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Gupt Navratri 2020: देवी की कृपा प्राप्त करने इस दिन करें कन्या पूजन, लेकिन इन बातों का रखें ध्यान

Gupt Navratri 2020: देवी की कृपा प्राप्त करने इस दिन करें कन्या पूजन, लेकिन इन बातों का रखें ध्यान

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। आषाढ़ मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा 22 जून से गुप्त नवरात्रि की शुरुआत हो चुकी है। ऐसे में महानवमी तक मां दुर्गा की आराधना की जा रही है और भक्त इस दौरान व्रत भी रखते हैं। माना जाता है कि नवरात्र में मां भगवती के नौ रूपों की भक्ति करने से हर मनोकामना पूरी होती है। वहीं इन दिनों में कन्या पूजन का अत्यधिक महत्व बताया गया है। कुछ लोग नवरात्रि के दिनोंं में कन्या भोज व पूजन कराते हैं, वहीं कई नवरात्रि के आखिरी दिन यानि की महानवमी पर कन्या पूजन करते हैं। हालांकि शास्‍त्रों के अनुसार कन्‍या पूजन के लिए दुर्गाष्‍टमी का दिन सबसे ज्‍यादा महत्‍वपूर्ण और शुभ माना गया है। 

कन्याओं का पूजन नौ देवियों का स्वरूप मानकर किया जाता है। हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार कन्याओं का देवियों की तरह आदर सत्कार और भोज कराने से मां दुर्गा प्रसन्न होती हैं और अपने भक्तों को सुख समृधि का वरदान देती हैं। क्यों किया जाता है कन्या पूजन और किन बातों का रखना चाहिए ध्यान, आइए जानते हैं...

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क्यों किया जाता है कन्‍या पूजन?
दरअसल हिन्दू धर्मशास्त्रों में कन्याओं को देवी का रूप माना गया है। ऐसे में नवरात्रि में जब देवी की आराधना की जाती है तो इनका महत्व और अधिक बढ़ जाता है। लोग कन्याओं की पूजा देवी के रूप करते हैं और उन्हें भोजन कराते हैं। इसके बाद अपने सामर्थ्य के अनुसार उन्हें दक्षिणा देकर उनसे आर्शीवाद लिया जाता है। माना जाता है कि इससे मां दुर्गा प्रसन्न होती हैं।

ऐसे करें कन्या पूजा
- कन्या पूजन या भोजन के ​लिए कन्याओं को एक दिन पहले ही आमंत्रित कर लें। 
- कन्याओं के घर आने पर पूरे परिवार के उनका स्वागत करें और मां दुर्गा के सभी नौ नामों के जयकारे लगाएं।
- इसके बाद इन कन्याओं को स्वच्छ जगह पर बैठाकर सभी के पैरों को अपने हाथों से धुलाएं, इसके लिए दूध का उपयोग भी कर सकते हैं।
- इसके बाद कन्याओं के माथे पर अक्षत, फूल और कुंकुम लगाएं।
- अब मां भगवती का ध्यान करें और कन्याओं को इच्छा अनुसार भोजन कराएं। यहां आप हलवा पूरी भी खिला सकते हैं।
- भोजन के बाद कन्याओं को अपने सामर्थ्‍य के अनुसार दक्षिणा, उपहार दें और उनके पुनः पैर छूकर आशीष लें।

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इन बातों का रखें ध्यान
कन्या का चयन करते समय इस बात का ध्यान रखना जरूरी होता है कि कन्या ग्यारह साल से कम की हो। चूंकि ग्यारह साल के बाद अधिकतर लड़कियों के पीरियड्स शुरू हो जाते हैं और फिर उनकी गिनती कन्या में नहीं बल्कि बड़ी लड़कियों में की जाती है।
माना जाता है कि जिन कन्याओं का अंग−भंग होता है, उनका पूजन नवरात्रि समापन के दिन करना अच्छा नहीं माना जाता।  

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