हाईकोर्ट : हेडमास्टर की पिटाई करने वाले अभिभावक के खिलाफ दर्ज एफआईआर रद्द करने से इंकार

July 22nd, 2022

डिजिटल डेस्क, मुंबई, कृष्णा शुक्ला। एक छात्र के अभिभावक द्वारा हेड मास्टर को सबके सामने मारना न सिर्फ स्कूल के अनुशासन को प्रभावित करता है बल्कि समाज पर भी इसका असर दिखाई देता है। बांबे हाईकोर्ट ने यह बात कहते बच्चे को डाटने के चलते स्कूल के मुख्याध्यापक को मारनेवाले एक छात्र के पिता के खिलाफ दर्ज एफआईआर व आरोपपत्र को रद्द करने से इंकार कर दिया है। न्यायमूर्ति नीतिन जामदार व न्यायमूर्ति एनआर बोरकर की खंडपीठ ने मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि भले ही स्कूल के हेड मास्टर ने आरोपी छात्र के पिता के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने के लिए अपनी सहमति दी है। फिर भी हम आरोपी के खिलाफ इस सहमति के आधार पर दर्ज आपराधिक मामले को रद्द नहीं कर सकते है। क्योंकि आरोपी ने उस समय हेड मास्टर के सिर पर चोट पहुंचाई जब वे स्कूल के मैदान में खड़े थे और वहां पर स्कूल के स्टाफ के अलावा दूसरे शिक्षक भी मौजूद थे। इस लिहाज से देखा जाए तो आरोपी ने सबके सामने हेड मास्टर के सिर पर हमला किया है। जिसका स्कूल के अनुशासन पर स्थायी तौर पर हानिकारक प्रभाव पड़ेगा। इस घटना का असर समाज पर भी नजर आएगा। लिहाजा आरोपी के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले को लेकर दायर किए गए आरोपपत्र को रद्द नही किया जा सकता है। 

मामले से जुड़े आरोपी बीएस बोरसे के खिलाफ साल 2018 में मुख्याध्यापक की शिकायत के आधार पर नाशिक ग्रामीण के चांदवड़ पुलिस स्टेशन में भारतीय दंड संहिता की धारा 353, 332 व 324 के तहत एफआईआर दर्ज की थी। फिर पुलिस ने जांच के बाद आरोपत्र दायर किया था। जिसे रद्द करने की मांग को लेकर आरोपी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। 

आरोपी ने याचिका में दावा किया था कि हेड मास्टर ने मामला रद्द करने को लेकर अपनी सहमति दी है। इसलिए मामले को रद्द कर दिया जाए। किंतु खंडपीठ ने मामले से जुड़े तथ्यों पर गौर करने के बाद कहा कि यह सही है कि कोर्ट के पास आरोपी व शिकायतकर्ता की सहमति के बाद आपराधिक मामले को रद्द करने का अधिकार है। लेकिन इस अधिकार का इस्तेमाल हर मामले के तथ्यों व घटना से जुड़े अपराध का समाज पर पड़नेवाले असर पर भी निर्भर करता है। इस मामले से जुड़े आरोपी ने पहले शिकायतकर्ता को धक्का दिया फिर उन पर प्रहार किया और जान से मारने की धमकी भी दी। इस हमले में शिकायतकर्ता के सिर पर चोट लगी है। जिसका शिकायतकर्ता को इलाज करना पड़ा है। मेडिकल रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है। इसके अलावा इस मामले से जुड़े मुकदमे की शुरुआत हो चुकी है। कई गवाहों की गवाही हो चुकी है। ऐसे में हम आरोपी के खिलाफ दर्ज मामले व आरोपपत्र को रद्द नहीं कर सकते है। कोर्ट ने आरोपी की याचिका को खारिज कर दिया।