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जबलपुर में देश की सबसे बड़ी गन की टेस्टिंग भी शुरू  


पहले सबसे बड़ी गन की महारत दिखाई, आज से टेस्टिंग भी एलपीआर में, साल में बचेंगे सौ करोड़
डिजिटल डेस्क जबलपुर ।
लॉन्ग प्रूफ रेंज (एलपीआर) खमरिया ने इतिहास रचा है। अभी तक 105 एमएम कैलिबर वाली गन्स के परीक्षण वाले एलपीआर में आज से देश की सबसे बड़ी गन की टेस्टिंग भी शुरू होने जा रही है। जबलपुर देश का ऐसा इकलौता शहर बनने जा रहा है, जहाँ धनुष जैसी गन का उत्पादन होता है, जहाँ की निर्माणियाँ सारंग जैसी बड़ी तोपों को अपग्रेड करने की काबिलियत रखती हैं और जहाँ इन गन्स का परीक्षण भी मुमकिन है। जीसीएफ और वीएफजे 155/45 सारंग और 155 /45 धनुष का तेजी से उत्पादन और अपग्रेडेशन में लगी हुई हैं। गौर करने वाली बात यह है कि इन दोनों का परीक्षण हाल-फिलहाल पीएक्सई बालासोर और सीपीई इटारसी में किया जाता रहा है। एलपीआर कमांडेंट ब्रिगेडियर निश्चय राउत के मार्गदर्शन में अब 155 एमएम कैलिबर की इन भारी भरकम गन्स का परीक्षण जबलपुर में ही संभव हो सका है। 
प्रोडक्शन से लेकर हैंडओवर तक 
 जबलपुर हमेशा से ही रक्षा मंत्रालय का एक बड़ा इंडस्ट्रियल कॉम्प्लेक्स रहा है। जानकारों का कहना है कि लंबी दूरी की गन्स की परीक्षण क्षमता विकसित होने की वजह से रक्षा उत्पाद क्षेत्र में यहाँ एक सुनहरा भविष्य हासिल हो सकेगा। जबलपुर की अहमियत अब इसलिए और भी बढ़ेगी, क्योंकि गन्स का उत्पादन यहीं होगा, इंस्पेक्शन भी यहीं होगा और एलपीआर में टेस्टिंग होने के बाद यहीं पर सेना को सौंपी जा सकेंगी।
टीम वर्क का नतीजा
डीजीक्यू की टीम के प्रयासों के कारण यह परीक्षण एलपीआर में ही मुमकिन हो सका। इससे तकरीबन 100 करोड़ की सालाना बचत हो सकेगी। गन्स का ट्रांसपोर्टेशन, मैन पॉवर की शिफ्टिंग नहीं करनी होगी और वक्त भी बचेगा। दूसरी ओर इससे आर्टिलरी के मीडियामाइजेशन प्रोग्राम को और गति मिलेगी।
बिग्रेडियर निश्चय राउत, कमांडेंट, एलपीआर
ऐसे होती है टेस्टिंग
*    एलपीआर में एक नया बट (बमों को सहन करने वाला आयताकार स्ट्रक्चर) बनाया गया है।  
*    इसमें उच्च क्वॉलिटी का कांक्रीट, आयरन सहित अन्य सामग्री का इस्तेमाल किया गया है।  
*    नया बट तकरीबन 50 फीट लंबा, 40 फीट चौड़ा है और करीब 40 फीट इसकी ऊँचाई है।  
*    फायरिंग साइड में स्ट्रक्चर के आगे बड़ी तादाद में रेत और अन्य मिश्रण रखे गए हैं।   
*    जैसे ही 155 एमएम का गोला गन से फायर होता है सबसे पहले रेत के संपर्क में आता है।  
*    कुछ फीट का सफर रेत के भीतर तय करते हुए आयुध स्ट्रक्चर तक पहुँच जाता है।  
*    फायरिंग के बाद गन के प्रेशर, वेलोसिटी, फायरिंग प्रोग्रेस जैसे कई पहलुओं की रीडिंग ली जाती है।पी-2 
 

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