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रिवैल्यूएशन फीस लौटाने के लिए यूनिवर्सिटी ने गठित की समिति

रिवैल्यूएशन फीस लौटाने के लिए यूनिवर्सिटी ने गठित की समिति

डिजिटल डेस्क, नागपुर।  रिवैल्यूएशन (पुनर्मूल्यांकन) में पास होने वाले विद्यार्थियों को परीक्षा शुल्क लौटाने के लिए राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय ने प्र-कुलगुरु डॉ. विनायक देशपांडे की अध्यक्षता में एक विशेष समिति का गठन किया है। वर्ष 2016 में कुलगुरु डॉ. सिद्धार्थविनायक काणे ने विद्यार्थियों के लिए एक निर्णय लिया था, लेकिन महज यह घोषणा बन कर रह गई थी। कुलगुुरु के आदेश के बाद भी निर्णय लागू नहीं होने पर पूर्व में खासा विवाद गर्माया है। 6 मार्च की सीनेट सभा में भी यह विषय उठने की पूरी संभावना है। विवाद बढ़ता देख आखिरकार यूनिवर्सिटी ने कार्यान्वयन के लिए समिति गठित की है। इसमें प्र-कुलगुरु के अलावा कुलसचिव नीरज खटी, वित्त व लेखा अधिकारी डॉ. राजू हिवसे और परीक्षा नियंत्रक डॉ. प्रफुल्ल साबले का भी समावेश है। जल्द ही शुल्क लौटाने के प्रस्ताव को मैनेजमेंट काउंसिल में रखा जाएगा। इसके बाद  यूनिवर्सिटी का वित्त व लेखा विभाग इसे अंतिम रूप देगा। 

75 % शुल्क लौटाने पर विचार
शुल्क लौटाने को लेकर समिति की बैठक हो चुकी है। एक विचार यह भी चल रहा है कि, रिवैल्यूएशन की प्रक्रिया में यूनिवर्सिटी  का अच्छा खासा पैसा और समय लगता है। ऐसे में विद्यार्थी को पूरा शुल्क लौटा देना सही नहीं है। ऐसे में विद्यार्थी को 75 प्रतिशत शुल्क लौटा कर शेष 25 प्रतिशत शुल्क राशि से यूनिवर्सिटी अपना रिवैल्यूएशन का कामकाज चलाएगा।

3 वर्ष में वसूला 3.30 कराेड़ का शुल्क
उल्लेखनीय है कि, नागपुर विश्वविद्यालय ग्रीष्मकालीन और शीतकालीन परीक्षा सत्र आयोजित करता है। जिसमें करीब साढे तीन लाख विद्यार्थी शामिल होते हैं। अपने रिजल्ट से संतुष्ट नहीं होने पर विद्यार्थी पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन करते हैं। यह संख्या काफी बड़ी है।  यूनिवर्सिटी के वित्त व लेखा विभाग के आंकड़ों के अनुसार विश्वविद्यालय ने पुनर्मूल्यांकन के नाम पर वर्ष 2018-19 में कुल 1 करोड़ 66 लाख 92 हजार 737 रुपए वसूल किए। इसके पूर्व वर्ष 2017-18 में 1 करोड़ 15 लाख 53 हजार 657 रुपए वसूले गए। इसके पूर्व वर्ष 2016-17 में पुनर्मूल्यांकन शुल्क के नाम पर विद्यार्थियों से कुल 47 लाख 66 हजार 404 रुपए विश्वविद्यालय के खाते में गए हैं।
 

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