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गायत्री जयंती 2020: ब्रह्मा जी के मुख से प्रकट हुआ था गायत्री मंत्र, गीता में है उल्लेख 

गायत्री जयंती 2020: ब्रह्मा जी के मुख से प्रकट हुआ था गायत्री मंत्र, गीता में है उल्लेख 

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म और भारतीय संस्कृति में गायत्री मंत्र का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि गुरु विश्वामित्र ने गायत्री मंत्र को पहली बार शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि सर्वसाधारण के लिए बोला था। जिसके बाद इस पवित्र एकादशी को गायत्री जयंती के रूप में जाना जाने लगा। इस वर्ष यह पर्व 02 जून, मंगलवार को मनाया जाएगा। हालांकि गायत्री जयंती की तिथि को लेकर कई तरह के मत है। कई जगहों पर ज्येष्ठ माह में गंगा दशहरा की तिथि पर गायत्री जयंती मनाई जाती है। इसके अतिरिक्त कुछ स्थानों पर श्रावण पूर्णिमा तिथि पर भी गायत्री जयंती मनाने की परंपरा है। 

शास्त्रों के अनुसार सृष्टि के आरंभ में ब्रह्मा जी के मुख से गायत्री मंत्र प्रकट हुआ था। माँ गायत्री की कृपा से ब्रह्माजी ने गायत्री मंत्र की व्याख्या अपने चारों मुखों से चार वेदों के रूप में की थी। आरम्भ में माँ गायत्री की महिमा सिर्फ देवताओं तक ही थी, लेकिन महर्षि विश्वामित्र ने कठोर तपस्या कर माँ की महिमा अर्थात् गायत्री मंत्र को जन-जन तक पहुंचाया।

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कौन हैं गायत्री मां
गायत्री माता को सभी वेदों की जननी कहा गया है। मान्यता है कि चारों वेदों का सार गायत्री मंत्र ही है। गायत्री माता से ही वेदों का जन्म हुआ है, इसलिए गायत्री माता को वेदमाता भी कहते हैं। इनकी अराधना स्वयं भगवान शिव, श्रीहरि विष्णु और ब्रह्मा करते हैं, इसलिए गायत्री माता को देव माता भी कहा जाता है। वेदमाता के अतिरिक्ति गायत्री माता को भारतीय संस्कृति की जननी भी कहा जाता है। 

स्वरूप
धर्मग्रंथों के अनुसार, माँ गायत्री को ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों स्वरुप माना जाता है और त्रिमूर्ति मानकर ही इनकी उपासना की जाती है। माँ गायत्री के पांच मुख और दस हाथ है। उनके इस रूप में चार मुख चारों वेदों के प्रतीक हैं एवं उनका पांचवा मुख सर्वशक्तिमान शक्ति का प्रतिनिधित्व करता है। माँ के दस हाथ भगवान विष्णु के प्रतीक हैं एवं त्रिदेवों की आराध्य भी माँ गायत्री को ही कहा जाता है। ये ही भगवान ब्रह्मा की दूसरी पत्नी हैं।

गीता में उल्लेख
गीता में भगवान श्री कृष्ण ने इस बात का उल्लेख किया है कि मनुष्य को अपने कल्याण के लिए गायत्री और ॐ का उच्चारण करना चाहिए। वेदों में माँ गायत्री को आयु, प्राण, शक्ति, कीर्ति, धन और ब्रह्म तेज प्रदान करने वाली देवी कहा गया है। इनकी उपासना से मनुष्य को यह सब आसानी से प्राप्त हो जाता हैं।

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गायत्री मंत्र और अर्थ

ॐ भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न: प्रचोदयात्।

सृष्टिकर्ता प्रकाशमान परामात्मा के तेज का हम ध्यान करते हैं, वह परमात्मा का तेज हमारी बुद्धि को सन्मार्ग की ओर चलने के लिए प्रेरित करे।

इस मंत्र के जाप से ज्ञान की प्राप्ति होती है और मन शांत तथा एकाग्र रहता है। ललाट पर चमक आती है। गायत्री माता के विभिन्न स्वरूपों का उनके मंत्रों के साथ जाप करने से दरिद्रता, दुख और कष्ट का नाश होता है, नि:संतानों को संतान प्राप्ति होती है।

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