्स एंड गवर्नेंस' विषय का पेपर दोबारा लेने का निर्णय लिया है। 16 अक्टूबर को निर्धारित इस परीक्षा का प्रश्नपत्र तैयार नहीं होने के कारण पेपर नहीं हो पाया था। ‘दैनिक भास्कर’ द्वारा इस विषय को प्रमुखता से उठाने के बाद यूनिवर्सिटी प्रशासन इस दिशा में सक्रिय हुआ है। मामले में यूनिवर्सिटी कुलगुरु डाॅ. सिद्धार्थविनायक काणे ने कहा है कि, यह पूर्व विद्यार्थियों की परीक्षा थी, इसमें भी महज एक छात्रा थी। गलती से यूनिवर्सिटीके रिकॉर्ड में आया कि, विषय में एक भी परीक्षार्थी नहीं है। ऐसे में पेपर नहीं भेजा गया। वरना यूनिवर्सिटी के पास पेपर के सेट तैयार रहते हैं। बुधवार को भी वक्त पर यूनिवर्सिटी प्रशासन को सूचना मिलती तो तुरंत छात्रा के लिए पेपर भिजवाया जा सकता था, लेकिन यूनिवर्सिटी इस गलती को जरूर सुधारेगा। 15 दिन के भीतर छात्रा की परीक्षा ली जाएगी। 

कमेंट करें
TKBWz
NEXT STORY

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

जानिए भास्कर प्रॉपर्टी के बारे में:
भास्कर प्रॉपर्टी ऑनलाइन रियल एस्टेट स्पेस में तेजी से आगे बढ़ने वाली कंपनी हैं, जो आपके सपनों के घर की तलाश को आसान बनाती है। एक बेहतर अनुभव देने और आपको फर्जी लिस्टिंग और अंतहीन साइट विजिट से मुक्त कराने के मकसद से ही इस प्लेटफॉर्म को डेवलप किया गया है। हमारी बेहतरीन टीम की रिसर्च और मेहनत से हमने कई सारे प्रॉपर्टी से जुड़े रिकॉर्ड को इकट्ठा किया है। आपकी सुविधाओं को ध्यान में रखकर बनाए गए इस प्लेटफॉर्म से आपके समय की भी बचत होगी। यहां आपको सभी रेंज की प्रॉपर्टी लिस्टिंग मिलेगी, खास तौर पर जबलपुर की प्रॉपर्टीज से जुड़ी लिस्टिंग्स। ऐसे में अगर आप जबलपुर में प्रॉपर्टी खरीदने का प्लान बना रहे हैं और सही और सटीक जानकारी चाहते हैं तो भास्कर प्रॉपर्टी की वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं।

ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।