दैनिक भास्कर हिंदी: बैंगलुरु से मुंबई लाया गया माफिया रवि पुजारी, मुंबई में दर्ज हैं 49 मामले 

February 23rd, 2021

डिजिटल डेस्क, मुंबई। विशेष मकोका अदालत में पेशी के बाद माफिया सरगना रवि पुजारी को 9 मार्च तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है। उसे मुंबई पुलिस ने विलेपार्ले इलाके में स्थित गजाली रेस्टारेंट में फायरिंग मामले में गिरफ्तार किया है। दक्षिण अफ्रीकी देश सेनेगल में गिरफ्तारी के बाद प्रत्यार्पित किया गया पुजारी बैंगलुरू की जेल में बंद था। उसे सड़क के रास्ते मंगलवार सुबह बैंगलुरू से मुंबई लाकर अदालत में पेश किया गया। पुजारी की हिरासत मिलने के बाद पुलिस उसके उन गुर्गों पर शिकंजा कसने की तैयारी कर रही है, जो वसूली में उसकी मदद करते थे।

संयुक्त पुलिस आयुक्त (अपराध) मिलिंद भारंबे ने बताया पुजारी के खिलाफ मुंबई के विभिन्न पुलिस स्टेशनों में हत्या, हत्या की कोशिश, जबरन वसूली जैसे आरोपों में 49 आपराधिक मामले दर्ज हैं फिलहाल इनमें से 10 मामलों में कार्रवाई की जाएगी जिसमें उसके खिलाफ सबसे पुख्ता सबूत हैं। भारंबे ने बताया कि प्रत्यार्पण से पहले मुंबई पुलिस ने इस 10 मामलों से जुड़े सबूत सेनेगल की अदालत में भी पेश किए थे जिसके आधार पर उसे प्रत्यार्पित किया गया था। साथ ही दूसरे मामलों में भी उसके खिलाफ कार्रवाई के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय और विदेश मंत्रालय के जरिए कोशिश जारी है।

भारंबे ने कहा कि पुजारी की हिरासत मिलने के बाद उससे उन सभी लोगों के बारे में जानकारी हासिल करने की कोशिश की जाएगी जो अपराध में उसका साथ देते थे। फिलहाल उसे मुंबई पुलिस मुख्यालय में स्थित लॉकअप में रखा जाएगा जहां मामले की छानबीन कर रही जबरन वसूली विरोधी पथक उससे पूछताछ करेगी।

क्या है गजाली होटल फायरिंग मामला

मुंबई के विलेपार्ले इलाके में स्थित गजाली होटल में 21 अक्टूबर 2016 को फायरिंग की गई थी। पुलिस का आरोप है कि रवि पुजारी के दो गुर्गे होटल में घुसे और वहां के कर्मचारी को एक चिट पकड़ाते हुए दावा किया कि वे रवि पुजारी गिरोह के हैं। आरोपियों ने कर्मचारियों को जबरन वसूली के लिए धमकाया और निर्देश का पालन करने को कहा। दोनों ने फायरिंग की जिसमें एक कर्मचारी बुरी तरह जख्मी हो गया। इस मामले में मकोका के तहत एफआईआर दर्ज कर सात आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था।

ऑटो से अपराध तक का सफर

पुजारी मूल रुप से कर्नाटक का रहने वाला है लेकिन अपराध की दुनिया में उसने मुंबई में ही कदम रखा। वह महानगर के पश्चिमी उपनगर अंधेरी इलाके में रहता था और ऑटोरिक्शा चलाकर गुजर बसर करता था। यहीं वह पहले छोटे मोटे अपराधियों के संपर्क में आया और फिर छोटा राजन गिरोह से जुड़ गया। 1988 में अंधेरी पुलिस ने उसे सबसे पहले मारपीट और दंगे के मामले में गिरफ्तार किया था। इसके बाद उसके खिलाफ हत्या समेत कई आपराधिक मामले दर्ज हुए। राजन पर बैंकाक में हमले के बाद उसने अपना अलग गिरोह बना लिया और फिल्मी हस्तियों, कारोबारियों, बिल्डरों को जबरन वसूली के लिए धमकाने लगा। वह 1994 से फरार था।    

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