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यूनिवर्सिटी में शुरू हुईं नए कुलगुरु की नियुक्ति की तैयारियां, 18 नवंबर को बैठक

यूनिवर्सिटी में शुरू हुईं नए कुलगुरु की नियुक्ति की तैयारियां, 18 नवंबर को बैठक

डिजिटल डेस्क, नागपुर।  यूनिवर्सिटी के नए कुलगुरु की नियुक्ति के लिए तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। अप्रैल 2020 में  यूनिवर्सिटी  के वर्तमान कुलगुरु डाॅ. सिद्धार्थविनायक काणे सेवानिवृत्त होने वाले हैं। नियमानुसार उनकी सेवानिवृत्ति के पूर्व ही नए कुलगुरु की नियुक्ति की तैयारियां करनी होती हैं। इसी सिलसिले में नागपुर विश्वविद्यालय ने 18 नवंबर को एकेडमिक काउंसिल और मैनेजमेंट काउंसिल की संयुक्त बैठक बुलाई है। ये दोनों प्राधिकरण मिल कर एक ऐसे व्यक्ति का नाम तय करेंगे, जिसे आवेदन पड़ताल समिति में बतौर यूनिवर्सिटी  के प्रतिनिधि के रूप में शामिल किया जाएगा।

यह पड़ताल समिति कुलगुरु पद के इच्छुक उम्मीदवारों के आवेदनों की छंटनी करेगी और योग्य उम्मीदवारों के साक्षात्कार की सिफारिश करेगी। इस आवेदन पड़ताल समिति में राज्यपाल के प्रतिनिधि, पूर्व जज और वरिष्ठ अधिकारी का भी समावेश होगा। ऐसे में 18 नवंबर को नागपुर यूनिवर्सिटी में होने वाली बैठक अहम साबित होगी। यूनिवर्सिटी  कुलगुरु डॉ. काणे ने 8 अप्रैल 2015 को पदभार संभाला था। वे यूनिवर्सिटी  में स्टैटिस्टिक्स के प्रोफेसर है। बतौर प्रोफेसर वे 30 नवंबर को सेवानिवृत्त होने वाले हैं। इसके बाद 8 अपैल 2020 को बतौर कुलगुरु उनका कार्यकाल पूरा होगा।

जिलाधिकारी और मुख्य चुनाव आयुक्त को बनाया प्रतिवादी
बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ में सामाजिक संस्था इंद्रधनु द्वारा दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई हुई। संगठन का दावा है कि हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद राज्य चुनाव आयुक्त ने 11 अप्रैल को हुए लोकसभा चुनावों में दिव्यांग मतदाताओं के लिए सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई। अधिवक्ता सेजल लाखानी रेणु की विनती पर हाईकोर्ट ने मामले में मुख्य चुनाव आयुक्त और वर्तमान जिलाधिकारी रवींद्र ठाकरे को प्रतिवादी बनाया गया है।  मामले में 8 सप्ताह बाद सुनवाई रखी गई है।

याचिकाकर्ता के अनुसार नागपुर खंडपीठ ने 3 अप्रैल 2019 के आदेश जारी कर चुनाव आयुक्त को लोकसभा चुनावों के मतदान के दौरान दिव्यांगों के लिए जरूरी प्रबंध करने को कहा था। लेकिन  लोकसभा के मतदान के दौरान कई मतदान केंद्रों पर दिव्यांगों के लिए कोई ठोस प्रबंध नहीं थे, जिससे उन्हें मतदान में दिक्कतें हुईं। याचिकाकर्ता ने ऐसी कुछ तस्वीरें भी कोर्ट को दिखाईं। अपनी मूल याचिका में इंद्रधनु ने हाईकोर्ट को बताया था कि राज्य में दिव्यागों के लिए कई जगहों पर विशेष सुविधाएं नहीं होने से उन्हें चलने-फिरने में खासी दिक्कत आती है। यहां तक कि सरकारी कार्यालयों में भी दिव्यांगों के लिए कोई ठोस बंदोबस्त नहीं है। नागपुर शहर में 8 हजार 411 दिव्यांग मतदाता है। इनमें दृष्टिहीन, कर्ण बधिर, शारीरिक रूप से अक्षम व अन्य दिव्यांगता वाले मतदाताओं का भी समावेश है। नियम के मुताबिक मतदान केंद्रों पर दिव्यांगों के लिए रैंप, व्हील चेयर, ब्रेल लिपि मतदान स्लीप जैसी सुविधाएं होना जरूरी है।nagpuuni

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