comScore

© Copyright 2019-20 : Bhaskarhindi.com. All Rights Reserved.

क्रिकेट: युवराज बोले- धोनी और कोहली ने नहीं दिया गांगुली जितना साथ

क्रिकेट: युवराज बोले- धोनी और कोहली ने नहीं दिया गांगुली जितना साथ

हाईलाइट

  • युवराज ने कहा कि, मुझे धोनी और कोहली की तुलना में सौरव से बहुत ज्यादा सपोर्ट मिला
  • युवराज ने 2000 में चैंपियंस ट्रॉफी में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ गांगुली की कप्तानी में डेब्यू किया था

डिजिटल डेस्क। भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व ऑलराउंडर युवराज सिंह ने कहा कि, मुझे एमएस धोनी और विराट कोहली की तुलना में सौरव गांगुली से बहुत ज्यादा सपोर्ट मिला है। युवराज ने 2000 में चैंपियंस ट्रॉफी में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ गांगुली की कप्तानी में डेब्यू किया था और अपने 17 साल के लंबे करियर में अलग-अलग समय में राहुल द्रविड़, वीरेंद्र सहवाग, गौतम गंभीर, धोनी और कोहली की कप्तानी में भी खेले हैं।

38 साल के युवराज ने स्पोर्टस्टार को दिए इंटरव्यू में कहा, मैं सौरव की कप्तानी में खेला और मुझे उनसे बहुत सपोर्ट मिला। उसके बाद माही ने टीम की कप्तानी संभाली। मुझे सौरव और माही के बीच किसी एक को चुनना मुश्किल है। लेकिन सौरव के समय की मेरे पास ज्यादा यादें हैं, क्योंकि उन्होंने मुझे सबसे ज्यादा सपोर्ट किया है। मुझे वैसा सपोर्ट माही और कोहली से नहीं मिला। युवराज हालांकि धोनी की कप्तानी में 2011 वर्ल्ड कप के 'प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट' रहे थे।  

यह खबर भी पढ़ें - कोरोनावायरस: BCCI अधिकारी ने कहा, टी-20 वर्ल्ड कप स्थगित होने पर अक्टूबर-नवंबर के बीच हो सकता है IPL

युवराज ने गांगुली की कप्तानी में 110 वनडे मैच खेले
पूर्व भारतीय ऑलराउंडर युवराज ने 304 वनडे मैच खेले हैं। जिसमें से उन्होंने गांगुली की कप्तानी में 110 और धोनी के नेतृत्व में 104 मैच खेले। बाएं हाथ के खिलाड़ी का मानना ​​है कि, मौजूदा भारतीय टीम को एक "अच्छे कोच" की आवश्यकता है, जो खिलाड़ियों से उनके ऑफ-फील्ड मुद्दों के बारे में बात कर सके ताकि मैदान पर उनका प्रदर्शन बेहतर हो सके।

यह खबर भी पढ़ें - Coronavirus: रोहित शर्मा ने दी 80 लाख रुपये की सहायता राशि, बोले- हमें देश को वापस पैरों पर लाना होगा

टीम को पैडी अप्टन जैसे किसी की जरूरत
पिछले साल संन्यास ले चुके युवराज ने कहा कि, विराट कोहली की अगुवाई वाली टीम को पैडी अप्टन जैसे किसी की जरूरत है, जो खिलाड़ियों से जीवन और अन्य ऑफ-फील्ड मुद्दों पर बात कर सके। अप्टन ने गैरी कर्स्टन के कार्यकाल के दौरान भारतीय क्रिकेट टीम के मानसिक स्वास्थ्य और कंडीशनिंग कोच के रूप में काम किया था।

कमेंट करें
DSoYs
NEXT STORY

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

जानिए भास्कर प्रॉपर्टी के बारे में:
भास्कर प्रॉपर्टी ऑनलाइन रियल एस्टेट स्पेस में तेजी से आगे बढ़ने वाली कंपनी हैं, जो आपके सपनों के घर की तलाश को आसान बनाती है। एक बेहतर अनुभव देने और आपको फर्जी लिस्टिंग और अंतहीन साइट विजिट से मुक्त कराने के मकसद से ही इस प्लेटफॉर्म को डेवलप किया गया है। हमारी बेहतरीन टीम की रिसर्च और मेहनत से हमने कई सारे प्रॉपर्टी से जुड़े रिकॉर्ड को इकट्ठा किया है। आपकी सुविधाओं को ध्यान में रखकर बनाए गए इस प्लेटफॉर्म से आपके समय की भी बचत होगी। यहां आपको सभी रेंज की प्रॉपर्टी लिस्टिंग मिलेगी, खास तौर पर जबलपुर की प्रॉपर्टीज से जुड़ी लिस्टिंग्स। ऐसे में अगर आप जबलपुर में प्रॉपर्टी खरीदने का प्लान बना रहे हैं और सही और सटीक जानकारी चाहते हैं तो भास्कर प्रॉपर्टी की वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं।

ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।