comScore

एलटीसी प्रोत्साहन और इससे लाभ की गलत व्याख्या पर वित्त मंत्रालय का बयान

October 14th, 2020 16:12 IST
एलटीसी प्रोत्साहन और इससे लाभ की गलत व्याख्या पर वित्त मंत्रालय का बयान

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। इकोनॉमिक टाइम्स मार्केट्स (ईटीमार्केट्स डॉट कॉम) की एक रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें ऐसी धारणा बनाई गई है कि सरकारी कर्मचारियों के लिए एलटीसी वाउचर योजना आकर्षक नहीं हो सकती है। दुर्भाग्य से, सरकारी एलटीसी कैसे काम करती है, इसे समझने में इस रिपोर्ट में एक गंभीर तथ्यात्मक त्रुटि दिखाई देती है। यह रिपोर्ट उस गलत धारणा पर आधारित है कि यात्रा के पैसे को यात्रा किए बिना ही आयकर का भुगतान करके बनाए रखा जा सकता है। रिपोर्ट में जो प्रमुख रूप से दावा किया गया है: 'इसका लाभ उठाने की बजाय उनके लिए एलटीसी राशि पर कर का भुगतान करना बेहतर होगा।' सरकारी एलटीसी कॉर्पोरेट सेक्टर में दिए जाने वाले लीव ट्रैवल अलाउंस से काफी अलग है। एक व्यक्ति दावा करते हैं कि एलटीसी के लिए पात्र नहीं हैं जब तक कि कोई वास्तव में यात्रा नहीं करता है; अगर वह यात्रा करने में विफल रहा है तो उसके वेतन से राशि काट ली जाती है और उसे अनुशासनात्मक कार्रवाई का भी सामना करना पड़ सकता है। उसके पास पैसा रखने और आयकर भरने का विकल्प नहीं है। सरकारी प्रणाली के तहत, कर्मचारी के पास केवल दो विकल्प है : 1- यात्रा और खर्च (और होटल, खाना आदि पर उसके द्वारा खर्च किए जाने हैं) या 2- अगर तारीख के भीतर दावा नहीं किया गया तो पात्रता छोड़ दें। अब 'यात्रा के अलावा किसी अन्य चीज पर खर्च' का एक तीसरा विकल्प भी दिया गया है। मौजूदा कोविड-19 के दौर में यात्रा करना स्वास्थ्य के लिहाज से जोखिम भरा है। रिपोर्ट में यह अनुमान लगाया गया है कि कर्मचारी जब अपने पैसे से कुछ खरीदेंगे तो कर्मचारी जीएसटी का भुगतान नहीं करेंगे और केवल इस वजह से इसे करेंगे क्योंकि योजना अप्रत्याशित है। हर कोई अपनी खपत पर जीएसटी का भुगतान करता है जब तक कि वह अवैध तरीके से कुछ खरीदने का फैसला न करे, इस तरह के चलन को सरकार अनुमति नहीं देती है और उम्मीद है कि ईटी भी प्रोत्साहित नहीं करना चाहता है। संयोग से, इस योजना के तहत पात्रता पूरे खर्च पर (यानी किराए में जीएसटी समेत) काम करती है। हैरानी की बात है कि उसी लेख में यह स्वीकार किया गया है कि 'केंद्र सरकार के कर्मचारी लॉकडाउन के कारण बचत के मामले में कम से कम प्रभावित हुए हैं और उन्हें वेतन का कोई नुकसान नहीं हुआ।' इस तरह से वे इस स्थिति में हैं कि एलटीसी मनी का प्रभावी ढंग से बड़ी छूट के तौर पर उपयोग कर अपने पसंद के सामान या सेवाओं पर खर्च को बढ़ा सकते हैं। जो वे खरीदना चाहते हैं उस पर खर्च भी कम होगा। कॉर्पोरेट क्षेत्र की प्रथाओं पर आधारित, सरकारी नियमों पर गलत तथ्यात्मक मान्यताओं के आधार पर बयानबाजी के सवाल बहस को समृद्ध नहीं करते हैं।

कमेंट करें
cd5eZ
NEXT STORY

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

जानिए भास्कर प्रॉपर्टी के बारे में:
भास्कर प्रॉपर्टी ऑनलाइन रियल एस्टेट स्पेस में तेजी से आगे बढ़ने वाली कंपनी हैं, जो आपके सपनों के घर की तलाश को आसान बनाती है। एक बेहतर अनुभव देने और आपको फर्जी लिस्टिंग और अंतहीन साइट विजिट से मुक्त कराने के मकसद से ही इस प्लेटफॉर्म को डेवलप किया गया है। हमारी बेहतरीन टीम की रिसर्च और मेहनत से हमने कई सारे प्रॉपर्टी से जुड़े रिकॉर्ड को इकट्ठा किया है। आपकी सुविधाओं को ध्यान में रखकर बनाए गए इस प्लेटफॉर्म से आपके समय की भी बचत होगी। यहां आपको सभी रेंज की प्रॉपर्टी लिस्टिंग मिलेगी, खास तौर पर जबलपुर की प्रॉपर्टीज से जुड़ी लिस्टिंग्स। ऐसे में अगर आप जबलपुर में प्रॉपर्टी खरीदने का प्लान बना रहे हैं और सही और सटीक जानकारी चाहते हैं तो भास्कर प्रॉपर्टी की वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं।

ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।