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विश्वकर्मा जयंती: विश्व के पहले इंजीनियर का जन्मदिन 

September 17th, 2018 12:53 IST

डिजिटल डेस्क, भोपाल। विश्व के पहले इंजीनियर के जन्मदिवस को देशभर में विश्वकर्मा जयंती के रूप में मनाया जाता है। इस वर्ष विश्वकर्मा जयंती 17 सितंबर 2018 को सोमवार के दिन मनाई जाएगी। प्रत्येक वर्ष विश्वकर्मा पूजा सूर्य के कन्या राशि में प्रवेश होने पर या कन्या सक्रांति पर मनाई जाती है। इस दिन श्री विश्वकर्मा जी का जन्म दिवस होता है जिस कारण इसे विश्वकर्मा जयंती भी कहते हैं।

श्री विश्वकर्मा जी को पृथ्वी का प्रथम इंजीनियर या वास्तुकार माना जाता है। इस दिन कारखानों, उद्योगों, फेक्ट्रियों, हर प्रकार की मशीनों और औजारों की पूजा की जाती है। इनकी पूजा सभी कलाकार, बुनकर, शिल्पकार, औद्योगिक घरानों और फैक्ट्री के मालिकों द्वारा की जाती है। इस दिन अधिकतर कल-कारखाने बंद रहते हैं और लोग हर्षोल्लास के साथ भगवान विश्वकर्मा जी की पूजा करते हैं। मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक, दिल्ली आदि राज्यों में भगवान विश्वकर्मा की भव्य प्रतिमा स्थापित कर उनकी सेवा आराधना की जाती है।

बताया जाता है कि प्राचीन काल में जितनी भी राजधानियां थी, प्राय: सभी को विश्वकर्मा जी ने बनाया है। सतयुग का 'स्वर्ग लोक', त्रेता युग की 'लंका', द्वापर की 'द्वारिका’ हस्तिनापुर' और इन्द्रप्रस्थ आदि सभी विश्वकर्मा जी द्वारा ही रचित हैं। 'सुदामापुरी' की रचना के विषय में भी यह कहा जाता है कि उसके निर्माता विश्वकर्मा जी ही थे।

श्री विश्वकर्मा जी की उत्पत्ति की कथा :-

सृष्टि के प्रारंभ में सर्वप्रथम एक बार 'नारायण' अर्थात श्री हरी विष्णु क्षीर सागर में शेषशय्या पर विश्राम कर रहे थे और उनकी नाभि पर पुष्प कमल पर चर्तुमुख ब्रह्मा जी बैठे थे।

भगवान विश्वकर्मा जी के अनेक रूप दर्शाए गए हैं-

दो भुजाधारी, चार भुजाधारी एवं दस भुजाधारी तथा एक मुखी, चतुर्मुख मुखी एवं पंचमुखी वाले रूप दर्शाए गए हैं। विश्वकर्मा जी के पांच पुत्र हुए 1- मनु, 2- मय, 3- त्वष्ठा, 4- शिल्पी, 5- दैवज्ञ

ऋषि मनु – ये “सानग गोत्र” के कहे जाते हैं । ये लोहे के कर्म के उध्दगाता हैं। इनके वंशज लोहकार के रुप में जाने जाते हैं

ऋषि मय – ये सनातन गोत्र के कहे जाते हैं। ये बढई के कर्म के उद्धगाता हैं। इनके वंशज काष्टकार के रुप में जाने जाते हैं।

ऋषि त्वष्ठा – इनका दूसरा नाम त्वष्ठा है जिनका गोत्र अहंभन है। इनके वंशज ताम्रक के रूप में जाने जाते हैं।

ऋषि शिल्पी – इनका दूसरा नाम शिल्पी है जिनका गोत्र प्रयत्न है। इनके वंशज शिल्पकला के अधिष्ठाता हैं और इनके वंशज संगतराश भी कहलाते है इन्हें मुर्तिकार भी कहते हैं।

ऋषि दैवज्ञ - दैवज्ञ को सोने-चांदी एवं रत्नों के कार्य से जोड़ा जाता इन्हें स्वर्णकार भी कहते हैं।

भगवान विश्वकर्मा पूजा विधि 

विश्वकर्मा जयंती के दिन प्रातः काल स्नान आदि करने के बाद पत्नी सहित पूजा स्थान पर बैठें। 
इसके बाद विष्णु भगवान का ध्यान करते हुए हाथ में पुष्प, अक्षत लेकर- 
ॐ आधार शक्तपे नम:, ॐ कूमयि नम:, ॐ अनन्तम नम: और ॐ पृथिव्यै नम: 
कहते हुए चारों दिशाओं में अक्षत छिड़कें और पीली सरसों लेकर चारों दिशाओं को बांधे। 
अपने हाथ में रक्षासूत्र बांधे तथा पत्नी को भी रक्षासूत्र बांधे। 
पुष्प जल पात्र में छोड़ें। हृदय में भगवान श्री विश्वकर्मा जी का ध्यान करें। 
रक्षा दीप जलाएं, जल के साथ पुष्प एवं सुपारी लेकर संकल्प करें। 
शुद्ध भूमि पर अष्टदल (आठ पंखुड़ियों वाला) कमल बनाएं। उस स्थान पर सात अनाज रखें। उस पर मिट्टी और तांबे का जल डालें। 
इसके बाद पंचपल्लव (पाँच वृक्षों के पत्ते), सात प्रकार की मिट्टी, सुपारी, दक्षिणा कलश में डालकर कपड़े से कलश को ढ़क दें। एक अक्षत (चावल) से भरा पात्र समर्पित कर ऊपर विश्वकर्मा भगवान की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें फिर वरुण देव का आह्वान करें।

पुष्प चढ़ाकर कहें – हे भगवान् विश्वकर्मा जी, इस प्रतिमा में विराजमान होकर मेरी पूजा को स्वीकार कीजिए। इसके बाद कथा पढ़ें, सुनें और सुनाएं।

विश्वकर्मा जी की प्रचलित कथा :-

एक बार वाराणसी में धार्मिक व्यवहार से चलने वाला एक रथकार अपनी पत्नी के साथ रहता था। वह अपने कार्य में निपुण था, परंतु अनेक नगरों में भ्रमण करने पर भी भोजन से अधिक धन प्राप्त नहीं कर पाता था। अपने पति की भांति रथकार की पत्नी भी पुत्र न होने के कारण बहुत चिंतित रहा करती थी। पुत्र प्राप्ति के लिए वे दोनों साधु-संतों एवं मंदिरों में जाते थे, किन्तु उनका मनोरथ पूर्ण नहीं हो रहा था।

तब एक उनके पड़ोसी ब्राह्मण ने रथकार की पत्नी से कहा कि तुम भगवान विश्वकर्मा जी की शरण में जाओ,  तुम्हारा मनोरथ अवश्य ही पूरा होगा और अमावस्या तिथि को उनका व्रत कर भगवान विश्वकर्मा जी की कथा श्रवण करो। तब से रथकार ने अपनी पत्नी सहित अमावस्या के दिन भगवान विश्वकर्मा की पूजा की, और विश्वकर्मा जी का आशीर्वाद प्राप्त हुआ तब उसे धन-धान्य और पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई और वे सुखी जीवन व्यतीत करने लगे। भारत के अनेक भागों में इस पूजा का बहुत महत्व माना जाता है।

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साप्ताहिक राशिफल: कलाशांति ज्योतिष साप्ताहिक राशिफल 30 मार्च से 05 अप्रैल तक


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वृषभ लग्नराशि (Taurus):➤ कलाशांति ज्योतिष साप्ताहिक राशिफल 30 मार्च से 05 अप्रैल तक:- ॐ इस सप्ताह वृषभ राशि वालों का जीवनसाथी के प्रति प्रेम बढ़ सकता है। पारिवारिक जीवन में कलह की स्थिति उत्पन्न हो सकती है अतः सतर्क बने रहे। इस सप्ताह आपको अपनी वाणी पर संयम बनाए रखने की जरूरत रहेगी। कार्यक्षेत्र के लिहाज से सप्ताह सामान्य बना रहेगा। व्यापारिक वर्ग को कुछ अच्छे लाभ मिलने के संकेत है। भाई बहनों से लाभ तथा सहयोग की प्राप्ति होगी। धार्मिक कार्यो के प्रति आपका रुझान अधिक बना रह सकता है। धन खर्च की अधिकता भी रहेगी। तनाव लेने से बचें।   

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तुला लग्नराशि (Libra):➤ कलाशांति ज्योतिष साप्ताहिक राशिफल 30 मार्च से 05 अप्रैल तक:- ॐ इस सप्ताह तुला राशि वालों की धर्म-कर्म में भागीदारी बढ़ सकती है। आप धार्मिक कथाओं में अधिक रूचि लेंगे। छोटे मोटे कार्यो को लेकर कार्यक्षेत्र में आपकी गतिविधि बनी रह सकती है। इस सप्ताह बुद्धि संबंधी चर्चाओं में आप भाग ले सकते है। सेहत के लिहाज से सप्ताह अच्छा बना हुआ है। पारिवारिक सदस्यों के साथ सामंजस्य बना रहेगा तथा जीवनसाथी के साथ सम्बन्ध मधुर रहेंगे। सप्ताह के अंतिम भाग में अचानक धन का लाभ हो सकता है।

वृश्चिक लग्नराशि (Scorpio):➤ कलाशांति ज्योतिष साप्ताहिक राशिफल 30 मार्च से 05 अप्रैल तक:- ॐ इस सप्ताह वृश्चिक राशि वालों को मानसिक तथा शारीरिक तकलीफ परेशान कर सकती है। जीवनसाथी तथा बच्चों के साथ अच्छा समय व्यतीत कर सकते है। इस सप्ताह आप पारिवारिक जिम्मेदारियों का निर्वाह अच्छी तरह से करेंगे। लेखन के कार्यो से जुड़े हुए जातको के लिए यह सप्ताह फलदायी साबित हो सकता है। प्रेमी वर्ग को अच्छे समाचार मिल सकते है। इस सप्ताह आप साफ़ सफाई पर अधिक ध्यान दे सकते है। छात्र वर्ग को यह सप्ताह  विशेष लाभ देने वाला रहेगा, विशेषकर उच्च शिक्षा वर्ग के छात्रों को।

धनु लग्नराशि (Sagittarius):➤ कलाशांति ज्योतिष साप्ताहिक राशिफल 30 मार्च से 05 अप्रैल तक:- ॐ इस सप्ताह धनु राशि वालों को अपने पारिवारिक तथा वैवाहिक जीवन में संघर्ष करना पड़ सकता है। अपने निजी जीवन में अपने क्रोध तथा वाणी पर अंकुश रखना आपके लिए हितकारी सिद्ध होगा। सेहत को लेकर भी इस सप्ताह आप परेशान बने रह सकते है। आँखों तथा सिरदर्द की तकलीफ परेशान कर सकती है। धन सम्बन्धी मामलों को लेकर कुछ परेशानी हो सकती है। घरेलु सामग्री पर आपका धन का खर्च हो सकता है। कार्यक्षेत्र में स्थितियां सामान्य रहेगी।

मकर लग्नराशि (Capricorn):➤ कलाशांति ज्योतिष साप्ताहिक राशिफल 30 मार्च से 05 अप्रैल तक:- ॐ इस सप्ताह मकर राशि वालों को संतान सुख मिलेगा। कार्यक्षेत्र के लिहाज से सप्ताह का मध्य भाग आपके लिए अच्छा रहेगा। सेहत से जुडी कोई समस्या इस सप्ताह आपको परेशान कर सकती है। पारिवारिक तथा वैवाहिक जीवन सामान्य बना रहेगा। जीवनसाथी को इस सप्ताह अच्छे फल प्राप्त हो सकते है। वाहन चलाते समय सतर्कता बरतें। इस सप्ताह क़ानूनी नियमों का पालन करें अन्यथा कष्ट मिल सकते है। धन व्यय की अधिकता के चलते परेशान हो सकते है।    

कुंभ लग्नराशि (Aquarius):➤  कलाशांति ज्योतिष साप्ताहिक राशिफल 30 मार्च से 05 अप्रैल तक:- ॐ इस सप्ताह कुंभ राशि वालों को आय से सम्बंधित मामलों में असफलता हाथ लग सकती है। आपकी सुविधाओं में वृद्धि होगी। आपका खान पान उच्च कोटि का रहेगा। आप पारिवारिक सदस्यों तथा मित्रों के साथ अधिक समय व्यतीत करेंगे। जीवनसाथी के साथ प्रेम भाव में वृद्धि होगी। अहंकार से दूर बने रहे उचित रहेगा। सेहत का ध्यान रखे चोट लग सकती है। छात्र वर्ग के लोग इस सप्ताह अपने जरुरी कार्य पूर्ण करने में आलस्य करेंगे। संतान से मतभेद संभव है।   

मीन लग्नराशि (Pisces):➤  कलाशांति ज्योतिष साप्ताहिक राशिफल 30 मार्च से 05 अप्रैल तक:- ॐ इस सप्ताह  मीन राशि वालों को अपनी दैनिक सुख सुविधाओं में कुछ कमी मिल सकती है। कार्यक्षेत्र में स्थितियां गंभीर बनी रह सकती है। धन से जुड़े मामलों के लिए आपको अधिक परिश्रम करना पड़ेगा। छात्र वर्ग इस सप्ताह अपने सभी कार्य आने वाले कल पर टाल सकते है। संतान की सेहत का ध्यान रखे। सप्ताह के मध्य में आपको कोई छोटा धन का लाभ मिल सकता है। माता -पिता की सेहत का ध्यान रखे। इस सप्ताह आपके मान-सम्मान में वृद्धि हो सकती है। तनाव से खुद को दूर रखें।

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