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कालाष्टमी: इस व्रत को करने से शत्रु और पापों का होगा नाश, जानें पूजा विधि

कालाष्टमी: इस व्रत को करने से शत्रु और पापों का होगा नाश, जानें पूजा विधि

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। फाल्गुन माह को तीज त्यौहारों का कहा जाता है। इस माह में वैसे तो कई व्रत और पर्व आते हैं, लेकिन कृष्ण पक्ष अष्टमी की तिथि को आने वाली कालाष्टमी का पर्व खास होता है। जो कि इस बार 06 मार्च, शनिवार को है। इस दिन भगवान शिव के रौद्र रुप काला भैरव की पूजा की जाती है। माना जाता है कि इस व्रत को करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

कालभैरव की पूजा अर्चना करने से शत्रु और सभी पापों का नाश होता है। यदि कोई ग्रह अशुभ प्रभाव दे रहा है, तो कालभैरव का व्रत करने से राहत मिलती है। इनकी पूजा करने से जादू-टोना खत्म हो जाता है। साथ ही भूत-प्रेत से मुक्ति मिलती है और भय से मुक्ति मिलती है। आइए जानते हैं इस व्रत की विधि और महत्व के बारे में...

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महत्व
माना जाता है कि भगवान शिव ने पापियों को दंड देने के लिए रौद्र रुप धारण किया था। भगवान शिव के दो रुप हैं एक बटुक भैरव और दूसरा काल भैरव। बटुक भैरव रुप अपने भक्तों को सौम्य प्रदान करते हैं और वहीं काल भैरव अपराधिक प्रवृत्तयों पर नियंत्रण करने वाले प्रचंड दंडनायक हैं। इस दिन व्रत और पूजा करने से घर में कभी भूत-पिशाच या किसी बुरी नजर का साया नहीं पड़ता है।

पूजा विधि  
- कालाष्टमी के दिन ब्रह्ममुहूर्त में उठकर नित्य-क्रम आदि के बाद स्नान करें और व्रत का संकल्प लें।
- लकड़ी के पाट पर भगवान शिव और माता पार्वती के साथ कालभैरव की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें। 
- इसके बाद चारों तरह गंगाजल का छिड़काव करें और सभी फूलों की माला या फूल अर्पित करें। 
- अब नारियल, इमरती, पान, मदिरा, गेरुआ आदि चीजें अर्पित करें। 

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- इसके बाद चौमुखी दीपक जलाएं और धूप-दीप करें।
- कुमकुम या हल्दी से सभी को तिलक लगाएं।
- सभी की एक-एक करके आरती उतारें। 
- इसके बाद शिव चालिसा और भैरव चालिसा का पाठ करें। 

ये कार्य भी करें
व्रत के पूर्ण हो जाने के बाद काले कुत्ते को मीठी रोटी या फिर कच्चा दूध पीलाएं और दिन के अंत में कुत्ते की भी पूजा करें। इसके बाद रात्रि के समय काल भैरव की सरसों के तेल, उड़द, दीपक, काले तिल आदि से पूजा-अर्चना करें और रात्रि जागरण करें।

इस मंत्र का करें जाप
शिवपुराण में कालभैरव की पूजा के दौरान इन मंत्रों का जप करना फलदायी माना गया है।
अतिक्रूर महाकाय कल्पान्त दहनोपम्,
भैरव नमस्तुभ्यं अनुज्ञा दातुमर्हसि!!

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