दैनिक भास्कर हिंदी: जबलपुर शहर के आस पास  विलुप्त प्रजाति की (केराकल) वाइल्ड कैट दिखी -वाइल्ड एक्सपर्ट ने की पहचान

February 13th, 2020

डिजिटल डेस्क जबलपुर । ठाकुरताल की पहाडिय़ों में तेंदुए के अलावा विलुप्त प्रजाति की (केराकल-स्याहगोश) जंगली बिल्ली भी मौजूद है। इसकी पुष्टि राजस्थान से नयागाँव में अपने रिश्तेदार के घर आए एक वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट ने उन तस्वीरों को देखकर की, जो वन विभाग के ट्रैप कैमरों में 31 दिसम्बर की सुबह कैद हुई थीं। वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट का कहना है कि यह जबलपुर के लिए बड़ी उपलब्धि है। इस मामले में वन विभाग के साथ आम शहरियों को भी गंभीरता से काम लेना चाहिए, क्योंिक केराकल-स्याहगोश सिर्फ अफ्रीका के घने जंगलों के साथ पश्चिमी भारत के कुछ हिस्सों में ही देखने को मिलती है। इस वन्य जीव पर रिसर्च करने के िलए सालों से देश-विदेश के वन्य प्राणी िवशेषज्ञ दुनिया भर के जंगलों में सक्रिय हैं। 
ट्रैप कैमरे में तेंदुए की नई तस्वीरें कैद 
 ठाकुरताल में एक बार फिर तेंदुए की नई तस्वीरें जंगली एरिया में लगे ट्रैप कैमरों में कैद हुई हैं। रविवार की शाम करीब 6 बजे सूर्यास्त के समय तेंदुआ इत्मीनान से घूमता हुआ दिख रहा था। इस बार कैमरे में तस्वीरों के साथ आठ सेकंड का वीडियो भी दर्ज हुआ है। 

ईडीके से ठाकुरताल तक बना कॉरिडोर 
 वन विभाग का मानना है कि ठाकुरताल में तेंदुए और अन्य तरह के वन्य प्राणी (ईडीके) एक्सक्लूसिव डिपो खमरिया के जंगलों से पहुँच रहे हैं। दरअसल हाल ही में अतिक्रमण से मुक्त हुई पहाडिय़ों के बाद जंगली एरिया बढऩे से एमपीईबी से खमरिया तक लंबा कॉरिडोर बन गया है, जिसके कारण अभी तक ईडीके के जंगलों तक सीमित रहने वाले वन्य जीव खुला माहौल मिलने के कारण इस मार्ग से आवागमन कर रहे हैं। 
 अफ्रीका और पश्चिमी भारत के जंगलों में मुश्किल से होते हैं दर्शन
केराकल की सुरक्षा पर ध्यान दे वन विभाग -  ट्रैप कैमरों की तस्वीरें देखकर केराकल की पहचान करने वाले जयपुर के समीप नवलगढ़ रियासत के वंशज ध्रुपत सिंह हैं। ध्रुपत सिंह नयागाँव सोसायटी अध्यक्ष रजत भार्गव के ससुराल पक्ष से हैं। श्री सिंह राजवंशी होने के साथ वाइल्ड लाइफ प्रेमी हैं, जो करीब 20 साल से देश के कई नेशनल पार्कों में सक्रिय हैं। केराकल उनका पसंदीदा वन्य जीव है। इसी वजह से रजत भार्गव ने वन विभाग द्वारा वायरल तस्वीरें उन्हें भेजी थीं, जिन्हें देखकर वह जबलपुर आए और ठाकुरताल में भ्रमण करके कई महत्वपूर्ण जानकारियाँ जुटाईं। श्री सिंह का कहना है कि केराकल की सुरक्षा पर वन विभाग को गंभीरता से ध्यान देना चाहिए।