दैनिक भास्कर हिंदी: शिवसेना को बड़ा झटका, राज्य मंत्री अर्जुन खोतकर की विधायकी रद्द

November 24th, 2017

डिजिटल डेस्क,औरंगाबाद। बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद खंडपीठ के न्यायमूर्ति नलावड़े ने शिवसेना के विधायक और महाराष्ट्र  के कपड़ा, मत्स्य एवं पशु संवर्धन राज्य मंत्री अर्जुन खोतकर का चुनावी हलफनामा रद्द कर दिया है। उनके खिलाफ पूर्व विधायक कैलाश गोरंटयाल ने याचिका दायर की थी। कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान पाया कि 2014 में अर्जुन खोतकर ने नॉमिनेशन दाखिल करने की तारीख खत्म होने के बाद नामांकन भरा था। हाईकोर्ट ने खोतकर को 4 हफ्ते का वक्त दिया है। इस दौरान एक माह के लिए उनका विधायक पद बचा रहेगा। 

दरअसल पूर्व विधायक कैलाश गोरंटयाल ने याचिका में अर्जुन पर भ्रष्टाचार और चुनाव में धांधली के जरिए जीत हासिल करने का आरोप लगाया था। 2014 में अर्जुन 296 मतों से जीते थे। अपने 25 साल के करियर में खोतकर कई अहम पदों पर भी काम कर चुके हैं। वे जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष के तौर पर भी काम कर चुके हैं। इसके अलावा वो सरकारी चीनी मिल में भी संचालक के पद पर रह चुके हैं। 1990 में पहली बार अर्जुन चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे थे।

समय निकलने के बाद नामांकन दाखिल करने का आरोप
मुंबई उच्च न्यायालय औरंगाबाद बेंच के न्यायमूर्ति नलावडे द्वारा राज्यमंत्री अर्जुन खोतकर की विधायकी रद्द करने के बाद कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। याचिका में कहा गया है कि  2014 के विधानसभा चुनाव में खोतकर ने समय निकल जाने के बाद स्थानीय उपविभागीय अधिकारी के पास अपनी उम्मीदवारी दाखिल की थी। समय बीत जाने के कारण वे चुनाव लड़ने के लिए पात्र नहीं थे।

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सुप्रीम कोर्ट जाएंगे
याचिका पर सुनवाई शुक्रवार को हुई। 2014 के विधानसभा चुनाव में खोतकर सिर्फ 296 वोटों से जीते थे। इस पर एक महीने की मोहलत मिली है। खोतकर ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की जानकारी दी है।  खोतकर ने कहा कि वे इस्तीफा नहीं देंगे। सदस्यता खोने के बाद भी छह महीने तक मंत्री रह सकते हैं और इस बीच वे न्याय पाकर रहेंगे। 

शिवसेना का नुकसान 
अर्जुन खोतकर मराठवाड़ा से शिवसना के बड़े नेता हैं। उनकी विधायकी जाने से शिवसेना को बड़ा धक्का लगा है। जालना जिले में अर्जुन खोतकर ने शिवसेना को मजबूत बनाने के लिए काफी मेहनत की थी। इसलिए उनकी विधायकी जाना शिवसेना के लिए अच्छे संकेत नहीं है। खोतकर अब सुप्रीम कोर्ट जाएंगे। वहां उनके लिए क्या निर्णय आता है इस ओर सभी का ध्यान केन्द्रित है।