दैनिक भास्कर हिंदी: शिक्षकों के रिक्त पद 6 माह में भरें, यूजीसी ने दिए उच्च शिक्षा संस्थानों को निर्देश

June 8th, 2019

डिजिटल डेस्क, नागपुर। यूनिवर्सिटी समेत देश भर के उच्च शिक्षा संस्थानों में बड़ी संख्या में शिक्षकों के पद रिक्त हैं। इसका असर अब शिक्षा की गुणवत्ता पर भी नजर आ रहा है। शिक्षा संस्थानों के ग्रेडेशन और रैंकिंग लगातार फिसलती जा रही है। इस समस्या को पहचानते हुए अब विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने भी पदभर्ती का परचम उठाया है। यूजीसी ने नागपुर विश्वविद्यालय समेत देश भर के सभी उच्च शिक्षा संस्थानों को 6 माह के भीतर अपने यहां शिक्षक पदभर्ती करने के निर्देश दिए हैं। यूजीसी ने बाकायदा इसके लिए टाइमफ्रेम भी जारी किया है। यहीं नहीं, रिक्त पदों पर नजर रखने के लिए यूजीसी ने केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय की वेबसाइट नेशनल हायर एजुकेशन रिसर्च सेंटर (एनएचईआरसी) की वेबसाइट पर यूनिवर्सिटी  को डाटा अपलोड करने को कहा है।

यह है टाइमफ्रेम

यूजीसी ने नागपुर यूनिवर्सिटी 1 को निर्देश दिए हैं कि, यूनिवर्सिटी 15 दिनों के भीतर अपने यहां के रिक्त, 6 माह में रिक्त होने वाले शिक्षक पदों की पहचान करके एनएचईआरसी पर अपलोड करें। अगले तीन दिन से संबंधित प्राधिकरण से नियुक्ति की मंजूरी लें। एक माह में विज्ञापन जारी करके चयन समिति का गठन करें। अगले डेढ़ माह में उम्मीदवारों का चयन करके उन्हें साक्षात्कार के लिए बुलाएं। अगले तीन माह में चयनित उम्मीदवार को नियुक्ति पत्र जारी करके ब्योरा एनएचईआरसी की वेबसाइट पर अपलोड करें। 

राज्य सरकार पर दारोमदार

यूजीसी अध्यक्ष प्रो. डी.पी. सिंह ने नागपुर में एक कार्यक्रम के दौरान इस समस्या पर बात की। संस्कृत विश्वविद्यालय के पूर्व कुलगुरु डॉ. पंकज चांदे विषय उठाया कि, शिक्षा प्रणाली में शिक्षक और विद्यार्थी दो मुख्य घटक हैं। हमारे विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में शिक्षकों के पद रिक्त होने के कारण गुणवत्ता गिरती जा रही है, जिसके बाद प्रो. सिंह ने यूजीसी के इस नए फैसले के बारे में जानकारी दी। हमने जब उनसे पूछा कि, एक ओर जहां राज्य सरकार द्वारा शिक्षक पदभर्ती पर रोक लगाई गई है, ऐसे में क्या यूजीसी भी राज्य सरकार के साथ पदभर्ती को लेकर समांतर बातचीत में है? प्रो.सिंह ने जवाब दिया कि, यूजीसी शिक्षा से जुड़े विषयों को लेकर लगातार राज्य के सचिवों से संपर्क में रहती है। वहीं अब विश्वविद्यालय सरकार के पास यूजीसी के टाइमफ्रेम का हवाला देते हुए पदभर्ती को गति देने का मुद्दा मजबूती के साथ उठा सकती है।

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