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स्लम एरिया के बच्चों को शिक्षा से जोड़कर उड़ान दे रही एकेडमी ड्राइव

स्लम एरिया के बच्चों को शिक्षा से जोड़कर उड़ान दे रही एकेडमी ड्राइव

डिजिटल डेस्क, नागपुर। हर बच्चे का सपना होता है कि वह पढ़-लिखकर आगे बढ़े और अपने सपनों को पूरा करे, लेकिन कई बार आर्थिक परिस्थिति सपनों में बाधा बन जाती है। कभी गलत राह की ओर बढ़ते कदम भी इन सपनों को पूरा नहीं होने देते हैं। ऐसे ही सपनों की उड़ान और मंजिल देने के लिए रॉबिन्स ने एकेडमी ड्राइव की शुरुआत की है, जोे स्लम एरिया के बच्चों को शिक्षा की ओर बढ़ा रहे हैं। रॉबिन हुड एकेडमी ने सेमिनरी हिल्स तथा प्रताप नगर के स्लम एरिया में रहने वाले बच्चों के मन में आत्मविश्वास जगाया। रॉबिन्स का कहना है कि शहर के दो एरिया में करीब 90 बच्चों को शिक्षा दी जा रही है।

2 क्षेत्रों में लगती है पाठशाला

रॉबिन हुड एकेडमी द्वारा शहर के 2 क्षेत्रों में पाठशाला आयोजित की जाती है, जिसमें 45 वॉलेंटियर्स काम करते हैं। शनिवार और रविवार को इन बच्चों को वह बेसिक एजुकेशन देते हैं। इसमें 4 से लेकर 16 वर्ष तक के बच्चे हैं। शनिवार शाम 5 से 7 बजे और रविवार सुबह 10 से 12 बजे तक वॉलेंटियर इन्हें पढ़ाते हैं। रॉबिन्स का कहना है कि शहर के कुछ स्कूलों के साथ टाई-अप हुआ है। वे इनका एजुकेशन कंटिन्यू करने में मदद करते हैं। प्रताप नगर के 25 बच्चे हैं, जो स्कूल नहीं जाते हैं। हमारे द्वारा पिछले कुछ महीनों से प्रताप नगर में पाठशाला शुरू की गई है। हमारा प्रयास है कि उन्हें नेक्स्ट सेशन में एडमिशन मिल जाए। 

इंटरव्यू पास हो जाएं

रॉबिन्स का कहना है कि हम छोटे बच्चाें को बेसिक एजुकेशन देते हैं, ताकि अगर वो किसी स्कूल में इंटरव्यू देने जाएं, तो पास हो जाएं। वॉलेंटियर्स को सब्जेक्ट बांट दिया गया है। हिन्दी, इंग्लिश, मैथ्स, जनरल नॉलेज आदि पढ़ाया जाता है। वॉलेंटियर्स में इंजीनियर, डॉक्टर, बिजनेसमैन और स्टूडेन्ट भी हैं। कई बार बच्चे बुक्स भी नहीं ले पाते हैं, तो उन्हें बुक और शालेय सामग्री हम उपलब्ध कराते हैं। 

दो बानगी... परसेंट में सुधार

8वीं कक्षा की सलोनी उके ने बताया कि मैं स्कूल तो जाती थी, लेकिन पढ़ने में बहुत अच्छी नहीं थी। शनिवार और रविवार की क्लास में मुझे बहुत कुछ सीखने को मिला। मेरे हर सब्जेक्ट में नंबर बढ़िया आने लगे। 9वीं कक्षा के अभिषेक उके ने बताया कि मेरी पढ़ने में कोई खास रूचि नहीं थी, लेकिन जब से रॉबिन्स में पढ़ाना शुरू किया, तो पढ़ने में रुचि बढ़ गई है, जब भैया लोगों को अच्छी पोस्ट पर देखता हंू तो मुझे भी लगता है कि, मैं भी पढ़-लिखकर  बड़ा इंसान बनूं और दूसरे बच्चों को पढ़ाऊं।

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Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

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डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

जानिए भास्कर प्रॉपर्टी के बारे में:
भास्कर प्रॉपर्टी ऑनलाइन रियल एस्टेट स्पेस में तेजी से आगे बढ़ने वाली कंपनी हैं, जो आपके सपनों के घर की तलाश को आसान बनाती है। एक बेहतर अनुभव देने और आपको फर्जी लिस्टिंग और अंतहीन साइट विजिट से मुक्त कराने के मकसद से ही इस प्लेटफॉर्म को डेवलप किया गया है। हमारी बेहतरीन टीम की रिसर्च और मेहनत से हमने कई सारे प्रॉपर्टी से जुड़े रिकॉर्ड को इकट्ठा किया है। आपकी सुविधाओं को ध्यान में रखकर बनाए गए इस प्लेटफॉर्म से आपके समय की भी बचत होगी। यहां आपको सभी रेंज की प्रॉपर्टी लिस्टिंग मिलेगी, खास तौर पर जबलपुर की प्रॉपर्टीज से जुड़ी लिस्टिंग्स। ऐसे में अगर आप जबलपुर में प्रॉपर्टी खरीदने का प्लान बना रहे हैं और सही और सटीक जानकारी चाहते हैं तो भास्कर प्रॉपर्टी की वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं।

ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।