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कमरों में झाड़ू लगा टॉयलेट की सफाई करते हैं विद्यार्थी -नहीं है भृत्य और चौकीदार

कमरों में झाड़ू लगा टॉयलेट की सफाई करते हैं विद्यार्थी -नहीं है भृत्य और चौकीदार

डिजिटल डेस्क शहडोल/जैतपुर । विकासखण्ड गोहपारू अंतर्गत ग्राम देवरी नंबर 1 में संचालित शासकीय हायर सेकेण्डरी स्कूल प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार होकर रह गया है। दूरांचल स्थित इस शासकीय स्कूल में एक भी भृत्य और चौकीदार का पद स्वीकृत नहीं किया गया है। विद्यालय के बच्चों को कमरों में झाड़ू लगाने के साथ स्वयं ही टायलेट की सफाई करनी पड़ती है। क्लास लगने व छुट्टी की घंटी तक बच्चों को बजानी पड़ती है। साफ-सफाई का दिन शनिवार को निर्धारित किया गया है। विद्यालय को नया भवन बनाकर दिया गया लेकिन बाउण्ड्रीवाल का निर्माण नहीं कराया गया। न ही चौकीदार की व्यवस्था की गई। जिसके कारण स्कूल में कई बार चोरी हो चुकी है। पंखा और बिजली के तार गायब होते रहते हैं।
विद्यालय का संचालन वर्ष 2006 से किया गया था। हायर सेकेण्डरी के रूप में वर्ष 2018-19 में उन्नयन किया गया। कक्षा 9 से 12 वीं में वर्तमान में 293 छात्र संख्या दर्ज हैं। कक्षा 9 में सबसे ज्यादा 126 विद्यार्थी हैं। 10 वीं 60, 11 वीं में 42 तथा 12 वीं में 65 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। विद्यालय में शिक्षकों की कमी भी एक समस्या है। स्वीकृत 18 पदों में मात्र 4 पर नियमित टीचर हैं। 10 पदों पर अतिथि शिक्षकों से काम लिया जा रहा है।
विद्यालय में इस तरह की है समस्या
देवरी नंबर 1 स्कूल में बाउण्ड्रीवाल नहीं होने से पालतू व जंगली जनवरों का खतरा बना रहता है। नए भवन में 13 कमरे हैं, इनमें 8 में कक्षाएं संचालित होती हैं। कई कमरों में दरारें आनी शुरु हो गई हैं। अतिरिक्त कक्ष में बना टायलेट हैण्डओवर नहीं लिया गया क्योंकि उसमें गड्ढा दो फिट का ही बना है। विज्ञान के लैब हैं लेकिन शिक्षक नहीं होने के कारण बच्चे पै्रक्टिकल नहीं कर पाते। कम्प्यूटर शिक्षक नहीं होने से स्मार्ट क्लास नहीं लगती। एग्रीकल्चर के टीचर नहीं है। स्काउट गतिविधियां कभी कभार ही होती हैं। खेल मैदान नहीं होने के कारण गतिविधियां नहीं हो पातीं। 
इनका कहना है
-शिक्षकों की कमी है, नि
यमित शिक्षकों की पदस्थापना हो जाए तो बेहतर होगा। भृत्य व चौकीदार नहीं होने से सफाई व अन्य कार्य के लिए परेशान होना पड़ता है। विभाग में पत्राचार किया गया है।
-रामनरेश मौर्य, प्रभारी प्राचार्य
 

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।