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एक साथ पड़ रही है हरियाली और शनि अमावस्या, करें ये उपाय

August 06th, 2018 13:20 IST
एक साथ पड़ रही है हरियाली और शनि अमावस्या, करें ये उपाय

डिजिटल डेस्क । हरियाली अमावस्या के दिन शनिवार होने से शनि अमावस्या भी है। इस दिन कुछ विशेष उपाय किये जाएं तो कष्टों से मुक्ति पा सकते हैं। इस बार हरियाली एवं शनि अमावस्या 11 अगस्त 2018 को पड़ रही है। इस अमावस्या का महत्व इसलिए भी बढ़ा हुआ है क्योंकि जो जातक वर्तमान में शनि की चाल से नकारात्मक रूप से प्रभावित हैं। विशेषकर जिन जातकों की कुंडली में शनि की महादशा, अंतर्दशा, प्रत्यंतरदशा चल रही है या फिर जिन पर शनि की साढ़ेसाती, शनि की ढ़ैया चल रही है या जिन्हें किसी भी प्रकार का कष्ट शनि के कारण पंहुच रहा है वो जातक इस शनि अमावस्या पर शनिदेव की साधना कर उनके प्रकोप से बच सकते हैं, आइए जानते हैं कैसे?

शनि के प्रकोप से बचने के लिये शनि अमावस्या को शनिदेव की साधना करनी चाहिए। शनिदेव की शांति के लिए शनि सत्वराज का पाठ करें। शनि स्त्रोतम् या शनि अष्टक का पाठ भी कर सकते हैं। शनिदेव के बीज मंत्र का जप करने एवं शनिदेव संबंधी वस्तुओं का दान करने से भी शनि देव की कृपा प्राप्त हो सकती है। हरियाली अमावस्या के दिन अपने घर के पास चींटियों को चीनी या सूखा आटा खिलाएं और पीपल के वृक्ष के आस-पास शक्कर में नारियल का बुरादा मिलकर डालें। इसके अलावा किसी नदी या तालाब पर जाकर मछलियों को आटे की गोलियां बनाकर खिलाएं। 

हरियाली अमावस्या की रात को करीब 10 बजे नहाकर साफ पीले रंग के कपड़े पहन लें। इसके उत्तर दिशा की ओर मुख करके ऊन या कुश के आसन पर बैठ जाएं। अब अपने सामने पटिए (बाजोट या चौकी) पर एक थाली में केसर का स्वस्तिक या ऊं बनाकर उस पर महालक्ष्मी यंत्र स्थापित करें। इसके बाद उसके सामने एक दिव्य शंख थाली में स्थापित करें। अब थोड़े से चावल को केसर में रंगकर दिव्य शंख में डालें। घी का दीपक जलाकर इस मंत्र का कमलगट्टे की माला से ग्यारह माला का जाप करें-

मंत्र: 

सिद्धि बुद्धि प्रदे देवि मुक्ति भुक्ति प्रदायिनी।

मंत्र पुते सदा देवी महालक्ष्मी नमोस्तुते।।

मंत्र जाप के बाद इस पूरी पूजन सामग्री को किसी नदी या तालाब में विसर्जित कर दें। इस प्रयोग से आपको धन लाभ होने की संभावना बन सकती है। सावन हरियाली अमावस्या के दिन हनुमान मंदिर जाकर हनुमान चालीसा का पाठ करें। साथ ही हनुमानजी को सिंदूर और चमेली का तेल चढ़ाएं।

हरियाली अमावस्या की शाम को मां लक्ष्मी को खुश करने के लिए घर के ईशान कोण में घी का दीपक जलाएं और कर्पुर से आरती उतारें। इस दिन ऐसा करने से घर से दरिद्रता दूर होती है। हरयाली अमावस्या की रात को घर में पूजा करते समय पूजा की थाली में स्वस्तिक या ॐ बनाकर उस पर महालक्ष्मी यंत्र रख कर पूजा करें। शाम को शिवजी की विधिवत पूजा आराधना करें और खीर का भोग लगाएं और गरीबों में बांट दें।

रात को घर के मुख्यद्वार के दोनों तरफ दीपक प्रज्जवलित करें। शाम 5 बजे के बाद हनुमान जी के मंदिर में चमेली के तेल का दीपक जलाकर श्री राम का जाप करें या हो सके तो श्री राम का ध्यान मंत्र का जाप करें।

मंत्र:

ॐ आपदामम हर्तारम दातारं सर्व सम्पदाम,
लोकाभिरामं श्री रामं भूयो भूयो नामाम्यहम !
श्री रामाय रामभद्राय रामचन्द्राय वेधसे,
रघुनाथाय नाथाय सीताया पतये नमः !

काले कुत्ते को सरसों का तेल लगाकर रोटी खिलाएं। तुलसी के पास दीपक लगाएं। इस दिन भगवान शिव को सबसे ज्यादा खीर और मालपुए का भोग लगाए जाने का रिवाज है।

इसलिए घर में बनाएं खीर और मालपुए

बनाएं और भोग लगाएं। स्वयं भी खाएं और अधिक से अधिक लोगों को खिलाएं। यह उपाय बहुत ही शुभ होता है हरियाली अमावस्या का। इस दिन गेंहू और ज्वार की धानी खाने-खिलाने के साथ झूला झूलने का महत्व है। शाम को गाय के घी का 1 दीपक लगाएं। बत्ती में रुई का उपयोग नही करें इस दिन लाल रंग के धागे का उपयोग करें और इसमें कुछ मात्रा में केसर भी डालें। फिर इसे घर के ईशान कोण में जलाएं। इससे घर में सुख-समृद्धि आएगी और महालक्ष्मी कृपा हमेशा बनी रहेगी।

इस दिन स्नानादि करने के पश्तात पीपल अथवा तुलसी के वृक्ष की पूजा कर परिक्रमा करें। भूखे और दरिद्रों को दान-पुण्य के रूप में कुछ भेंट दें। यदि आप सर्पदोष, शनि की दशा और पितृदोष पीड़ा से पीड़ित हो तो हरियाली अमावस्या के दिन शिवलिंग पर जल और पुष्प चढ़ाएं। स्वच्छ पर्यावरण को बनाये रखने के लिए एक पौधा अपने नाम का अवश्य ही लगाएं। शस्त्रों के अनुसार आरोग्य प्राप्ति के लिए नीम का पेड़, सुख की प्राप्ति लिए तुलसी का पौधा, संतान प्राप्ति के लिए केले का वृक्ष और धन सम्पदा के लिए आंवले का पौधा विशेष रूप से लगाएं। गेहूं, ज्वार, चना,मक्का, बाजरा को अपने गमले में इस दिन प्रतीक स्वरूप बुवाई अवश्य करें। यदि भाग्य का साथ नहीं मिल पा रहा है तो घर के आसपास अशोक, अर्जुन, नारियल, बड़ (वट) के पौधे लगाएं।

संतान से होगा सुख प्राप्त

संतान से सुख पाने के लिए पीपल, नीम,बिल्व, नागकेशर, गुड़हल, अश्वगन्धा के पौधे लगाएं। यदि बुद्धि का विकास चाहते हैं तो हरियाली अमावस्या पर शंखपुष्पी, पलाश, ब्रह्मी या तुलसी का पौधा लगाएं। घर में सुख-समृद्धि चाहते हैं तो नीम, कदम्ब के पौधे लगाएं। हरियाली अमावस्या पर यहां बताए गए पौधे लगाने के साथ ही प्रतिदिन इनकी देखभाल भी करनी चाहिए। माना जाता है कि जैसे-जैसे ये पौधे बढ़ेंगे, आपकी मनोकामनाएं भी पूरी होने लगती हैं।

पति की लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्यके लिए ये उपाय करें। हरयाली अमावस्या पर जो स्त्रियां बड़ यानी वट वृक्ष की पूजा करती हैं, उनके पति को दीर्ध आयु और स्वास्थ्य लाभ प्राप्त होता है। पुराणिक कथाओं के अनुसार सावित्री ने बड़ की पूजा करके ही यमराज से अपने स्वामी (पति) के जीवन का वरदान प्राप्त किया था।

अमावस्या पर पितर देवताओं के लिए विशेष पूजा की जाती है। इसके लिए खीर-पूड़ी बनाएं और गोबर के कंडे (उपले) जलाकर धूप अर्पित करें। किसी ब्राह्मण या योग्य व्यक्ति को भोजन करवाएं। हरयाली अमावस्या पर पीपल की पूजा करें और सात परिक्रमा करें। इस उपाय से शनि, राहु-केतु के दोष शांत होते हैं। रात के समय शिवलिंग और हनुमानजी के पास दीपक जलाएं। इस उपाय से धन संबंधी कार्यों में आ रही सभी बाधाएं दूर हो जाती हैं। सभी देवी-देवताओं की कृपा से घर में सुख-समृद्धि बढ़ती है।

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डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

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ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।