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किसानों को बीमा कंपनी की जटिल शर्तों से छुटकारा दिलाने की कवायद

किसानों को बीमा कंपनी की जटिल शर्तों से छुटकारा दिलाने की कवायद

डिजिटल डेस्क, नागपुर। किसानों की समस्या सुनने व मार्गदर्शन करने का काम बीमा कंपनी के प्रतिनिधियों को करना होगा। तहसील स्तर पर कृषि अधिकारी के कार्यालय में बीमा कंपनी के प्रतिनिधि बैठेंगे और जिला स्तर पर बीमा कंपनी के कार्यालय में ही सुविधा केंद्र शुरू करने होंगे। फसल नुकसान की क्षतिपूर्ति के सख्त मानकों को शिथिल करने की मांग केंद्र से की जाएगी। क्षतिपूर्ति देते समय अधिकतम उत्पादन को ध्यान में रखने की भी सरकार की योजना है। किसानों को क्षतिपूर्ति देते समय तरह-तरह के अड़ंगे डालने का आरोप अक्सर बीमा कंपनियों पर लगते रहता है। फसल का नुकसान होने पर पूरे मंडल में फसल बर्बाद होने का पैमाना लगाया जाता है। इसी तरह क्षतिपूर्ति का पैमाना उत्पादन के 70 फीसदी तक माना जाता है। इन जटिल शर्तों से किसानों को मुक्ति देने की दिशा में कृषि विभाग ने कदम उठाना शुरू कर दिया है।

कृषि विभाग का कर्मचारी भी रहेगा तैनात

किसान राहत या क्षतिपूर्ति मांगने अब बीमा कंपनी की चौखट तक नहीं जाएंगे। जिले की हर तहसील में कृषि अधिकारी के कार्यालय में किसानों के लिए सुविधा केंद्र खुलेंगे। यहां बीमा कंपनी का प्रतिनिधि बैठेगा और किसानों की समस्या सुनेंगे। जिला स्तर बीमा कंपनी के कार्यालय में सुविधा केंद्र शुरू होगा। यहां बीमा प्रतिनिधि के साथ कृषि विभाग का कर्मचारी भी तैनात रहेगा। बीमा प्रतिनिधि सुविधा केंद्र में बैठा है या नहीं यह सुनिश्चित करने के लिए एक सॉफ्टवेयर तैयार होगा, जो प्रतिनिधि की हाजिरी का रिकार्ड रखेगा। फसल नुकसान होने पर गत सात वर्ष में अधिकतम उत्पादन के हिसाब से क्षतिपूर्ति तय करने की मांग कृषि विभाग केंद्र सरकार से करेगा। उत्पादन के 90 फीसदी तक क्षतिपूर्ति देने की मांग केंद्र से की जाएगी। जिन किसानों ने फसल बीमा कराया है, उन्हें मोबाइल पर मराठी में एसएमएस भी कंपनी की तरफ से भेजा जाएगा। किसानों को बीमा कंपनियों के जटिल नियमों से राहत देने की यह कोशिश है। 

तहसील में शुरू हुआ केंद्र 

तहसील स्तर पर किसानों के लिए सुविधा केंद्र शुरू किया गया है और शीघ्र ही बीमा कंपनी का प्रतिनिधि भी वहां बैठेगा। जिला स्तर पर यानी शहर में शीघ्र ही बीमा कंपनी के कार्यालय में सुविधा केंद्र शुरू होगा। कृषि अधिकारी व बीमा प्रतिनिधि मिलकर किसानों की समस्या सुनेंगे। कई जटिल नियमों को शिथिल करने की दिशा में विभाग की तरफ से प्रयास हो रहे हैं। बीमा कर चुके किसानों के मोबाइल पर एसएमएस करने का काम शुरू किया जाएगा। किसानों के हित में कई तरह की सिफारिशें व मांग पत्र केंद्र को भेजने की सरकार की योजना है। - मिलिंद शेंडे, अधीक्षक जिला कृषि अधिकारी कार्यालय नागपुर
 

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Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

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डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

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ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।