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दैनिक भास्कर हिंदी: Fake News: UPSC एग्जाम में मुस्लिम कैंडिडेट्स को उम्र सीमा में 3 साल ज्यादा छूट मिल रही है, जानें क्या है वायरल दावे का सच

September 17th, 2020

डिजिटल डेस्क। पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर एक मैसेज वायरल हो रहा है। इस मैसेज में यह दावा किया जा रहा है कि, UPSC द्वारा कराई जाने वाली IAS एग्जाम में मुस्लिम कैंडिडेट्स को हिंदू कैंडिडेट्स की तुलना में कई ज्यादा छूट मिलती है। एग्जाम में हिंदू कैंडिडेट्स के लिए आयु सीमा जहां 32 वर्ष रखी गई है। वहीं मुस्लिम कैंडिडेट्स के लिए यह आयु सीमा 3 साल ज्यादा यानी 35 वर्ष है। मुस्लिम कैंडिडेट्स को UPSC में शामिल होने के लिए 9 मौके दिए जाते हैं। जबकि हिंदू उम्मीदवार को सिर्फ 6 मौके ही मिलते हैं। वायरल मैसेज के साथ सुदर्शन न्यूज के कार्यक्रम का एक स्क्रीनशॉट भी वायरल हो रहा है। यह कार्यक्रम यूट्यूब पर भी उपलब्ध है। ​​​​​​

किसने किया शेयर?
कई ट्विटर और फेसबुक यूजर ने भी इस मैसेज को सच मानकर शेयर किया है। 

क्या है सच?
भास्कर हिंदी टीम ने पड़ताल में पाया कि, सोशल मीडिया पर वायरल मैसेज में किया जा रहा दावा गलत है। हमने सच जानने के लिए UPSC 2020 का ऑफिशियल नोटिफिकेशन चेक किया। नोटिफिकेशन में उम्र सीमा और उम्र सीमा में मिलने वाली छूट के बारे में पूरी जानकारी दी गई है। नोटिफिकेशन के अनुसार 21 से 32 वर्ष के कैंडिडेट्स UPSC की IAS एग्जाम के लिए आवेदन कर सकते हैं। उम्र सीमा में छूट की बात करें तो, एससी/ एसटी कैंडिडेट्स को 5 साल, ओबीसी कैटेगरी के कैंडिडेट्स को 3 साल की छूट मिलती है। जो कैंडिडेट्स पहले से डिफेंस के क्षेत्र में कमीशंड हैं, उन्हें अलग-अलग नियमों के मुताबिक 3 या 5 साल की छूट दी जाती है। नोटिफिकेशन में कहीं भी मुस्लिम कैंडिडेट्स को अलग से उम्र सीमा में छूट मिलने का कोई जिक्र नहीं किया गया है।

वहीं UPSC में मुस्लिम कैंडिडेट्स को मिलने वाले अधिक मौकों वाला दावा भी गलत है। नोटिफिकेशन के अनुसार सामान्य श्रेणी के कैंडिडेट्स के लिए 6 मौके होते हैं। वहीं ओबीसी कैंडिडेट्स को 9 मौके मिलते हैं। एससी/ एसटी कैंडिडेट्स के लिए कोई सीमा नहीं है। नोटिफिकेशन में मुस्लिम कैंडिडेट्स के लिए अलग से मौकों को लेकर कोई छूट नहीं दी गई है। 

निष्कर्ष : सोशल मीडिया पर वायरल मैसेज के साथ किए जा रहे दावे गलत हैं। मुस्लिम छात्रों को UPSC एग्जाम में किसी भी प्रकार की अतिरिक्त छूट नहीं दी जाती है। मुस्लिम छात्रों को एग्जाम में उतने ही मौके मिलते हैं, जितने किसी अन्य समुदाय के छात्रों को मिलते हैं।

 

 

 

 

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