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राज्य स्तरीय 'इंद्रधनुष' प्रोग्राम के लिए यूनिवर्सिटी को मिले 380 आवेदन

राज्य स्तरीय 'इंद्रधनुष' प्रोग्राम के लिए यूनिवर्सिटी को मिले 380 आवेदन

डिजिटल डेस्क, नागपुर। यूनिवर्सिटी को राज्य स्तरीय अंतर विश्वविद्यालय "इंद्रधनुष' सांस्कृतिक स्पर्धा में हिस्सा लेने के लिए 380 विद्यार्थियों के आवेदन मिले हैं। ये आवेदन पिछले तीन दिन में आए हैं। इसके पूर्व यूनिवर्सिटी को प्रतियोगिता के लिए कोई एंट्री नहीं आई थी, जिससे इस राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में यूनिवर्सिटी का प्रतिनिधित्व शून्य होने की नौबत आ गई थी। दैनिक भास्कर द्वारा इस विषय को प्रमुखता से उठाने के बाद प्रतियोगिता को प्रतिसाद मिला है। अब 12 अक्टूबर से यूनिवर्सिटी सिलेक्शन ट्रायल शुरू करने जा रहा है। ट्रायल में चयनित विद्यार्थियों को नवंबर- दिसंबर में होने वाली राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में यूनिवर्सिटी की अधिकारिक एंट्री के रूप में भेजा जाएगा। 

यूनिवर्सिटी ने ली राहत की सांस
उल्लेखनीय है कि इस प्रतियोगिता में क्लासिकल वोकल सोलो, लाइट वोकल, इंस्ट्रूमेंटल, वेस्टर्न, डिबेट, क्विज, क्लासिकल डांस, एकांकी अभिनय, मिमिक्री, ऑन स्पॉट पेंटिंग, पोस्टर मेकिंग, कोलाज, कार्टूनिंग, क्ले मॉडलिंग, रंगोली और स्पॉट फोटोग्राफी जैसी ढेरों प्रतियोगिताएं होंगी, जिसमें विद्यार्थी अपनी कला दिखा सकते हैं।  इस राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में विश्वविद्यालय की सांस्कृतिक टीम विविध 26 सांस्कृतिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेता है। कुल 40 कलाकार विद्यार्थी और उनकी टीम इसमें हिस्सा लेती है।  इसमें संगीत, नृत्य, नाटक, साहित्यिक और ललित कला की प्रतियोगिताएं आयोजित की गई हैं। यूनिवर्सिटी के विद्यार्थी कल्याण विभाग ने 19 सितंबर को सभी विभागों और संलग्नित कॉलेजों को पत्र लिख कर विद्यार्थियों को इसकी जानकारी देने को कहा था, लेकिन 5 अक्टूबर डेडलाइन को तीन दिन पहले तक कोई एंट्री नहीं आने से विश्वविद्यालय प्रशासन की चिंता बढ़ गई थी। आखिर के दो दिन में पर्याप्त आवेदन आने के बाद विवि ने राहत की सांस ली है।

155 विद्यार्थियों को काम मिलेगा...160 वेटिंग में
राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय ने इस वर्ष की "अर्न एंड लर्न' योजना के तहत 155 विद्यार्थियों को पार्ट टाइम काम देने का निर्णय लिया है। इन विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय के 46 शैक्षणिक व प्रशासनिक विभागों में ही नियुक्त किया जाएगा। ये विद्यार्थी पढ़ाई के साथ साथ ये काम भी करेंगे। विश्वविद्यालय को इस वर्ष करीब 315 विद्यार्थियों के आवेदन प्राप्त हुए थे। यूनिवर्सिटी ने अर्न एंड लर्न योजना के लिए 21 सितंबर से 26 सितंबर तक आवेदन मंगवाए थे। यह विद्यार्थी एक दिन में करीब 3 घंटे काम कर पाएंगे। इन्हें प्रतिघंटे काम के 50 रुपए मानदेय दिया जाएगा।

दरअसल यूनिवर्सिटी  में बड़ी संख्या में आर्थिक रूप से कमजोर तबके के विद्यार्थी भी पढ़ते हैं।  उन्हें आर्थिक सहयोग करने की दृष्टि से यह योजना चलाई जाती है।  इसके तहत यूनिवर्सिटी कैंपस या संचालित कॉलेज के ही किसी विभाग में विद्यार्थी को पार्टटाइम काम दिया जाता है। इससे विद्यार्थी को पढ़ाई के साथ कुछ आमदनी भी हो  जाती है।  विश्वविद्यालय के विद्यार्थी कल्याण विभाग ने इस योजना को विस्तार देकर अगले वर्ष से यह योजना कॉलेजों में भी शुरू करने की तैयारी की है। विश्वविद्यालय को मालूम है कि, कॉलेजों में भी कई गरीब बच्चे पढ़ते हैं, जिन्हें इस प्रकार की योजना की जरूरत है। ऐसे में यूनिवर्सिटी ने इस योजना को कॉलेज स्तर पर ले जाने का निर्णय लिया है। अभी इसकी तैयारी शुरू की गई है, लेकिन इसे लागू करने में वक्त लगेगा। संभव है, शैक्षणिक सत्र 2021-22 में कॉलेज स्तर पर अर्न एंड लर्न योजना शुरू होगी।

डिप्लोमा कोर्स में 15 तक प्रवेश, 5 हजार स्टायपेंड
यूनिवर्सिटी ने अपने तुकड़ोजी महाराज अध्यासन केंद्र में ‘ग्राम सेवाव्रती’ नामक एक वर्षीय डिप्लोमा कोर्स शुरू करने का निर्णय लिया है। हाल ही में विश्वविद्यालय ने इस संदर्भ में नोटिफिकेशन जारी किया है। इसके मुताबिक पाठ्यक्रम में 15 अक्टूबर तक प्रवेश दिए जाएंगे। पाठ्यक्रम में कुल 20 सीटें होंगी। यदि विद्यार्थी की उम्र 30 वर्ष से कम हो, तो उसे प्रतिमाह 5 हजार रुपए स्टायपेंड दिया जाएगा। पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए 2000 रुपए-ओपन और 500 रुपए आरक्षित प्रवर्ग की फीस रखी गई है। यह कोर्स वार्षिक पैटर्न का होगा, इसमें प्रवेश लेने वाले सभी विद्यार्थियों के लिए नियमित उपस्थिति, असाइनमेंट और फील्ड वर्क जरूरी होगा। इसके अलावा पाठ्यक्रम में प्रवेश लेने वाले 10 विद्यार्थियों को यूनिवर्सिटी के भरत नगर स्थित नेल्सन मंडेला छात्रावास में सामान्य दरों पर एडमिशन भी दिया जाएगा।  पाठ्यक्रम से जुड़ी अधिक जानकारी के लिए विद्यार्थी विवि के कैंपस स्थित ग्रामगीता भवन में संपर्क कर सकते हैं।

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क्या है ड्रोन ? देश की सुरक्षा के लिए कितना घातक हो सकता है, जानें सबकुछ

क्या है ड्रोन ? देश की सुरक्षा के लिए कितना घातक हो सकता है, जानें सबकुछ

डिजिटल डेस्क, श्रीनगरजम्मू कश्मीर की सीमा के आसपास ड्रोन की हलचलें लगातार तेज होती जा रही हैं। इसके बाद भारत ने भी ये मुद्दा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाया है कि ड्रोन की इस तरह की गतिविधियां न सिर्फ भारत बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सुरक्षा के दृष्टिकोण से घातक साबित हो सकती हैं। इस हमले के बाद से भारत में ड्रोन के इस्तेमाल को लेकर बहस छिड़ गई है। इस रिपोर्ट में जानिए आखिर ड्रोन है क्या और यह कैसे ऑपरेट होते हैं? इसके इस्तेमाल और इससे क्या नुकसान हो सकता है और देश में ड्रोन्स को उड़ाने को लेकर सरकार की क्या गाइडलाइन्स हैं।

ड्रोन क्या होता है?
ड्रोन्स को UAV यानी Unmanned aerial vehicles या RPAS यानी Remotely Piloted Aerial Systems भी कहा जाता है। आम बोल चाल वाली भाषा में इसे मिनी हैलिकॉप्टर भी कहते हैं। अक्सर शादी के दौरान फोटोग्राफी के लिए आपने ड्रोन का इस्तेमाल होते हुए देखा होगा। यह एक ऐसा यंत्र है, जिसमें एचडी कैमरे, ऑनबोर्ड सेंसर और जीपीएस लगा होता है। इसे नियंत्रित करने के लिए एक सॉफ्टवेयर की आवश्यकता होती है। इसके चारों और 4 रोटर्स लगे होते हैं, जिनकी मदद से यह आसमान में ऊंचा उड़ने में सक्षम होता है। एक ड्रोन का वजन 250 ग्राम से लेकर 150 किलोग्राम से भी ज्यादा हो सकता है।

ड्रोन को उड़ाने के लिए सॉफ्टवेयर, जीपीएस और रिमोट की आवश्यकता होती है। रिमोट के जरिए ही ड्रोन को ऑपरेट और कंट्रोल कर सकते हैं। ड्रोन पर लगे रोटर्स की गति को रिमोट की जॉयस्टिक के जरिए कंट्रोल किया जाता है। वहीं, जीपीएस दिशाएं बताता हैं, जीपीएस दुर्घटना होने से पहले ही ऑपरेटर को चेतावनी भेज देता है। 

ड्रोन हमले किस तरह से हो सकते हैं?
ड्रोन का इस्तेमाल कई देशों की सेनाएं कर रही हैं, क्योंकि ये साइज में छोटे होते हैं इसलिए रडार की पकड़ में आसानी से नहीं आ पाते हैं, साथ ही दुर्गम इलाकों में भी गुपचुप घुसपैठ कर सकते हैं। यही कारण है कि सेना में इनका इस्तेमाल बढ़ने लगा है।ड्रोन हमले दो प्रकार से संभव हैं। एक तरीका ये है कि ड्रोन में हथियार या विस्फोटक लगा दिए जाते हैं और ड्रोन इन हथियारों या विस्फोटक को लक्ष्य पर ड्रॉप कर देता है। ड्रोन से हमले का दूसरा तरीका है ड्रोन को खुद ही एक विस्फोटक में बदल दिया जाए। 

कितने घातक हो सकते हैं ड्रोन हमले?
ये ड्रोन के प्रकार और पेलोड पर निर्भर है। पेलोड मतलब ड्रोन कितना वजन अपने साथ लेकर उड़ सकता है। ड्रोन की पेलोड क्षमता जितनी ज्यादा होगी वो अपने साथ उतनी ज्यादा मात्रा में विस्फोटक सामग्री लेकर उड़ सकता है। अमेरिका के MQ-9 रीपर ड्रोन अपने साथ 1700 किलो तक वजन ले जाने में सक्षम हैं।

ड्रोन से अबतक के बड़े हमले
2020 में अमेरिका ने ईरानी मेजर जनरल सुलेमानी को मार गिराया था। इससे पहले 2019 में यमन के हूती विद्रोहियों ने साऊदी अरब की अरामको ऑयल कंपनी पर ड्रोन हमला किया था। पाकिस्तान के वजीरिस्तान में 2009 के दौरान एक ड्रोन हमले में 60 लोग मारे गए थे।

देश में ड्रोन्स के इस्तेमाल को लेकर गाइडलाइन्स 
देश में नागरिक उड्डयन मंत्रालय(Ministry of Civil Aviation) ने ड्रोन उड़ाने पर कई तरह के प्रतिबंध लगा रखे हैं। ड्रोन के वजन और साइज के अनुसार इन प्रतिबंधों को कई वर्ग में बांटा गया है।

1.नेनो ड्रोन्स- इसको उड़ाने के लिए लाइसेंस की आवश्यकता नहीं पड़ती।

2.माइक्रो ड्रोन्स- इसको उड़ाने के लिए UAS Operator Permit-I से अनुमति लेनी पड़ती है और ड्रोन पायलट को SOP(Standard operating procedure) का पालन करना होता है। 

इनसे बड़े ड्रोन उड़ाने के लिए डीजीसीए से परमिट(लाइसेंस ) की आवश्यकता होती है। अगर आप किसी प्रतिबंधित जगह पर ड्रोन उड़ाना चाहते हैं तो इसके लिए भी आपको डीजीसीए से अनुमति लेनी पड़ेगी। बिना अनुमति के ड्रोन उड़ाना गैरकानूनी है और इसके लिए ड्रोन ऑपरेटर पर भारी जुर्माने का भी प्रावधान है।

ड्रोन उड़ाने के लिए प्रतिबंधित जगह

  • मिलिट्री एरिया के आसपास या रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इलाका।
  • इंटरनेशनल एयरपोर्ट के 5 किलोमीटर और नेशनल एयरपोर्ट के 3 किलोमीटर का दायरा।
  • इंटरनेशनल बॉर्डर के 25 किलोमीटर का दायरा ।
  • इसके अलावा ड्रोन की कैटेगरी को मद्देनजर रखते हुए इन्हें कितनी ऊंचाई तक उड़ाया जा सकता है वो भी निर्धारित है।

ड्रोन उड़ाने के लिए जरूरी हैं लाइसेंस
नैनो ड्रोन्स को छोडकर किसी भी तरह के ड्रोन्स को उड़ाने के लिए लाइसेंस या परमिट की जरूरत पड़ती है।ड्रोन उड़ाने के लिए लाइसेंस दो कैटेगरी के अंतर्गत दिए जाते हैं, जिसमें पहला है स्टूडेंट रिमोट पायलट लाइसेंस और दूसरा है रिमोट पायलट लाइसेंस।इन दोनों लाइसेंस को प्राप्त करने के लिए ड्रोन ऑपरेटर की न्यूनतम उम्र 18 साल और अधिकतम 65 साल होनी चाहिए। लाइसेंस के लिए ऑपरेटर कम से कम 10वीं पास या 10वीं क्लास के बराबर उसके पास किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से डिग्री होना अति आवश्यक हैं।आवेदन करने वाले व्यक्ति को डीजीसीए स्पेसिफाइड मेडिकल एग्जामिनेशन भी पास करना जरूरी है। लाइसेंस के लिए बैकग्राउंड भी चेक होता है।

जुर्माने का प्रावधान

  • बिना लाइसेंस उड़ाने पर 25000 रुपए का जुर्माना।
  • नो-ऑपरेशन जोन यानी प्रतिबंधित क्षेत्र में उड़ान भरने पर 50000 रुपए का जुर्माना।
  • ड्रोन का थर्ड पार्टी बीमा ना होने पर 10000 रुपए का जुर्माना लग सकता है।