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धड़क रिव्यू: पहले प्यार की मासूमियत देखना चाहते हैं तो आपके लिए है धड़क

September 06th, 2018 16:24 IST
धड़क रिव्यू: पहले प्यार की मासूमियत देखना चाहते हैं तो आपके लिए है धड़क

डिजिटल डेस्क, मुंबई। इस शुक्रवार श्रीदेवी की बेटी जाह्नवी कपूर की डेब्यू फिल्म धड़क सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। फिल्म में जाह्नवी के अपोजिट शाहीद कपूर के छोटे भाई ईशान खट्टर लीड रोल में हैं। ये फिल्म मराठी ब्लॉकबस्टर फिल्म 'सैराट' का हिंदी रीमेक है। इस फिल्म से भी सभी को काफी उम्मीदें थीं। आइये देखते हैं कि फिल्म अपनी उम्मीदों पर कितना खरी उतरी है।

फिल्म: धड़क 
डायरेक्टर: शशांक खेतान 
स्टार कास्ट: ईशान खट्टर, जान्हवी कपूर ,आशुतोष राणा
अवधि: 2 घंटा 17 मिनट
रेटिंग: 3 स्टार

निर्देशक परिचय 

फिल्म 'धड़क' का निर्देशन डायरेक्टर शशांक खेतान ने किया है। शशांक इससे पहले फिल्म इंडस्ट्री को 'हम्पटी शर्मा की दुल्हनिया' और 'बद्रीनाथ की दुल्हनिया' जैसी सुपरहिट फिल्में दे चुके हैं। इन दोनों ही फिल्मों में मंझे हुए कलाकार वरुण धवन और आलिया भट्ट ने काम किया था। इस बार उनकी इस फिल्म में दोनों ही कलाकार युवा हैं और मंझे हुए नहीं हैं। इन सितारों के साथ शशांक का एक्सपरीमेंट कैसा साबित हुआ आइये जानते हैं।

कहानी 

फिल्म 'धड़क' मराठी फिल्म 'सैराट' की हिन्दी रीमेक है। जाहिर है फिल्म की कहानी सैराट की तरह ही है। फिल्म की कहानी राजस्थान के उदयपुर से शुरू होती है। जहां रहने वाले रतन सिंह (आशुतोष राणा) एक होटल के मालिक हैं उदयपुर के दबंग भी हैं। उनका एक बेटा है रूप सिंह जो अपने पिता की ही तरह दबंग है। उनकी बेटी पार्थवी (जाह्नवी कपूर) भी अपने पिता की लाडली है। दूसरी ओर उदयपुर में ही एक रेस्टोरेन्ट संचालित करने वाले का बेटा मधुकर बागला (ईशान खट्टर) जो अपने पिता का हाथ बटाने के साथ ही टूरिस्ट गाइड भी है। पार्थवी और मधुकर एक ही कॉलेज में पढ़ते हैं और वहीं मधुकर को देखते ही देखते पार्थवी से प्यार हो जाता है और वो लग जाता है पार्थवी को इम्प्रेस करने में। फिर शुरू होती है इन दोनों की लव स्टोरी। लेकिन मधुकर के पिता को ये पसंद नहीं होता कि उनका बेटा किसी ऊंची जाति की लड़की से मिले। मधुकर और पार्थवी किसी की भी परवाह किये बिना एक-दूसरे से मिलते रहे। दूसरी ओर ठाकुर रतन सिंह चुनाव लड़ने की तैयारी में लगे हैं, ऐसे में उन्हें वोटर को रिझाना भी मजबूरी बनता जा रहा है। रतन सिंह को पार्थवी और मधुकर के प्यार के बारे में जब पता लगता है तो मधुकर और उसकी फैमिली पर उनका कहर टूट पड़ता है। ऐसे में दोनों उदयपुर से भाग जाते हैं, अब आगे क्या होगा यह जानने के लिए आपको थिएटर की ओर रूख करना होगा।

निर्देशन और पटकथा 

निर्देशन की बात की जाए तो फिल्म के डायरेक्टर शशांक खेतान ने इंटरवल से पहले की फिल्म को कुछ ज्यादा ही खींच दिया। खासकर पार्थवी और मधुकर की मुलाकातों के लंबे सीन पर आसानी से कैंची चलाई जा सकती थी। इससे फिल्म का फर्स्ट हाफ काफी स्लो लगता है। वहीं सेकंड हाफ में मधुकर और पार्थवी के संघर्ष को दिखाया गया है। बात की जाए फिल्म की लोकेशन्स की तो लोकेशन्स काफी अच्छी हैं लेकिन उनका इस्तेमाल और बखूबी किया जा सकता था।

अभिनय और संगीत 

फिल्म से श्रीदेवी की बेटी जाह्नवी कपूर ने डेब्यू किया है। अपनी पहली फिल्म में उन्होंने काफी अच्छा अभिनय किया है। उनका पहली फिल्म के लिए होमवर्क दिख रहा है। ईशान की ये दूसरी फिल्म है जिसके हिसाब से उन्होंने लोगों का दिल जीत लिया है। दोनों की ऑनस्क्रीन कैमिस्ट्री भी बेहद खूबसूरत लग रही है। लेकिन फिस के किसी-किसी सीन में जाह्नवी ईशान से बड़ी नजर आ रही हैं। ठाकुर रतन सिंह के रोल में आशुतोष राणा का जवाब नहीं। मधुकर के दोस्त बने अंकित बिष्ठ और श्रीधरन अपने अपने रोल में फिट रहे।

बात की जाए फिल्म के म्यूजिक की तो लॉन्च के साथ ही इसके म्यूजिक ने लोगों के दिल में जगह बना ली थी। फिल्म के दो गाने 'धड़क है न' और 'पहली बार' का फिल्मांकन बेहद खूबसूरत है। हालांकि फिल्म का गाना 'झिंगाट' मराठी 'झिंगाट' को बीट नहीं कर पाया।

क्यों जाएं फिल्म देखने 
जाह्नवी और ईशान की बेहतरीन केमिस्ट्री, राजस्थान की पृष्ठभूमि में बनी इस फिल्म की कहानी में बेशक नया कुछ न हो लेकिन कहानी को ऐसे दिलचस्प ढंग से पेश किया गया है कि आप कहानी से बंधे रहते हैं। क्रिटिक्स की तरफ से इस फिल्म को साढ़े 3 स्टार दिए गए हैं।   

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।