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वन-वे पॉलिटिक्स - खेल से राजनीति में पहुंचे खिलाड़ी, फिर मैदान में नहीं लौटे और सियासत भी नहीं छूटी

October 20th, 2019 15:39 IST
वन-वे पॉलिटिक्स - खेल से राजनीति में पहुंचे खिलाड़ी, फिर मैदान में नहीं लौटे और सियासत भी नहीं छूटी

डिजिटल डेस्क, नागपुर। खेल में राजनीति नहीं होनी चाहिए, निश्चित ही भारत में यह आम राय है, खेल और राजनीति का हमेशा ही चोली-दामन का साथ रहा है। बड़े राजनेता की नजर खेल संगठनों पर नियमित रूप से रही है। राज्य या केन्द्र में मंत्री रहते हुए कई राजनेताओं ने खेल संगठन के मुखिया की जिम्मेदारी भी संभाली। वहीं इसके विपरीत कई ऐसे भी हैं, जो छात्र जीवन में स्टार खिलाड़ी रहने के बाद राजनीति में मैराथन पारी भी खेलीं। विदर्भ के साथ राज्य में कई ऐसे व्यक्तित्व हैं, जो बड़े राजनेता होने के साथ खेल संगठनों के मुखिया भी रहे हैं। इस सूची में राज्य के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस के साथ पूर्व मुख्यमंत्री व केन्द्रीय मंत्री शरद पवार, प्रफुल्ल पटेल, सुरेश कलमाड़ी, दत्ता मेघे, एनकेपी साल्वे, बै. शेषराव वानखेड़े, दत्ता मेघे, पूनम महाजन आदि प्रमुखत: से शामिल हैं। दूसरी ओर मैदानों पर सफलता के झंडे गाड़ने के बाद कई खिलाड़ी सफल राजनेता बने। 

देवेन्द्र फडणवीस 

राज्य के मुख्यमंत्री फडणवीस नागपुर के महापौर भी रहे। उन्होंने वर्षों तक नागपुर जिला बास्केटबॉल एसोसिएशन में अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभाली। 

शरद पवार 

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के मुखिया शरद पवार राज्य के मुख्यमंत्री रहने के साथ केन्द्र में भी मंत्री रहे। राज्य कुश्तीगीर परिषद के अध्यक्ष पवार बाद में मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन (एससीए), भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीअई) और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट काउंसिल (आईसीसी) के अध्यक्ष बने।

प्रफुल्ल पटेल 

राकांपा के दूसरे सबसे बड़े नेता प्रफुल्ल पटेल लंबे समय से खेल संगठन से जुड़े हुए हैं। मनमोहन सरकार में नागरिक उड्डयन मंत्री रहे प्रफुल्ल पटेल मौजूदा समय में वेस्टर्न इंडिया फुटबॉल एसोसिएशन और अखिल भारतीय फुटबॉल फेडरेशन के अध्यक्ष हैं।

एनकेपी साल्वे : विदर्भवादी नेता और इंदिरा गांधी कैबिनेट में केन्द्रीय मंत्री रहे एनकेपी साल्वे ने नागपुर की पहचान क्रीड़ा नगरी के रूप में दिलाने में अहम योगदान दिया। श्री साल्वे ने बीसीसीआई में अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी भी संभाली है।

पूनम महाजन : भारतीय जनता पार्टी की अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में मंत्री रहे प्रमोद महाजन की बेटी पूनम महाजन राज्य बास्केटबॉल संघ की अध्यक्ष रहीं। हालांकि फिलहाल राज्य बास्केटबॉल संघ को फेडरेशन ने प्रतिबंधित कर दिया है। पूनम महाजन वर्ष 2019 के अाम चुनाव में लगातार दूसरी बार सांसद बनीं।

सुरेश कलमाड़ी : केन्द्रीय खेल मंत्री रहे पुणे के सांसद सुरेश कलमाड़ी महाराष्ट्र राज्य और भारतीय ओलिंपिक संघ के अध्यक्ष रहे। उनके ही नेतृत्व में 2010 राष्ट्रमंडल खेल का आयोजन दिल्ली में हुआ। हालांकि इसमें हुए घोटाले के बाद कलमाड़ी विवादों में घिर गए। 

दत्ता मेघे : दत्ता भाऊ के नाम से परिचित दत्ता मेघे ने विदर्भ कुश्तीगीर परिषद में अध्यक्ष के रूप में अपनी सेवाएं दीं। राज्य सरकार में मंत्री रहे। बाद में सांसद बने। राष्ट्रवादी कांग्रेस बनने के बाद उन्होंने शरद पवार का नेतृत्व स्वीकार कर लिया।
बै. शेषराव वानखेड़े : मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष रहे बै. शेषराव वानखेड़े के नाम पर मुंबई के मरीन ड्राइव स्थित स्टेडियम का नामकरण वानखेड़े स्टेडियम के रूप में किया गया। नागपुर के जाने-माने व्यक्तित्व बै. वानखेड़े राज्य में मंत्री भी रहे। उन्होंने बीसीसीई के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया। विधान परिषद के सभापति भी रहे।

खिलाड़ी, जो बने राजनेता

अनीस अहमद  राज्य के क्रीड़ा व शालेय शिक्षण मंत्री रहे अनीस अहमद मध्य नागपुर से चुनाव जीतकर विधान मंडल पहुंचे थे। अपने छात्र जीवन में अनीस अहमद बढ़िया तैराक थे। उन्होंने सीपी एंड बेरार की ओर से नागपुर विवि का प्रतिनिधित्व किया। 

गुलाबराव गावंडे राजनेता और फिर राज्य के खेल राज्यमंत्री बनने से पहले गुलाबराव गावंडे कबड्डी और कुश्ती खिलाड़ी रहे। आगे चलकर श्री गावंडे विदर्भ कबड्डी एसोसिएशन के अध्यक्ष भी बने।

प्रशांत भोयर 

वर्धा के देवली से विधायक बने प्रशांत भोयर नागपुर विवि के जाने-माने हैंडबॉल खिलाड़ी थे। उन्होंने अंतर विवि खेलकूद स्पर्धा की हैंडबॉल में नागपुर विवि का प्रतिनिधित्व किया। विदर्भ में हैंडबॉल जैसे खेल को लोकप्रिय बनाने में प्रशांत भोयर ने विशेष रूप से योगदान दिया आैर उनके मार्गदर्शन में कई अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी बने।

रामदास तड़स  

वर्धा के सांसद रामदास तड़स की गिनती देश भर में अच्छे पहलवानों में होती रही है। उन्होंने विदर्भ केसरी का तमगा हासिल किया। कई वर्षों तक पहलवानी करने के बाद राजनीति में आए। वर्ष 2014 और 2019 में हुए आम चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी के रूप में विजयी हुए। 

विलास मुत्तेमवार  

उपराजधानी के खेल जगत में विशेष स्थान रखने वाला मराठा लॉन्सर्स क्लब के लिए कबड्डी खेल चुके विलास मुत्तेमवार लंबे समय तक नागपुर के सांसद रहे। मनमोहन सरकार में मंत्री रहे मुत्तेवार ने नागपुर में अंतरराष्ट्रीय मैराथन स्पर्धा का सफल आयोजन किया था। 

मारुति माने 

कोल्हापुर के सांसद रहे मारुति माने राजनीति में जाने से पहले पहलवान हुआ करते थे। मारुति माने ने हिंद केसरी का खिताब भी जीता था। कोल्हापुर के रहने वाले माने ने हिंद केसरी का खिताब जीतकर तहलका मचा दिया था। जिस समय देश में कुश्ती सबसे लोकप्रिय खेल हुआ करता था, उस दौर में मारुति माने ने अपने झंडे गाड़े और साबित कर दिया कि उनका मुकाबला करना आसान नहीं।
 

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।