दैनिक भास्कर हिंदी: कोटा: मासूमों की मौत पर सोनिया गांधी नाराज, गहलोत ने कहा- हम संवेदनशील है

January 2nd, 2020

हाईलाइट

  • कोटा के जेके लोन अस्पताल में दिसंबर महीने में 100 बच्चों की मौत
  • सीएम अशोक गहलोत ने दी सफाई
  • कहा- हमारी सरकार लगातार प्रयास कर रही है

डिजिटल डेस्क, जयपुर। कोटा में बच्चों की मौत पर गहलोत सरकार को विरोध का सामना करना पड़ा रहा है। अब इस पर कांग्रेस अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी भी नाराज हो गई हैं। उन्होंने राजस्थान प्रभारी अविनाश पांडे को तलब किया। वहीं इस मामले में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सफाई दी है। 

राजनीत नहीं होनी चाहिए

सीएम गहलोत ने ट्वीट किया है। उन्होंने लिखा है, जेके लोन अस्पताल, कोटा में हुई बीमार शिशुओं की मृत्यु पर सरकार संवेदनशील है। इस पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। कोटा के इस अस्पताल में शिशुओं की मृत्यु दर लगातार कम हो रही है। हम आगे इसे और भी कम करने के लिए प्रयास करेंगे। मां और बच्चे स्वस्थ रहें यह हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। 

मायावती ने प्रियंका पर साधा निशाना

बसपा प्रमुख मायावती ने इस मामले में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी पर हमला किया है। मायावती ने ट्वीट किया, कांग्रेस शासित राजस्थान के कोटा जिले में हाल ही में लगभग 100 मासूम बच्चों की मौत पर कांग्रेस महासचिव की चुप्पी साधे रहना बहुत दुखद है। अच्छा होता कि वह उप्र की तरह उन गरीब पीड़ित माताओं से भी जाकर मिलतीं, जिनकी गोद केवल उनकी पार्टी की सरकार की लापरवाही के कारण उजड़ गई हैं।

उन्होंने कहा, यदि कांग्रेस की महिला राष्ट्रीय महासचिव राजस्थान के कोटा में जाकर मृतक बच्चों की माताओं से नहीं मिलती हैं तो यहां अभी तक किसी भी मामले में उप्र पीड़ितों के परिवार से मिलना केवल इनका यह राजनीतिक स्वार्थ व कोरी नाटकबाजी ही मानी जाएगी, जिससे उप्र की जनता को सतर्क रहना है। मायावती ने कहा कि राजस्थान में अशोक गहलोत सरकार का रवैया निंदनीय है, जिसने कोटा में 100 बच्चों की मौत पर कोई सही कदम नहीं उठाया है। वे खुद व उनकी सरकार इसके प्रति अभी भी उदासीन, असंवेदनशील व गैर-जिम्मेदार बनी हुई है।


क्या है जेके लोन अस्पताल का मामला?

कोटा के जेके लोन अस्पताल में दिसंबर के अंतिम दो दिन में करीब 9 और नवजात बच्चों की मौत हो गई। इसके साथ ही एक महीने में अस्पताल में मरने वाले शिशुओं की संख्या 100 हो गई है। 23-24 दिसंबर को 48 घंटे के भीतर अस्पताल में 10 शिशुओं की मौत को लेकर काफी हंगामा हुआ था। हालांकि, अस्पताल के अधिकारियों ने कहा था कि यहां 2018 में 1,005 शिशुओं की मौत हुई थी और 2019 में उससे कम मौतें हुई हैं। अस्पताल के अधीक्षक के अनुसार अधिकतर शिशुओं की मौत मुख्यत: जन्म के समय कम वजन के कारण हुई।