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19 साल पहले इस क्रिकेटर ने 212 गेंदों में जड़ी थी डबल सेंचुरी, रचा था इतिहास, जो तीन हफ्ते बाद ही टूट गया 

19 साल पहले इस क्रिकेटर ने 212 गेंदों में जड़ी थी डबल सेंचुरी, रचा था इतिहास, जो तीन हफ्ते बाद ही टूट गया 

हाईलाइट

  • 2002 में 22 से 26 फरवरी के बीच जोहान्सबर्ग में आस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका के बीच टेस्ट मैच खेला गया था।
  • एडम गिलक्रिस्ट की शानदार पारी के लिए याद किया जाता है।
  • गिलक्रिस्ट ने 19 चौकों और 8 छक्कों की मदद से 204 रन की पारी खेली

डिजिटल डेस्क (भोपाल)। 19 साल पहले 2002 में  22 से 26 फरवरी के बीच जोहान्सबर्ग में आस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका के बीच टेस्ट मैच खेला गया था। यह मैच आस्ट्रेलिया के मशहूर विकेटकीपर एडम गिलक्रिस्ट की शानदार पारी के लिए याद किया जाता है। उन्होंने उस समय महज 212 गेंदों में सबसे तेज दोहरा शतक बनाने का रिकार्ड अपने नाम किया था। हालांकि, यह रिकार्ड तीन हफ्ते बाद ही न्यूजीलैंड के नाथन एस्टल ने इंग्लैंड के खिलाफ 222 रन की पारी खेलकर तोड़ दिया था। 

मैच में जब एडम गिलक्रिस्ट बल्लेबाजी करने उतरे तो उनकी टीम पहले ही बहुत बढ़ा स्कोर खड़ा कर चुकी थी। फिर भी उन्होंने डेमियन मार्टिन के साथ लगबग 300 रन की पार्टनरशिप की। गिलक्रिस्ट ने 19 चौकों और 8 छक्कों की मदद से 204 रन की पारी खेली और वह नाबाद लौटे। क्योंकि आस्ट्रेलिया ने अपनी पहली पारी 652/7 रन पर घोषित कर दी थी। एक समय जब गिलक्रिस्ट 169 रन के स्कोर पर थे, तब उन्होंने एक ऐसा छक्का मारा जो विज्ञापन होर्डिंग से कुछ फीट पहले ही गिरा। दरअसल, यह होर्डिंग स्टेडियम के बाहर लगा था और इसे छूना उस समय गोल्ड जीतने जैसा था। 

दक्षिण अफ्रीकी का गेंदबाजी आक्रमण बहुत मजबूत था, लेकिन गिलक्रिस्ट के आगे किसी की नहीं चली। शॉन पोलाक से लेकर एलन डोनाल्ड तक को एडम गिलक्रिस्ट ने बुरी तरह धोया। इसके बाद जब दक्षिण अफ्रीका की टीम खेलने उतरी तो पहली पारी में 159 रन और दूसरी पारी में महज 133 रन बना सकी। यह दक्षिण अफ्रीकी की सबसे बड़ी हार थी। ऑस्ट्रेलिया ने एक पारी और 360 रनों से जीत दर्ज की थीं। 

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।