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IPL के अगले सीजन में अब 'नो बॉल' चेक करने के लिए होगा स्पेशल अंपायर

IPL के अगले सीजन में अब 'नो बॉल' चेक करने के लिए होगा स्पेशल अंपायर

हाईलाइट

  • IPL 2020 में अब 'नो बॉल' चेक करने के लिए होगा स्पेशल अंपायर
  • स्पेशल अंपायर की आवश्यकता IPL के पिछले सीजन में ‘नो बॉल’ विवादों को देखते हुए पड़ी

डिजिटल डेस्क। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) मुख्यालय में मंगलवार को भारत के पूर्व बल्लेबाज बृजेश पटेल की अध्यक्षता में इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) गवर्निग काउंसिल की बैठक हुई। इस बैठक में IPL 2020 सीजन में 'पावर प्लेयर' और ‘नो बॉल’ को देखने के लिए स्पेशल अंपायर को लेकर चर्चा हुई। हालांकि बैठक में पॉवर प्लेयर को लेकर किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा जा सका और अब भविष्य में इस पर और चर्चा होगी। वहीं IPL के अगले सीजन में ‘नो बॉल’ के लिए स्पेशल अंपायर के फैसले को बैठक में सभी ने स्वीकार किया। हालांकि यह अभी भी स्पष्ट नहीं है कि, ‘नो बॉल’ के लिए स्पेशल अंपायर तीसरा या चौथा अंपायर, या पूरी तरह से अंपायरिंग टीम में एक नया मेंबर होगा। 

इस नियम की आवश्यकता IPL के पिछले सीजन में फील्ड अंपायर द्वारा ‘नो बॉल’ पर दिए गलत फैसलों पर हुए विवादों को देखते हुए पड़ी है। जिसके कारण कई टीमों ने अपने जीते हुए मैच हारे थे। ऐसा ही एक मैच पिछले सीजन में रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर और मुंबई इंडियंस के बीच हुआ था। जिसमें RCB के कप्तान विराट कोहली की भारतीय अंपायर एस रवि से बहस भी हो गई थी। अंपायर एस रवि ने इस मैच के दौरान मुंबई इंडियंस के लसिथ मलिंगा की नो बॉल नहीं देख पाए थे, जिसके कारण रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) मैच हार गई थी। 

कोहली ने मैच के बाद के प्रेजेंटेशन सेरेमनी में कहा था, हम आईपीएल स्तर पर खेल रहे हैं। यह क्लब स्तर का नहीं है, अंपायरों की आंखें खुली होनी चाहिए। यह एक बड़ी नो-बॉल थी। यहां तक ​​कि मुंबई टीम के कप्तान रोहित शर्मा ने भी मैच के दौरान अंपायरिंग के स्तर पर चिंता व्यक्त की थी।

गवर्निंग काउंसिल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बैठक के बाद संवाददाताओं से कहा, अब आईपीएल के अगले सीजन में आप नियमित अंपायरों के अलावा एक और स्पेशल अंपायर को देख सकते हैं। जो केवल नो-बॉल चेक करने पर ध्यान देगा। यह फैसला अजीब लग रहा है, लेकिन यह बैठक में हुई चर्चा के बीच था।

अधिकारी ने कहा, "हम टेक्नोलॉजी का उपयोग करना चाहते हैं। हम केवल नो-बॉल पर ध्यान देने के लिए एक और अंपायर रखना चाहते हैं। एक स्पेशल अंपायर होगा, जो केवल नो-बॉल पर केंद्रित होगा और और फिर थर्ड और फोर्थ अंपायर नहीं होगा। IPL में इस कॉन्सेप्ट को लागू करने से पहले इसे प्रायोगिक तौर पर घरेलू टूर्नमेंटों में आजमाया जाएगा।

अधिकारी ने कहा कि 'स्पेशल अंपायर' को किसी भी टूर्नामेंट में आजमाया जा सकता है, यहां तक कि रणजी ट्रॉफी में भी। यह पूछे जाने पर कि आईपीएल की नीलामी कब होगी, उन्होंने कहा कि नीलामी 19 दिसंबर को कोलकाता में होगी।

दूसरी तरफ 'पावर प्लेयर' के बारे में अधिकारी ने कहा कि, इस पर कोई भी अंतिम फैसला लेने से पहले आगे इस पर और ज्यादा विचार किया जाएगा। इस नियम के तहत टीम मैच में कभी भी विकेट गिरने के बाद या ओवर खत्म के बाद खिलाड़ी को बदल सकती है। उन्होंने कहा, आगामी सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में इस नियम को लागू करना सही होता। लेकिन सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में इस प्रयोग के लिए अब समय नहीं बचा है। सीधे आईपीएल में इसका प्रयोग करने से पहले हमें इस पर और ज्यादा चर्चा करना होगा।

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।