comScore

© Copyright 2019-20 : Bhaskarhindi.com. All Rights Reserved.

पहले होम क्वारंटीन का विरोध, खेत में बनी झोपड़ी में पहुँचे छात्र तो खाना देने से भी रोक रहे ग्रामीण

पहले होम क्वारंटीन का विरोध, खेत में बनी झोपड़ी में पहुँचे छात्र तो खाना देने से भी रोक रहे ग्रामीण

डिजिटल डेस्क जबलपुर । लॉकडाउन में 50 दिनों तक इंदौर में फँसे बेलखेड़ा झलौन के तीन छात्र भगवान से बस एक ही दुआ कर रहे थे कि िकसी तरह अपने घर पहुँच जाएँ। उन्होंने सपने में भी नहीं सोचा था कि वे घर पहुँचकर अजीब मुसीबत में फँस जाएँगे। 14 मई को झलौन पहुँचते ही ग्रामीणों ने पहले उनके होम क्वारंटीन का विरोध कर दिया। विरोध के बाद तीनों छात्र जब क्वारंटीन के लिए खेत में बनी झोपड़ी में पहुँचे तो ग्रामीणों ने उन्हें खाना देने का भी विरोध करना शुरू कर दिया। बेलखेड़ा झलौन निवासी रोहित यादव, दीपक यादव और कृष्ण कुमार नामदेव ने बताया कि वे इंदौर में एसआई की परीक्षा की कोचिंग कर रहे थे। इसी दौरान लॉकडाउन हो गया। इंदौर में उन्होंने बड़ी मुश्किल से 50 दिन काटे। राज्य सरकार की बस से तीनों 14 मई को झलौन पहुँचे। स्वास्थ्य विभाग द्वारा इंदौर और जबलपुर में उनकी स्क्रीनिंग की गई थी। बेलखेड़ा थाना प्रभारी ने उन्हें 14 दिन होम क्वारंटीन में रहने के लिए कहा, जैसे ही तीनों घर पहुँचे तो ग्रामीणों ने उनके घर पर रहने का विरोध करना शुरू कर दिया। ग्रामीणों को समझाया गया कि वे कोरोना पॉजिटिव नहीं हैं, उन्हें सुरक्षा की दृष्टि से होम क्वारंटीन किया गया है, लेकिन ग्रामीण मानने के लिए तैयार नहीं हुए। इसके बाद   तीनों खेत में बनी झोपड़ी में रहने के लिए आ गए। उनके चाचा खेत पर खाना पहुँचाने आ रहे थे। ग्रामीणों ने उनके चाचा को भी रोकना शुरू कर दिया। उनके चाचा ने गाँव वालों को समझाया कि वे दूर से ही खाना पहुँचाकर आ रहे हैं, इसके बाद भी ग्रामीण मानने के लिए तैयार नहीं हैं।  
परिजनों से भी बात नहीं कर रहे ग्रामीण 7 छात्रों ने बताया कि ग्रामीण उनके परिजनों से भी दूरी बना रहे हैं। उनके परिवार वालों को दुकानदार सामान नहीं दे रहे हैं। दूध वाले भी उन्हें दूध नहीं दे रहे हैं। ग्रामीण ऐसा व्यवहार कर रहे हैं कि जैसे वे कोरोना के मरीज हों। गाँव वाले उनके परिजनों से बातचीत तक नहीं कर रहे हैं। उनके परिवार को भी बिल्कुल अलग-थलग कर दिया गया है। 
आँधी से झोपड़ी का छप्पर उड़ा 7 छात्रों ने बताया कि सोमवार दोपहर तेज आँधी चलने से झोपड़ी का छप्पर उड़ गया। छप्पर उडऩे से उनका बिस्तर और कपड़े गीले हो गए हैं। छात्रों ने प्रशासन से माँग की है कि उन्हें किसी सुरक्षित जगह पर क्वारंटीन किया जाए।
 

कमेंट करें
y2uwR
NEXT STORY

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

जानिए भास्कर प्रॉपर्टी के बारे में:
भास्कर प्रॉपर्टी ऑनलाइन रियल एस्टेट स्पेस में तेजी से आगे बढ़ने वाली कंपनी हैं, जो आपके सपनों के घर की तलाश को आसान बनाती है। एक बेहतर अनुभव देने और आपको फर्जी लिस्टिंग और अंतहीन साइट विजिट से मुक्त कराने के मकसद से ही इस प्लेटफॉर्म को डेवलप किया गया है। हमारी बेहतरीन टीम की रिसर्च और मेहनत से हमने कई सारे प्रॉपर्टी से जुड़े रिकॉर्ड को इकट्ठा किया है। आपकी सुविधाओं को ध्यान में रखकर बनाए गए इस प्लेटफॉर्म से आपके समय की भी बचत होगी। यहां आपको सभी रेंज की प्रॉपर्टी लिस्टिंग मिलेगी, खास तौर पर जबलपुर की प्रॉपर्टीज से जुड़ी लिस्टिंग्स। ऐसे में अगर आप जबलपुर में प्रॉपर्टी खरीदने का प्लान बना रहे हैं और सही और सटीक जानकारी चाहते हैं तो भास्कर प्रॉपर्टी की वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं।

ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।