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जबलपुर के साथ सरकार के सौतेले व्यवहार को देखकर लगता है, हमें सख्त आदेश देना ही पड़ेगा

जबलपुर के साथ सरकार के सौतेले व्यवहार को देखकर लगता है, हमें सख्त आदेश देना ही पड़ेगा

डिजिटल डेस्क जबलपुर । शहर में चल रहे विकास कार्यों पर सोमवार को हाईकोर्ट ने एक बार फिर से शासन और प्रशासन की जमकर खिंचाई करते हुए कहा कि जबलपुर के साथ सरकार द्वारा जिस तरह से सौतेला व्यवहार किया जा रहा, उससे लगता है हमें सख्त आदेश जारी करना ही होंगे। सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस अजय कुमार मित्तल और जस्टिस विजय कुमार शुक्ला की युगलपीठ ने कहा कि सरकार को इन्दौर और भोपाल की तरह जबलपुर को भी पर्याप्त फंड देना चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि इस शहर में हाईकोर्ट की प्रिसिंपल बैंच है, इसलिए सरकार को इस शहर के साथ अपना रवैया बदलना होगा। मामले पर अगली सुनवाई 5 फरवरी को निर्धारित करके युगलपीठ ने सरकार को ठोस कार्ययोजना पेश करने कहा है।

गौरतलब है कि पिछले एक दशक से जबलपुर में बिछाई जा रही सीवर लाईन से शहर के शांति नगर,  कृष्णा कालोनी, त्रिमूर्ति नगर, कमला नेहरू नगर और जगदम्बा कालोनी के लोगों को हो रही परेशानियों की खबर दैनिक भास्कर के 20 सितंबर के अंक में पेज नंबर 2 पर च्प्रापर्टी चेम्बर से जोड़े घरों के सीवर   कनेक्शन, बंद कर दी गईं नालियां, पानी निकासी की जगह नहीं, अब राहत बनी मुसीबतज् शीर्षक से प्रमुखता से प्रकाशित की गई थी। इसी खबर पर तत्कालीन चीफ जस्टिस हेमंत गुप्ता ने संज्ञान लेकर उसकी सुनवाई  जनहित याचिका के रूप में करने के निर्देश जारी किए थे। उसके बाद 21 सितंबर को 2017 को प्रारंभिक सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने नगर निगम से जवाब तलब किया था।
मामले पर सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान अदालत मित्र के रूप में अधिवक्ता अनूप नायर, महाधिवक्ता शशांक शेखर, नगर निगम की ओर से अधिवक्ता अंशुमान सिंह ने अपनी दलीलें रखीं। सुनवाई के बाद युगलपीठ ने शासन और नगर निगम को ठोस कार्ययोजना पेश करने के निर्देश दिए। युगलपीठ द्वारा सुनाए गए विस्तृत आदेश की फिलहाल प्रतीक्षा है।

हम चीफ सेक्रेटरी से करेंगे बात
सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता शशांक शेखर ने कहा कि विकास कार्यों के मुद्दे को लेकर वे खुद राज्य के मुख्य सचिव से बात करेंगे। इसके अलावा शहर विकास को एक कांक्रीट प्लान बनाकर अगली सुनवाई पर पेश करेंगे। 

तो हम हर रोज करेंगे मॉनीटरिंग
सुनवाई के दौरान नगर निगम की ओर से पेश किए जवाब को युगलपीठ ने नाकाफी पाया। युगलपीठ ने यहां तक टिप्पणी की कि जिस तरह से शहर में विकास कार्य चल रहे, उसे देखकर लगता है कि हमें रोज मॉनीटरिंग करना होगी।

रिटायरमेंट के बाद भी यही हाल होंगे
इंदिरा मार्केट से पचपेढ़ी मार्ग पर स्थित रेलवे पुल के नीचे भरे गंदे पानी का मुद्दा भी उठा। चीफ जस्टिस ने अपनी नाखुशी जताते हुए कहा- ऊपर पुल पर स्वच्छता सर्वेक्षण 2020 का बैनर लगा है और नीचे हर रोज गंदा पानी बहता है। मैं वर्ष 2019 में यहां आया था। जो हाल तब थे, वही हाल आज वर्ष 2020 में है। रिटायरमेंट के बाद यदि वर्ष 2021 में वापस इस शहर में आया तो क्या तब भी यही हाल रहेंगे।
 

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