हाईकोर्ट: जेल में बंद नवलखा को अंग्रेजी किताब देने से इंकार करना हास्यास्पद 

April 4th, 2022

डिजिटल डेस्क, मुंबई। बांबे हाईकोर्ट ने सुरक्षा के लिए खतरा बताकर भीमा-कोरेगांव एल्गार परिषद मामले में आरोपी गौतम नवलखा को जेल प्रशासन की ओर से एक अंग्रेजी लेखक की किताब सौपने से मना करने को हास्यास्पद बताया है। तलोजा जेल प्रशासन ने सुरक्षा के लिए खतरा बताकर आरोपी नवलखा को अंग्रेजी लेखक पीजी वोडहाउस द्वारा लिखित हास्य आधारित किताब देने से मना कर दिया था। 

सोमवार को न्यायमूर्ति एसबी सुक्रे व न्यायमूर्ति जीए सानप की खंडपीठ के सामने याचिका पर सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने जेल प्रशासन द्वारा सुरक्षा के खतरे का हवाला देकर आरोपी को किताब सौपने से मना करने को हास्यास्पद बताया। याचिका में 70 वर्षीय नवलखा ने अपनी उम्र व खराब सेहत का हवाला देकर कहा है कि उन्हे नई मुंबई की तलोजा जेल में न्यायिक हिरासत में रखने की बजाय घर में नजर कैद किया जाए। नवलखा को इस मामले में साल 2019 में गिरफ्तार किया गया था। तब से वे जेल में है। 

सुनवाई के दौरान नवलखा की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता युग चौधरी ने कहा कि तलोजा जेल की स्थिति ठीक नहीं है। मेरे मुवक्किल को जेल में बुनियादी चीजे तक नहीं दी जा रही है। मेरे मुवक्किल ने दर्द होने के चलते कई बार बैठने के लिए कुर्सी उपलब्ध कराने की मांग की। लेकिन उनकी इस मांग पर विचार नहीं किया गया। अतीत में मेरे मुवक्किल का  चश्मा जेल में चोरी हो गया था। लेकिन जेल प्रशासन ने उनके घरवालों की ओर से भेजा गया दूसरा चश्मा तक नहीं लेने  दिया। पिछले दिनों मेरे मुवक्किल को उनके घरवालों की ओर से एक अंग्रेजी लेखक की हास्य आधारित किताब भेजी थे। लेकिन जेल प्रशासन ने दो बार सुरक्षा को खतरा बता कर किताब सौपने से मना कर दिया। इस पर खंडपीठ ने कहा कि क्या जेल प्रशासन की ओर से किताब न देने के बारे में दिया गया आदेश उपलब्ध है। इस पर खंडपीठ के सामने आदेश की प्रति पेश की गई। 

इस पर खंडपीठ ने कड़ी नाराजगी जाहिर की और कहा कि जिस अग्रेजी लेखक कि किताब आरोपी को देने से मना किया गया है वह मराठी के लेखक व कवि पी.एल देशपांडे के लिए प्रेरणा स्त्रोत रहे हैं। खंडपीठ ने कहा कि जेल प्रशासन की यह हरकत उसके रुख को दर्शाती है। खंडपीठ ने अब 5 अप्रैल को इस मामले की सुनवाई रखी है। 

 

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