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स्त्री द्वेष के लिए फिल्मों को दोष देना पूरी तरह सही नहीं: नटखट निर्देशक

June 20th, 2020 12:30 IST
 स्त्री द्वेष के लिए फिल्मों को दोष देना पूरी तरह सही नहीं: नटखट निर्देशक

हाईलाइट

  • स्त्री द्वेष के लिए फिल्मों को दोष देना पूरी तरह सही नहीं: नटखट निर्देशक

नई दिल्ली, 20 जून (आईएएनएस)। हिंदी फिल्मों को अक्सर स्त्री द्वेष और विषाक्त मर्दानगी फैलाने के लिए दोषी ठहराया गया है, जिसका एक ताजा उदाहरण कबीर सिंह है। निर्देशक शान व्यास, जिनकी नई लघु फिल्म नटखट लैंगिक असमानता और पितृसत्ता की अवधारणा के इर्द-गिर्द घूमती है, उनका कहना है कि नकारात्मकता फैलाने के लिए सिर्फ फिल्मों को दोष देना पूरी तरह से सही नहीं है।

व्यास ने आईएएनएस को बताया, सिर्फ फिल्मों को दोष देना पूरी तरह से सही नहीं है, क्योंकि विश्वास प्रणाली अलगाव में नहीं बनती है। लेकिन फिल्मकार के रूप में हमें यह स्वीकार करने की आवश्यकता है कि हम अपनी फिल्मों में जो स्त्री द्वेष और पितृसत्ता का महिमामंडन करते हैं, वह युवा दिमाग पर काफी प्रभाव डालते हैं, और इसकी जिम्मेदारी हमें लेने की जरूरत है।

उन्होंने आगे कहा, इसके अलावा फिल्म और जो हम फिल्मों में दिखाते हैं, वह भी कहीं न कहीं समाज को दशार्ती है, इसलिए यह सिर्फ एक प्रभाव नहीं है, बल्कि कई बार दर्पण भी होता है।

व्यास की हाल ही में रिलीज नटखट को एक जेंडर इक्वल क्रू टीम के साथ मिलकर बनाया गया है, जिसमें विद्या बालन, बाल कलाकार सानिका पटेल और लेखक अन्नुकम्पा हर्ष जैसे लोग शामिल हैं।

आज की फिल्मों में महिला कलाकारों को ध्यान में रखकर फिल्में बनाई जाती हैं और कई फिल्में महिला प्रधान भी होती हैं, जैसा कि अतीत में नहीं होता था और बॉलीवुड में तो आमतौर पर मर्दानगी का महिमामंडन किया जाता था।

उन्होंने कहा, यह महत्वपूर्ण है और यह समाज में हो रहे बदलाव पर प्रकाश डालता है। परंपरागत रूप से हमारी फिल्में मर्दानगी पर अधिक चलती थीं, इसकी वजह यह थी कि हमारे टिकट लेने वाले दर्शक मुख्य रूप से पुरुष होते थे। हालांकि दर्शक अब बेहतर कहानियां, अधिक कंटेंट और कम तमाशा चाहते हैं। मुझे लगता है कि इसकी वजह से बदलाव हुआ है।

नटखट की कहानी एक मां के चारों ओर घूमती है जो अपने बेटे को लिंग समानता के बारे में शिक्षित करती है। फिल्म रोनी स्क्रूवाला के साथ विद्या बालन द्वारा सह-निर्मित है।

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।