दैनिक भास्कर हिंदी: राजस्थान के पाली में हनुमान जयंती पर सांप्रदायिक हिंसा, 5 गंभीर घायल

April 1st, 2018

डिजिटल डेस्क, पाली। राजस्थान के पाली ज़िले के जैतारण क्षेत्र में शनिवार को हनुमान जयंती शोभा यात्रा के दौरान हिंसक घटना हो गई। इस हिंसा में पांच लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। इस दौरान कुछ दुकानों में आग लगा दी गई और वाहनों को भी नुकसान पहुंचाया गया। पुलिस के मुताबिक जैतारण कस्बे में स्थिति नियंत्रण में है लेकिन तनाव को देखते हुए कुछ क्षेत्रों में कर्फ्यू लगा दिया गया है। पुलिस ने कुछ लोगों को गिरफ़्तार भी किया है। बता दें कि यह हिंसा हिंदू और मुसलमान समुदाय के लोगों के बीच हुई है। 

 

उपद्रवियों ने जलाईं दुकानें

बता दें कि जैतारण में हनुमान जयंती के दौरान झांकियों के साथ एक बड़ी शोभा यात्रा निकाली जा रही थी। जब एक समाज का धार्मिक स्थान आया और आपस में झगड़ा हो गया। जिसके बाद कुछ दंगाईयों ने बस स्टैंड के पास चाय की दुकान और ठेलों तक को लोगों ने आग के हवाले कर दिया। वहीं प्रशासन ने अतिरिक्त पुलिस फोर्स मंगाकर भीड़ पर काबू पाया। 

इलाके में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था

बता दें कि जैतारण में कर्फ्यू जैसे हालात हो गए हैं। प्रशासन ने इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी हैं। जोधपुर पुलिस रेंज के महानिरीक्षक हवा सिंह घुमरिया ने बताया कि जैतारण कस्बे में शनिवार दोपहर बाद हनुमान जयंती शोभायात्रा निकाली जा रही थी, जब शोभायात्रा मुख्य बाज़ार से गुजर रही थी तभी कुछ लोगों ने पथराव शुरू कर दिया। इसके बाद हिंसा शुरू हो गई। इलाके में हिंसा के मद्देनजर सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त कर दिए गए हैं। इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल को भी तैनात किया गया है। पुलिस हालात पर नजर बनाए हुए है। 

 


बता दें कि शोभायात्रा के पहले पुलिस प्रशासन ने दोनों पक्षों के साथ बातचीत भी की थी। वहीं, राज्य के गृह मंत्री ग़ुलाब चंद कटारिया ने बताया कि कुछ हिंसक घटनाओं के बाद जैतारण में कर्फ्यू लगाया गया है। जिलाधिकारी सुधीर कुमार शर्मा ने बताया कि स्थिति पर नियंत्रण करने के लिए इलाके में सीआरपीसी की धारा 144 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी गई है।  

 

पहले भी हो चुके हैं दंगे

घटना की सूचना मिलते ही मंत्री सुरेंद्र गोयल भी पहुंच गए, पुलिस प्रशासन के अनुसार अब हालात काबू में हैं। जैतारण कस्बा शुरू से ही सांप्रदायिक विवाद के लिए जाना जाता है। इससे पहले भी पांच से छह बार वहां सांप्रदायिक दंगे हो चुके हैं। संवेदनशील इलाका होने के बावजूद इस बार हनुमान जयंती के जुलूस के दौरान पुलिस बल काफी कम था, इसी वजह से दोनों समुदायों को जुलूस के दौरान आमने-सामने होने का मौका मिल गया।